H-1B वीजा 2026 में आवेदन घटने से चयन दर में बड़ा उछाल देखा गया है, जो कई मामलों में 75% तक पहुंच गया। नई नीतियों और महंगी स्पॉन्सरशिप फीस के कारण कंपनियों ने विदेशी भर्ती कम की, जिससे कम आवेदनों के बीच चयन की संभावना बढ़ गई।
H-1B Visa Selection Rate: अमेरिका में H-1B वीजा 2026 के दौरान चयन दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहां कम आवेदनों के बीच अधिक उम्मीदवारों को चुना गया। इस बदलाव के पीछे नई इमिग्रेशन नीतियां और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर बढ़ी लागत प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, आवेदन संख्या में भारी गिरावट आई, जिससे सीमित वीजा कोटा के बावजूद चयन की संभावना बढ़ गई। खासतौर पर उच्च वेतन और अनुभवी उम्मीदवारों को इस नई व्यवस्था में ज्यादा फायदा मिला है।
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कम आवेदन, ज्यादा सिलेक्शन का खेल
इस साल H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। अनुमान के मुताबिक कुल आवेदन 1.95 लाख से 2.35 लाख के बीच रहे, जो पिछले साल की तुलना में करीब 43% कम हैं।
आवेदन कम होने का सीधा असर सिलेक्शन रेट पर पड़ा। जब आवेदकों की संख्या घटती है और वीजा की तय सीमा (85,000) बनी रहती है, तो स्वाभाविक रूप से चयन की संभावना बढ़ जाती है।
ट्रंप की पॉलिसी का कितना असर?
नई नीतियों के तहत विदेशी कर्मचारियों को हायर करने पर करीब 1 लाख डॉलर की फीस लगाई गई, जिससे कंपनियों के लिए इंटरनेशनल हायरिंग महंगी हो गई। इसका असर यह हुआ कि कई कंपनियों और संस्थानों ने H-1B स्पॉन्सरशिप कम कर दी।
इसके साथ ही एक वेटेड लॉटरी सिस्टम लागू किया गया, जिसमें ज्यादा वेतन और अनुभवी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे हाई-स्किल्ड और सीनियर प्रोफेशनल्स के चयन की संभावना और बढ़ गई।
किन उम्मीदवारों को मिला सबसे ज्यादा फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार, मास्टर्स डिग्री और उच्च वेतन वाले उम्मीदवारों के लिए चयन दर 60% से 75% तक पहुंच गई। कई इमिग्रेशन फर्मों ने भी इस साल अपने क्लाइंट्स के लिए बेहतर रिजल्ट दर्ज किए हैं।
दूसरी ओर, फ्रेशर्स और एंट्री-लेवल उम्मीदवारों के लिए प्रतिस्पर्धा अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। टेक सेक्टर में एआई और सीनियर रोल्स पर बढ़ते फोकस ने भी इस ट्रेंड को प्रभावित किया है।










