हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद को लेकर कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने उत्तराखंड की घटना पर सवाल उठाए हैं। विधान सौधा पुलिस द्वारा उत्तराखंड बीजेपी के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद खरगे ने प्रतिक्रिया दी।
Haldwani Shuddhikaran Controversy: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने उत्तराखंड सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कथित घटना को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि राज्य सरकार को मामले में खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया, जब बेंगलुरु पुलिस ने हल्द्वानी में हुई कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर उत्तराखंड भाजपा के कुछ नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की। प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी व्यक्ति की शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन उनका सवाल है कि उत्तराखंड सरकार ने इस मामले में स्वयं कार्रवाई क्यों नहीं की।
हल्द्वानी विवाद पर प्रियांक खरगे का सरकार पर हमला
प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार को घटना का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन से भी इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही। खरगे के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री को भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा के प्रभाव के कारण ऐसे मामलों में कार्रवाई करने से सरकार पीछे हटती है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और भाजपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया को इस खबर के संदर्भ में शामिल नहीं किया गया है।
BJP नेताओं के खिलाफ बेंगलुरु में Zero FIR
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बेंगलुरु पुलिस ने 31 अगस्त को मिली शिकायत के आधार पर उत्तराखंड भाजपा नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 10 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक अनुष्ठान किया गया था, जिसका कथित उद्देश्य मल्लिकार्जुन खरगे के अनुसूचित जाति समुदाय से होने के कारण कार्यक्रम स्थल को ‘अपवित्र’ मानना था।
मामले में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, एससी/एसटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। जीरो एफआईआर को आगे की जांच के लिए हल्द्वानी पुलिस को भेजा जाना है। इस घटना ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। कांग्रेस इसे सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ रही है, जबकि मामले की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
'डमी सीएम' बयान पर भी प्रियांक खरगे का पलटवार
कर्नाटक की राजनीति से जुड़े एक अन्य विवाद में भी प्रियांक खरगे ने भाजपा पर निशाना साधा। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक द्वारा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को कथित तौर पर ‘डमी सीएम’ कहे जाने पर खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि डीके शिवकुमार ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं। खरगे ने भाजपा को ही ‘असली डमी’ बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी आरएसएस के नियंत्रण में काम करती है। उन्होंने भाजपा की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।
प्रियांक खरगे ने दावा किया कि अगर भाजपा को आरएसएस के प्रभाव से अलग कर दिया जाए, तो पार्टी की राजनीतिक ताकत काफी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक फैसलों में आरएसएस की विचारधारा और दिशा-निर्देशों पर निर्भर रहती है। खरगे ने भाजपा नेताओं से यह भी सवाल करने की चुनौती दी कि वे सार्वजनिक रूप से बताएं कि हल्द्वानी में कथित तौर पर हुआ ‘शुद्धिकरण’ सही था या गलत।
प्रियांक खरगे ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) और शिक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दों को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया। उन्होंने भाजपा से इन विषयों पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।







