Hexagon Nutrition के शेयर NSE और BSE पर मामूली प्रीमियम के साथ लिस्ट हुए। शुरुआती कारोबार में शेयर अपर सर्किट तक पहुंचा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के मजबूत फंडामेंटल और कम कर्ज को देखते हुए निवेशक लंबी अवधि के लिए शेयर होल्ड कर सकते हैं।
New Delhi: न्यूट्रिशन और हेल्थकेयर उत्पाद बनाने वाली Hexagon Nutrition के शेयरों ने शेयर बाजार में अपेक्षाकृत शांत शुरुआत की है। हालांकि लिस्टिंग के बाद शेयर में खरीदारी देखने को मिली और यह अपर सर्किट तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबार की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों को जल्दबाजी में मुनाफावसूली करने के बजाय लंबी अवधि का नजरिया अपनाना चाहिए।
प्रीमियम के साथ हुई शेयरों की एंट्री

Hexagon Nutrition के शेयरों ने भारतीय शेयर बाजार में प्रीमियम के साथ शुरुआत की। कंपनी के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 48.25 रुपये के भाव पर सूचीबद्ध हुए, जो इसके इश्यू प्राइस से करीब 7 प्रतिशत अधिक था। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर 48 रुपये के स्तर पर लिस्ट हुआ। लिस्टिंग के बाद निवेशकों की रुचि बनी रही और शुरुआती कारोबार के दौरान शेयर 5 प्रतिशत के अपर सर्किट के साथ 50.66 रुपये तक पहुंच गया।
आईपीओ को मिला था मजबूत रिस्पॉन्स
कंपनी का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। 5 जून से 9 जून के बीच खुले इस सार्वजनिक निर्गम को कुल 53.68 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। मजबूत सब्सक्रिप्शन से बाजार में अच्छी लिस्टिंग की उम्मीद थी, हालांकि शेयर ने सीमित प्रीमियम के साथ शुरुआत की। इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कंपनी के दीर्घकालिक कारोबार मॉडल और विकास संभावनाओं पर बना हुआ दिखाई दिया।
एक्सपर्ट ने क्या दी सलाह?
लिस्टिंग के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि निवेशकों को शेयर बेच देना चाहिए या होल्ड करना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के फंडामेंटल मजबूत दिखाई देते हैं। विश्लेषकों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने मुनाफे और परिचालन प्रदर्शन में लगातार सुधार किया है। कम कर्ज और बढ़ती आय कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाती है। ऐसे में जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर आवंटित हुए हैं, वे लंबी अवधि के लिए इसमें बने रहने पर विचार कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशक जोखिम प्रबंधन के लिए स्टॉप लॉस का उपयोग कर सकते हैं, ताकि बाजार में किसी अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव की स्थिति में नुकसान सीमित रखा जा सके।
क्या करती है कंपनी?
Hexagon Nutrition की स्थापना वर्ष 1993 में हुई थी। शुरुआत में कंपनी माइक्रोन्यूट्रिएंट फॉर्मूलेशन के क्षेत्र में कार्य करती थी, लेकिन समय के साथ इसने हेल्थ और न्यूट्रिशन उत्पादों के बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई। कंपनी का कारोबार स्वास्थ्य, वेलनेस और क्लिनिकल न्यूट्रिशन से जुड़े उत्पादों पर केंद्रित है। इसके पोर्टफोलियो में विभिन्न आयु वर्ग और स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए उत्पाद शामिल हैं।
न्यूट्रिशन सेक्टर में बढ़ती संभावनाएं
भारत में हेल्थ और न्यूट्रिशन सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता, पोषण संबंधी उत्पादों की मांग और जीवनशैली में बदलाव के कारण इस उद्योग की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। ऐसे माहौल में Hexagon Nutrition जैसी कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिल सकता है। यही वजह है कि कई विश्लेषक कंपनी के दीर्घकालिक विकास को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं।
निवेशकों को क्या रखना चाहिए ध्यान?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लिस्टिंग गेन को देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की कमाई, विस्तार योजनाओं, प्रतिस्पर्धा और सेक्टर की संभावनाओं पर भी नजर रखनी चाहिए। फिलहाल कंपनी का प्रदर्शन और वित्तीय संकेतक सकारात्मक माने जा रहे हैं। इसलिए लंबी अवधि के निवेशक कंपनी की प्रगति पर नजर रखते हुए अपने निवेश को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों का आकलन करना जरूरी है।












