हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन को लेकर एक आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी करेंगे।
Himachal Pradesh New Districts: हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने और मौजूदा प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य सरकार ने जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए एक आयोग का गठन किया है। यह आयोग नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों के विलय और सीमाओं में बदलाव की जरूरतों का आकलन करेगा। आयोग को अधिसूचना जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
इस कदम का उद्देश्य राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान करने के विकल्प तलाशना है। हालांकि, फिलहाल नए जिलों की संख्या, उनके नाम या संभावित स्थानों को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इन मुद्दों पर आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे आयोग की अध्यक्षता
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी करेंगे। आयोग में अधिवक्ता विशाल पंवार और भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के भू-अभिलेख विभाग के निदेशक सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
आयोग को प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलावों पर विचार करने का दायित्व दिया गया है। इसमें केवल नए जिले बनाने की संभावना ही नहीं, बल्कि उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी।
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जनसंख्या से लेकर भौगोलिक परिस्थितियों तक का होगा अध्ययन
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्रों में दूर-दराज के गांवों से जिला मुख्यालय या अन्य सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में लोगों को कई बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना अहम हो सकता है।
आयोग जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, आम नागरिकों की सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय प्रभाव जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इन मानकों के आधार पर यह देखा जाएगा कि कहां नई प्रशासनिक इकाइयों की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। नई इकाइयों के गठन से सरकारी सेवाओं को लोगों के करीब लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ नए कार्यालयों, कर्मचारियों, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक खर्च का आकलन भी जरूरी होगा। आयोग की सिफारिशों में इन पहलुओं का महत्व रहने की संभावना है।
छह महीने में सरकार को सौंपनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने आयोग को अधिसूचना की तारीख से छह महीने का कार्यकाल दिया है। इस अवधि के भीतर उसे अपने अध्ययन के आधार पर स्पष्ट सिफारिशों के साथ अंतिम रिपोर्ट पेश करनी होगी। आयोग का मुख्यालय शिमला में निर्धारित किया गया है। कामकाज के लिए राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आयोग को आवश्यक रिकॉर्ड, जनसांख्यिकीय आंकड़े और सचिवीय सहायता उपलब्ध कराएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग कार्यालय, स्टाफ, वाहन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में सहयोग करेगा। इससे आयोग को अलग-अलग क्षेत्रों की प्रशासनिक जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने में सहायता मिलेगी। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को उनके समकक्ष रैंक के अधिकारियों के अनुरूप यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता (TA/DA), सरकारी वाहन तथा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय की सुविधा दी जाएगी। आयोग के कामकाज के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं संबंधित विभागों के सहयोग से की जाएंगी।









