हजारीबाग में दर्दनाक हादसा: सेफ्टी टैंक में जहरीली गैस से मां-बेटे समेत तीन की मौत

झारखंड के हजारीबाग जिले के महुआ शराब से भरे सेफ्टी टैंक में जहरीली गैस फैलने से मां-बेटे और चाचा की मौत हो गई। बचाने गए लोग भी गैस की चपेट में आ गए ।

झारखंड के हजारीबाग में महुआ शराब से भरे सेफ्टी टैंक में जहरीली गैस फैलने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मां को बचाने उतरे बेटा और चाचा भी गैस की चपेट में आ गए, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर घायल है।

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। कटकमदाग थाना क्षेत्र के कुद इलाके में एक सेफ्टी टैंक के भीतर जहरीली गैस फैलने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

मृतकों में चमेली देवी, उनका बेटा रवि साव और परिवार के चाचा मदन साव शामिल हैं। वहीं आनंद साव को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सेफ्टी टैंक का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध महुआ शराब बनाने और स्टोर करने के लिए किया जा रहा था।

कैसे हुआ हादसा?

स्थानीय पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब चमेली देवी टैंक के भीतर रखी महुआ शराब निकालने के लिए नीचे उतरीं। टैंक लंबे समय से बंद था, जिसके कारण उसके अंदर जहरीली गैस जमा हो चुकी थी।

जैसे ही वह नीचे पहुंचीं, जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गईं। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिवार के लोगों को चिंता हुई।

उनकी मदद के लिए सबसे पहले बेटा रवि साव टैंक में उतरा, लेकिन वह भी गैस की वजह से बेहोश होकर गिर पड़ा। इसके बाद चाचा मदन साव दोनों को बचाने के लिए नीचे गए, लेकिन वे भी जहरीली गैस का शिकार हो गए।

बचाने की कोशिश में घायल हुआ परिवार का सदस्य

परिवार के सदस्य आनंद साव ने भी अपने परिजनों को बचाने का प्रयास किया। हालांकि वे भी गैस की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से बीमार हो गए।

उन्हें तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल उनका इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

अवैध महुआ शराब निर्माण की आशंका

प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि सेफ्टी टैंक का इस्तेमाल अवैध रूप से महुआ शराब बनाने और स्टोर करने के लिए किया जा रहा था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बंद टैंक या गड्ढों में शराब या अन्य जैविक पदार्थों के किण्वन (फर्मेंटेशन) के दौरान मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें बन सकती हैं। पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने पर यह गैसें जानलेवा साबित हो सकती हैं।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि टैंक में कितने समय से महुआ शराब रखी जा रही थी और क्या इलाके में अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय था।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। कटकमदाग थाना प्रभारी ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि होगी।

हजारीबाग में दर्दनाक हादसा: सेफ्टी टैंक में जहरीली गैस से मां-बेटे समेत तीन की मौत

घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक परिवार आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा था। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से घर में मातम पसरा हुआ है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जहरीली गैस वाले टैंकों में बढ़ रहे हादसे

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के कई हिस्सों में सेफ्टी टैंक, सीवर और बंद गड्ढों में जहरीली गैस से मौत के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

ऐसे स्थानों में ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों की मौजूदगी कुछ ही सेकंड में इंसान को बेहोश कर सकती है। कई बार लोग बिना सुरक्षा उपकरणों के दूसरों को बचाने के लिए नीचे उतर जाते हैं, जिससे मौतों की संख्या बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बंद टैंक, सेप्टिक टैंक या भूमिगत संरचना में उतरने से पहले गैस जांच और पर्याप्त वेंटिलेशन जरूरी है।

इसके अलावा बचाव कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरण, ऑक्सीजन सपोर्ट और प्रशिक्षित टीम की जरूरत होती है। बिना सुरक्षा उपायों के अंदर जाना बेहद खतरनाक हो सकता है।

अवैध शराब कारोबार पर उठे सवाल

इस घटना के बाद इलाके में अवैध महुआ शराब निर्माण और उसके नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ग्रामीण इलाकों में गुप्त रूप से महुआ शराब बनाई जाती है, जहां सुरक्षा मानकों का बिल्कुल पालन नहीं होता। ऐसे स्थानों पर जहरीली गैस, आग और विस्फोट जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अवैध शराब निर्माण पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वार्ड प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय रहते अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

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