हल्द्वानी में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पांच दूध के नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें फैट और एसएनएफ की मात्रा कम मिली। हालांकि स्टार्च, यूरिया और अन्य रासायनिक मिलावट की जांच निगेटिव रही।
हल्द्वानी: खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र से लिए गए दूध के पांच नमूने तय मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। जांच में कुछ नमूनों में मिल्क फैट और वसा रहित ठोस पदार्थ यानी SNF की मात्रा निर्धारित स्तर से कम मिली। हालांकि रासायनिक मिलावट की जांच में सभी नमूने निगेटिव पाए गए हैं।
5 अगस्त को अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूटर्स से लिए गए थे सैंपल
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बीते पांच अगस्त को हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूटर्स से दूध के नमूने लिए थे। सहायक आयुक्त एएस रावत और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभय कुमार सिंह के नेतृत्व में लिए गए इन नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया था।
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प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में दूध के पांच नमूने गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। विभाग की जांच में अलग-अलग नमूनों में मिल्क फैट और वसा रहित ठोस पदार्थ यानी SNF की मात्रा कम पाई गई।
इन दूध के नमूनों में कम मिला फैट
जांच में परम स्टैंडर्ड मिल्क, मधुसूदन काऊ मिल्क, हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क, गाय व भैंस के खुले मिक्स दूध और मदर डेयरी काऊ मिल्क में फैट की मात्रा निर्धारित मानकों से कम मिली।
इसके अलावा मधुसूदन काऊ मिल्क, हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क और गाय व भैंस के खुले मिक्स दूध में SNF भी मानक से कम पाया गया। SNF यानी वसा रहित ठोस पदार्थ में दूध के ऐसे पोषक तत्व शामिल होते हैं, जिनमें प्रोटीन और कैल्शियम प्रमुख हैं।
हालांकि जांच में एक महत्वपूर्ण राहत भी सामने आई है। सभी नमूनों में स्टार्च, यूरिया, नमक, न्यूट्रलाइजर, शुगर और कृत्रिम सिंथेटिक रंग जैसी रासायनिक मिलावट की जांच निगेटिव पाई गई। यानी इन नमूनों में जांच के दौरान इन रासायनिक पदार्थों की मिलावट नहीं मिली।
खाद्य कारोबारियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू
दूध के नमूनों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत विधिक कार्रवाई की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच का उद्देश्य बाजार में बिक रहे दूध की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की निगरानी करना है। नमूनों में फैट और SNF की कमी पाए जाने के बाद संबंधित कारोबारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
फैट और SNF कम होने का असर
दूध में फैट की मात्रा कम होने से शरीर को दूध से मिलने वाली आवश्यक कैलोरी और फैट-सोल्यूबल विटामिन जैसे विटामिन ए, डी, ई और के की मात्रा प्रभावित हो सकती है। इसी तरह SNF की मात्रा कम होने का मतलब दूध में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा कम होना है।
ऐसे पोषक तत्व बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ बुजुर्गों की हड्डियों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए दूध की गुणवत्ता और उसमें निर्धारित मात्रा में फैट तथा SNF की मौजूदगी उपभोक्ताओं के लिए अहम है।











