उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के उदितांश रघुवंशी आईआईटी गुवाहाटी में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ भाला फेंक में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। जेईई की तैयारी से शुरू हुआ उनका सफर अब एथलेटिक्स और खेल प्रबंधन तक पहुंच गया है।
आईआईटी गुवाहाटी: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले उदितांश रघुवंशी ने आईआईटी गुवाहाटी में बीटेक की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था, लेकिन यहां आने के बाद उनकी रुचि भाला फेंक यानी जैवलिन थ्रो में बढ़ने लगी। केमिकल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र उदितांश ने इंटर-आईआईटी खेल प्रतियोगिता में संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। अब वह आईआईटी गुवाहाटी के खेल बोर्ड में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
आजमगढ़ से कोटा और फिर आईआईटी गुवाहाटी तक का सफर
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले उदितांश रघुवंशी की जिंदगी में पढ़ाई हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उनके माता-पिता शिक्षक हैं, जबकि उनके दादा डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं। ऐसे पारिवारिक माहौल में शिक्षा और करियर को लेकर गंभीरता स्वाभाविक थी। उदितांश ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का लक्ष्य बनाया और दसवीं कक्षा के बाद संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) की तैयारी के लिए कोटा चले गए।
![]()
महज 16 साल की उम्र में घर से दूर रहकर पढ़ाई करना उनके लिए नया अनुभव था। कोटा में उन्होंने समय का सही इस्तेमाल करना, नियमित पढ़ाई करना और दबाव के बीच अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना सीखा।
वर्ष 2024 में जेईई देने वाले उदितांश की जेईई मेन में अखिल भारतीय रैंक 4716 और जेईई एडवांस्ड में रैंक 5013 रही। इसके बाद उन्होंने आईआईटी गुवाहाटी के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक की पढ़ाई शुरू की। हालांकि, संस्थान में उनका अनुभव इंजीनियरिंग की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा।
आईआईटी में भाला फेंक के खेल से हुआ खास जुड़ाव
उत्तर प्रदेश से असम पहुंचना उदितांश के लिए एक अलग अनुभव था। यहां का खानपान, संस्कृति और जीवनशैली उनके लिए नई थी। धीरे-धीरे उन्होंने नए माहौल में खुद को ढाला और परिसर की विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया।
उदितांश ने अलचेरिंगा, ई-सेल और कंसल्टिंग एंड एनालिटिक्स क्लब जैसी गतिविधियों में भाग लिया। इसी दौरान उन्होंने एथलेटिक्स में भी रुचि लेना शुरू किया। स्कूल के दिनों में वह प्रतिस्पर्धी स्तर के खिलाड़ी नहीं थे, लेकिन भाला फेंक के खेल ने उन्हें आकर्षित किया।
इस खेल में सही तकनीक, समय पर ताकत का इस्तेमाल और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। उदितांश को इसकी ट्रेनिंग पसंद आने लगी। उन्होंने एथलेटिक्स के साथ शारीरिक ताकत बढ़ाने वाले अभ्यास और भारोत्तोलन पर भी ध्यान देना शुरू किया। धीरे-धीरे खेल उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया।
उनके लिए खेल केवल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का माध्यम नहीं रहा। ट्रेनिंग से उन्हें पढ़ाई के दबाव से राहत मिलती थी और वह पहले से ज्यादा एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई कर पाते थे।
इंटर-आईआईटी प्रतियोगिता में किया संस्थान का प्रतिनिधित्व
उदितांश ने एथलेटिक्स के जरिए इंटर-आईआईटी खेल प्रतियोगिता में आईआईटी गुवाहाटी का प्रतिनिधित्व किया। उनके लिए यह अनुभव खास था, क्योंकि इस स्तर पर खिलाड़ी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने संस्थान के लिए भी प्रतिस्पर्धा करते हैं।
हालांकि, वह पदक जीतकर नहीं लौटे, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें खेलों के दूसरे पहलुओं को समझने का अवसर दिया। उन्होंने महसूस किया कि किसी बड़े खेल आयोजन के पीछे खिलाड़ियों की तैयारी के अलावा योजना, समन्वय, व्यवस्थाओं और कई महत्वपूर्ण फैसलों की भूमिका होती है।
इसी दिलचस्पी ने उन्हें आईआईटी गुवाहाटी के खेल बोर्ड के कामकाज की ओर आकर्षित किया। धीरे-धीरे वह इस व्यवस्था से जुड़े और बाद में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी तक पहुंचे।
इस भूमिका में उनका नजरिया एक खिलाड़ी से आगे बढ़ा। अब उनके सामने केवल अपना प्रदर्शन बेहतर बनाने का सवाल नहीं था, बल्कि यह भी था कि संस्थान में खेलों को ज्यादा से ज्यादा छात्रों के लिए कैसे सुलभ बनाया जाए।
वह चाहते हैं कि खेलों का लाभ सिर्फ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि उन छात्रों को भी मिले जो फिट रहने, मनोरंजन या कोई नया खेल सीखने के लिए मैदान में उतरना चाहते हैं।
खेल ने सिखाया धैर्य और लगातार मेहनत का महत्व
उदितांश के अनुसार, खेल ने उन्हें धैर्य का महत्व समझाया। नियमित अभ्यास के बावजूद कई बार लंबे समय तक प्रदर्शन में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता। ऐसे समय में लगातार मेहनत करते रहना और अपनी तैयारी पर भरोसा बनाए रखना जरूरी होता है।
यह सीख उनके लिए खेल के मैदान तक सीमित नहीं रही। पढ़ाई और खेल बोर्ड की जिम्मेदारियों में भी उन्हें इसका फायदा मिला। उनका मानना है कि प्रगति हमेशा तुरंत नजर नहीं आती, लेकिन निरंतर प्रयास से समय के साथ सुधार संभव है।
आईआईटी गुवाहाटी में पढ़ाई के साथ उन्हें ब्रह्मपुत्र नदी, आसपास की पहाड़ियों और छात्रावास में दोस्तों के साथ बिताए गए समय का भी अनुभव मिला। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्रों के साथ उनकी दोस्ती ने कॉलेज जीवन को और खास बनाया।
फिलहाल उदितांश बीटेक के तीसरे वर्ष में हैं और उन्होंने भविष्य के करियर को लेकर कोई एक रास्ता तय नहीं किया है। आईआईटी में उनके अनुभव ने उन्हें नए अवसरों के लिए तैयार रहना सिखाया है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई, भाला फेंक और खेल प्रशासन से जुड़ी उनकी यात्रा बताती है कि कॉलेज जीवन में अपनी रुचि पहचानना और उसे आगे बढ़ाने का अवसर देना भी सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
IIT गुवाहाटी की आधिकारिक वेबसाइट –.iitg.ac.in









