हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन फिलहाल व्यापक या लगातार तेज बारिश की संभावना कम है। इसके साथ ही तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कई हिस्सों में अधिकतम तापमान करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अनुमान है।
मैदानी और निचले इलाकों में तापमान बढ़ने के साथ उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। बारिश कम होने और धूप निकलने की स्थिति में वातावरण में नमी बनी रहने से गर्मी ज्यादा महसूस होगी। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना रह सकता है, हालांकि कुछ स्थानों पर बादल छाने और हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।
मौसम विभाग के विस्तारित पूर्वानुमान में हिमाचल प्रदेश में सितंबर के शुरुआती दिनों में बारिश की गतिविधियां रहने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद बारिश की तीव्रता में कमी आने के संकेत हैं। हालांकि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं होगा और बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बादल छाने से तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। वहीं निचले और मैदानी इलाकों में बारिश के कमजोर पड़ने का असर तापमान पर ज्यादा दिखाई दे सकता है। इससे दिन के समय गर्मी और उमस बढ़ने की संभावना है।
शिमला और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बादल छाने के साथ कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है। बारिश के बीच तापमान सामान्य या उसके आसपास बना रह सकता है, लेकिन बारिश की गतिविधियां कमजोर होने पर दिन का तापमान धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल में मानसून के दौरान बारिश का वितरण हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं रहा है। कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी भी रही। अगस्त के अंत तक राज्य में कुल बारिश सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बताई गई थी।
आने वाले दिनों में बारिश कमजोर पड़ने से नदियों और बरसाती खड्डों के जलस्तर में भी धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। हालांकि जिन क्षेत्रों में पहले से मिट्टी saturated है, वहां बारिश के छोटे दौर के बाद भी भूस्खलन या सड़क पर मलबा आने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश कम होने के बावजूद वाहन चालकों और पर्यटकों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी। बारिश के बाद सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं। कई ऊंचाई वाले इलाकों में बादल और धुंध के कारण दृश्यता भी प्रभावित हो सकती है। मौसम विभाग ने पहले भी बारिश के दौरान नदियों और नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है।
मैदानी इलाकों के लोगों के लिए अगले कुछ दिन उमस भरे हो सकते हैं। बारिश से मिलने वाली राहत कम होने और तापमान बढ़ने के कारण दिन के समय गर्मी का एहसास ज्यादा होगा। खासकर दोपहर के समय धूप निकलने पर नमी के कारण मौसम सामान्य तापमान से ज्यादा गर्म महसूस हो सकता है।
किसानों के लिए भी मौसम में बदलाव महत्वपूर्ण है। बारिश की मात्रा कम होने से खेतों में अत्यधिक नमी की समस्या कुछ कम हो सकती है। हालांकि जिन फसलों को पर्याप्त बारिश की जरूरत है, वहां स्थानीय स्तर पर मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी पर भी मौसम के बदलाव का असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के विस्तारित पूर्वानुमान में सितंबर के दूसरे सप्ताह के दौरान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में फिर से हल्की से मध्यम बारिश के दौर की संभावना बताई गई है। यानी अगले कुछ दिनों में मानसून कमजोर रहने के बावजूद पूरे प्रदेश में बारिश का सिलसिला पूरी तरह समाप्त होने की संभावना नहीं है। कुछ दिनों में स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश बढ़ भी सकती है।
इस समय सबसे बड़ा बदलाव तापमान में देखने को मिलेगा। बारिश की गतिविधि कमजोर पड़ने के साथ निचले क्षेत्रों में पारा ऊपर जाएगा। अधिकतम तापमान में करीब 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने पर मैदानी इलाकों में उमस और गर्मी का असर बढ़ सकता है। इसके उलट ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान अभी भी अपेक्षाकृत आरामदायक बना रहेगा।
प्रदेश में मानसून के कमजोर होने का मतलब यह नहीं है कि अचानक तेज बारिश की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कम समय में तेज बारिश भी हो सकती है। इसलिए पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम विभाग के ताजा अलर्ट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
पिछले दिनों राज्य में कई स्थानों पर बारिश के कारण सड़क, बिजली और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई थी। मानसून कमजोर पड़ने से ऐसी घटनाओं की आवृत्ति में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
शिमला, मनाली, धर्मशाला, चंबा, कुल्लू और दूसरे पर्यटन क्षेत्रों में जाने वाले लोगों के लिए भी अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से अपेक्षाकृत राहत वाले हो सकते हैं। हालांकि पहाड़ी मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी रहेगा।
कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश में मानसून अब कमजोर चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। अगले करीब छह दिनों में अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि तेज बारिश की गतिविधि सीमित रह सकती है। बारिश कम होने के साथ तापमान में करीब 3°C तक बढ़ोतरी संभव है। निचले और मैदानी इलाकों में बढ़ता तापमान तथा हवा में नमी उमस बढ़ाएगी, जबकि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना रहने की उम्मीद है।










