सब्जियों के लिए बनाया सोलर कोल्ड स्टोरेज, जीता पहला पुरस्कार; IIIT भागलपुर की 45 टीमें राष्ट्रीय हैकाथॉन के लिए चयनित

IIIT भागलपुर के स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन में सोलर मिनी कोल्ड स्टोरेज मॉडल ने पहला स्थान हासिल किया। 45 टीमें राष्ट्रीय स्तर के लिए शॉर्टलिस्ट हुईं।
सब्जियों के लिए बनाया सोलर कोल्ड स्टोरेज, जीता पहला पुरस्कार; IIIT भागलपुर की 45 टीमें राष्ट्रीय हैकाथॉन के लिए चयनित
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भागलपुर के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIIT भागलपुर के विद्यार्थियों ने तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में आयोजित इंटरनल स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन यानी SIH-2026 में विद्यार्थियों ने ऐसी तकनीकी परियोजनाएं पेश कीं, जिनका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं से था। इस प्रतियोगिता में सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया सोलर-पावर्ड स्मार्ट मिनी कोल्ड स्टोरेज मॉडल सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हुआ और इस मॉडल को पहला स्थान मिला। खास बात यह रही कि प्रतियोगिता में शामिल कुल 55 टीमों में से 45 टीमों को राष्ट्रीय स्तर के अगले दौर के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।

IIIT भागलपुर में 5 सितंबर को इंटरनल स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन का आयोजन किया गया था। संस्थान के टेक्निकल बोर्ड के इंचार्ज डॉ. ओम प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों क्षेत्रों में अपने प्रोजेक्ट और प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता को परखना नहीं था, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित करना भी था। यही वजह रही कि अलग-अलग टीमों ने कृषि, पर्यावरण, प्राकृतिक आपदा और ग्रामीण स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को अपने प्रोजेक्ट का आधार बनाया।

इस प्रतियोगिता में कुल 55 टीमों ने हिस्सा लिया। जजों ने अलग-अलग चरणों में टीमों के प्रोटोटाइप, तकनीकी समाधान, उपयोगिता, नवाचार और समस्या को हल करने की क्षमता का मूल्यांकन किया। कड़े मूल्यांकन के बाद 45 बेहतर टीमों को राष्ट्रीय स्तर के स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। यह उपलब्धि IIIT भागलपुर के विद्यार्थियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि संस्थान की इतनी बड़ी संख्या में टीमों का राष्ट्रीय स्तर के अगले दौर में पहुंचना विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता और नवाचार की दिशा में उनकी सक्रिय भागीदारी को दिखाता है।

प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल करने वाली टीम SCAB ने पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां सब्जियों के सुरक्षित भंडारण से जुड़ी समस्या को ध्यान में रखते हुए सोलर-पावर्ड स्मार्ट मिनी कोल्ड स्टोरेज सिस्टम तैयार किया। इसका मूल उद्देश्य ताजी सब्जियों को खराब होने से बचाना और उनके भंडारण की सुविधा को अधिक टिकाऊ बनाना है। बिजली की उपलब्धता और भंडारण की लागत जैसी चुनौतियों को देखते हुए सौर ऊर्जा आधारित मॉडल को एक उपयोगी विकल्प के तौर पर प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों का यह प्रयास तकनीक को सीधे कृषि और खाद्य संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज के लिए भंडारण की व्यवस्था किसानों के सामने बड़ी चुनौती रहती है। यदि फसल को सही समय पर बाजार नहीं मिलता या उसे सुरक्षित रखने की सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो किसान को कम कीमत पर उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। दूसरी ओर, अधिक समय तक बिना उचित तापमान और भंडारण व्यवस्था के रखे जाने पर सब्जियों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में छोटे स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले मिनी कोल्ड स्टोरेज मॉडल ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

सोलर पावर आधारित इस मॉडल की खासियत यह है कि इसे ऊर्जा की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। दूरदराज के इलाकों में जहां नियमित बिजली की उपलब्धता चुनौती हो सकती है, वहां सौर ऊर्जा आधारित तकनीक को उपयोगी विकल्प के तौर पर देखा जाता है। हालांकि इस प्रोटोटाइप के व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल से पहले इसकी क्षमता, लागत, रखरखाव, तापमान नियंत्रण और लंबे समय तक संचालन जैसे पहलुओं का विस्तृत परीक्षण जरूरी होगा। फिलहाल हैकाथॉन में इसे पहला स्थान मिलना इस विचार की तकनीकी उपयोगिता और विद्यार्थियों की नवाचार क्षमता को जरूर दर्शाता है।

इस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान टीम रोबोनेक्सस ने हासिल किया। इस टीम ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अर्ली वार्निंग और लैंडस्लाइड रिस्क मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया। भूस्खलन की घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, घर, परिवहन और जनजीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसे में अगर तकनीक के माध्यम से संभावित खतरे की पहले जानकारी मिल सके, तो लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और प्रशासन को समय रहते तैयारी करने में मदद मिल सकती है।

तीसरे स्थान पर टीम रिफ्लेक्सेस रही। इस टीम ने सुदूर ग्रामीण और बुनियादी सुविधाओं से वंचित इलाकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक वेबसाइट प्लेटफॉर्म तैयार किया। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कई बार दूरी, संसाधनों और जानकारी की कमी के कारण प्रभावित होती है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी और पहुंच आसान बनाने की कोशिश विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का हिस्सा रही।

हैकाथॉन में प्रस्तुत इन परियोजनाओं से यह भी स्पष्ट हुआ कि IIIT भागलपुर के विद्यार्थी केवल कोडिंग या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने कृषि, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को समझकर तकनीकी समाधान तैयार करने की कोशिश की। यही स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन की मूल भावना भी है, जिसमें विद्यार्थियों को देश के सामने मौजूद समस्याओं के लिए नए और व्यावहारिक समाधान खोजने का अवसर मिलता है।

टीम SCAB की उपलब्धि को कृषि क्षेत्र से जोड़कर देखें तो यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। किसान के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। फसल की कटाई के बाद उसका सुरक्षित भंडारण, परिवहन और सही समय पर बाजार तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। अगर भंडारण की सुविधा बेहतर हो तो किसान को तत्काल बिक्री के दबाव से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि किसी भी तकनीकी मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए लागत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उसकी उपयोगिता का आकलन करना जरूरी होगा।

भागलपुर जैसे शैक्षणिक केंद्र में इस तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से बाहर निकलकर वास्तविक समस्याओं पर काम करने का मौका देता है। पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी जिन तकनीकों, प्रोग्रामिंग भाषाओं, सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के बारे में सीखते हैं, उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल करने का अवसर हैकाथॉन के माध्यम से मिलता है। टीम में काम करने के दौरान विद्यार्थियों को समस्या की पहचान, समाधान की योजना, प्रोटोटाइप तैयार करने, उसकी कमियों को दूर करने और जजों के सामने उसे प्रस्तुत करने का अनुभव भी मिलता है।

प्रतियोगिता के समापन पर टेक्निकल बोर्ड के इंचार्ज डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने संस्थान के निदेशक प्रो. मधुसूदन सिंह के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए विशेष रूप से धन्यवाद दिया। इसके अलावा कुलसचिव डॉ. धीरज कुमार सिन्हा, डीन अकादमिक डॉ. हिमाद्री नायक, संकाय सदस्यों, तकनीकी निर्णायकों, सहयोगी कर्मचारियों और छात्र स्वयंसेवकों के योगदान को भी सराहा गया।

डॉ. ओम प्रकाश सिंह के मुताबिक, इंटरनल हैकाथॉन ने विद्यार्थियों को अपने मौलिक विचारों को प्रोटोटाइप में बदलने का मंच दिया। इससे उनमें नवाचार और टीम वर्क की भावना मजबूत हुई तथा देश की जमीनी समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान तलाशने का उत्साह भी बढ़ा। हैकाथॉन जैसे आयोजन विद्यार्थियों को यह समझने में मदद करते हैं कि तकनीक का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक उत्पाद बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और आम लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए भी किया जा सकता है।

राष्ट्रीय स्तर के अगले दौर के लिए 45 टीमों का चयन IIIT भागलपुर के लिए भी उल्लेखनीय उपलब्धि है। अब इन टीमों के सामने अपने प्रोजेक्ट को और बेहतर करने की चुनौती होगी। इंटरनल स्तर पर तैयार किए गए मॉडल को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए तकनीकी कमियों को दूर करना, प्रोटोटाइप को अधिक व्यावहारिक बनाना और उसकी उपयोगिता को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।

खास तौर पर टीम SCAB के सोलर मिनी कोल्ड स्टोरेज मॉडल से यह उम्मीद जुड़ती है कि विद्यार्थी आगे इसके डिजाइन, ऊर्जा दक्षता, भंडारण क्षमता और उपयोग की लागत जैसे पहलुओं पर और काम कर सकें। यदि इस तरह की तकनीक को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाता है तो भविष्य में यह छोटे किसानों, सब्जी उत्पादकों और ग्रामीण कारोबारियों के लिए उपयोगी समाधान बन सकती है। हालांकि फिलहाल इसे हैकाथॉन में तैयार और पुरस्कृत प्रोटोटाइप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि पहले से व्यावसायिक रूप से सिद्ध उत्पाद के रूप में।

IIIT भागलपुर की इस उपलब्धि से संस्थान के विद्यार्थियों में भी उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। 55 टीमों की भागीदारी और उनमें से 45 टीमों का राष्ट्रीय स्तर के अगले दौर के लिए चुना जाना बताता है कि संस्थान में तकनीकी नवाचार के लिए विद्यार्थियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं पर काम करने वाली इन टीमों के मॉडल भविष्य में और विकसित होते हैं तो इनके जरिए स्थानीय स्तर पर भी उपयोगी तकनीकी समाधान सामने आ सकते हैं।

फिलहाल स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के इंटरनल चरण में टीम SCAB का सोलर-पावर्ड स्मार्ट मिनी कोल्ड स्टोरेज मॉडल सबसे आगे रहा है। टीम रोबोनेक्सस ने प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी से जुड़े मॉडल के साथ दूसरा और टीम रिफ्लेक्सेस ने ग्रामीण स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं 45 टीमों का राष्ट्रीय स्तर के अगले दौर के लिए शॉर्टलिस्ट होना IIIT भागलपुर की इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।

भागलपुर के विद्यार्थियों की यह पहल यह संदेश भी देती है कि जब तकनीकी शिक्षा को वास्तविक सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से जोड़ा जाता है तो छात्रों के विचार केवल प्रोजेक्ट फाइल तक सीमित नहीं रहते। वे ऐसे प्रोटोटाइप का रूप ले सकते हैं, जिन्हें आगे विकसित करके बड़े स्तर पर उपयोग किया जा सकता है। सोलर कोल्ड स्टोरेज से लेकर आपदा की पूर्व चेतावनी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक, इस हैकाथॉन में विद्यार्थियों ने अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को तकनीक से जोड़ने की कोशिश की है। अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में इन टीमों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।

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