केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अपनी मां चन्नम्मा के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और चन्नम्मा का 72 वर्षों का वैवाहिक साथ नई पीढ़ी के लिए प्रेम, समर्पण और साझेदारी की प्रेरणा है।
बेंगलुरु: केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के वरिष्ठ नेता एचडी कुमारस्वामी ने अपनी मां चन्नम्मा के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके माता-पिता, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और चन्नम्मा का जीवनभर का साथ आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। 85 वर्षीय चन्नम्मा का शनिवार को बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। उनके निधन के बाद राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया और परिवार के प्रति संवेदना जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कई केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने चन्नम्मा के निधन पर दुख व्यक्त किया।
72 साल के रिश्ते को बताया आदर्श
बेंगलुरु स्थित पद्मनाभनगर आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनके माता-पिता का वैवाहिक जीवन केवल एक पारिवारिक रिश्ता नहीं था, बल्कि यह समर्पण, विश्वास और साझेदारी का उदाहरण था। उन्होंने कहा कि एचडी देवगौड़ा और चन्नम्मा की शादी 25 मई 1954 को हुई थी और करीब 72 वर्षों तक दोनों ने जीवन का सफर साथ तय किया। चन्नम्मा के निधन के साथ यह लंबा साथ समाप्त हुआ। कुमारस्वामी ने कहा कि आज के दौर में जब रिश्तों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं, ऐसे समय में उनके माता-पिता का जीवन युवाओं के लिए सीख देने वाला है।
मां के स्नेह और संस्कारों को किया याद
कुमारस्वामी ने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि चन्नम्मा का उनके प्रति विशेष स्नेह था, लेकिन उन्होंने सभी बच्चों को समान प्यार और सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा मार्गदर्शन दिया। राजनीतिक जीवन में भी कई बार उन्होंने सही रास्ता चुनने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए सलाह दी। कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी मां के विचार, संस्कार और गरीबों के प्रति संवेदनशीलता ने उनके जीवन को काफी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि मां द्वारा दी गई सीख और उनके शब्दों को वह कभी नहीं भूल पाएंगे।
राजनीति से दूर रहकर निभाई बड़ी भूमिका
एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि जब एचडी देवगौड़ा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, तब भी चन्नम्मा ने हमेशा खुद को सार्वजनिक जीवन की चमक-दमक से दूर रखा। उन्होंने कहा कि चन्नम्मा ने कभी प्रचार या प्रसिद्धि की इच्छा नहीं रखी। वह परिवार के साथ रहकर शांत तरीके से देवगौड़ा का समर्थन करती रहीं और उनके राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन एक ऐसे साथी के रूप में रहा, जिसने हर परिस्थिति में परिवार और जीवनसाथी का साथ निभाया।
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अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारी
कुमारस्वामी ने बताया कि चन्नम्मा के पार्थिव शरीर को रविवार को बेंगलुरु के पद्मनाभनगर स्थित आवास पर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद पार्थिव शरीर को नेलमंगला और होलेनरसीपुरा होते हुए हासन ले जाया जाएगा। वहां भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। अंतिम संस्कार सोमवार सुबह 11 बजे रंगनाथस्वामी मंदिर के पास किया जाएगा। परिवार ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम श्रद्धांजलि देने की अपील की है।
अलग-अलग दलों के नेताओं ने जताया दुख
चन्नम्मा के निधन के बाद राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर कई नेताओं ने देवगौड़ा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जो राजनीतिक रूप से देवगौड़ा परिवार के विरोधी माने जाते हैं, भी उनके आवास पहुंचे और अपनी संवेदना व्यक्त की। नेताओं ने चन्नम्मा के सरल स्वभाव, आतिथ्य और सभी के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार को याद किया। कई राजनीतिक हस्तियों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक सभी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
देवगौड़ा और चन्नम्मा का भावुक रिश्ता
एचडी देवगौड़ा और चन्नम्मा का रिश्ता कर्नाटक में लंबे समय से चर्चा में रहा है। दोनों ने राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच एक-दूसरे का साथ निभाया। चन्नम्मा की तबीयत बिगड़ने के दौरान देवगौड़ा काफी भावुक हो गए थे। उनके निधन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अपनी पत्नी के पार्थिव शरीर के पास भावुक नजर आए। यह दृश्य उनके बीच गहरे भावनात्मक संबंध और जीवनभर की साझेदारी को दर्शाता है।
सामाजिक और राजनीतिक विरासत
चन्नम्मा भले ही सक्रिय राजनीति में नहीं रहीं, लेकिन देवगौड़ा परिवार और कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने परिवार को मजबूती दी और लंबे राजनीतिक सफर में अपने पति का समर्थन किया। कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी मां का जीवन सेवा, सरलता और पारिवारिक मूल्यों का उदाहरण था। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन से प्रेरणा ले सकती हैं।
एक युग का अंत
एचडी देवगौड़ा और चन्नम्मा की कहानी केवल एक राजनीतिक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक निभाए गए विश्वास और रिश्तों की मिसाल भी है। चन्नम्मा के निधन के बाद कर्नाटक सहित देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। उनका शांत स्वभाव, परिवार के प्रति समर्पण और जीवनसाथी के साथ सात दशक से अधिक का सफर उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेगा।










