IMF बैठक में रूस के खिलाफ यूरोपीय प्रतिनिधियों का वॉकआउट, यूक्रेन युद्ध पर बढ़ा तनाव

IMF की बैंकॉक बैठक में रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के भाषण के दौरान करीब एक दर्जन प्रतिनिधि बाहर चले गए। यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप और रूस के बीच तनाव

बैंकॉक में IMF की संचालन समिति की बैठक के दौरान रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के संबोधन पर करीब एक दर्जन प्रतिनिधि बाहर चले गए। डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और बाल्टिक देशों के प्रतिनिधियों के जाने की पुष्टि हुई।

बैंकॉक: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान रूस और यूरोपीय देशों के बीच जारी राजनीतिक तनाव एक बार फिर सामने आया है। शनिवार को IMF की संचालन समिति की बैठक में रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के संबोधन के दौरान करीब एक दर्जन प्रतिनिधि बैठक कक्ष से बाहर चले गए। इस घटनाक्रम से स्पष्ट हुआ कि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में रूस की भागीदारी को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं।

बैठक से जुड़े तीन अधिकारियों के अनुसार, रूसी वित्त मंत्री ने जब रूसी भाषा में अपना संबोधन शुरू किया, तो कई देशों के प्रतिनिधियों ने बैठक से बाहर जाने का फैसला किया। इनमें यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। एक अधिकारी ने बताया कि करीब एक दर्जन प्रतिनिधि कक्ष से बाहर निकले। डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड, नॉर्वे, लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया के प्रतिनिधियों के इस कदम में शामिल होने की जानकारी सामने आई।

यूक्रेन युद्ध बना रूस और यूरोप के बीच टकराव की बड़ी वजह

यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस और यूरोपीय देशों के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं। फरवरी 2022 में रूस के सैन्य हमले के बाद यूरोपीय देशों ने मॉस्को के खिलाफ कई तरह के प्रतिबंध लगाए और यूक्रेन को आर्थिक, सैन्य तथा कूटनीतिक समर्थन दिया। इस संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थानों के कामकाज पर भी पड़ा है।

IMF की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक एवं वित्तीय समिति में भी इस युद्ध के कारण मतभेद गहरे हुए हैं। समिति वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती है। रूस के खिलाफ यूरोपीय देशों के रुख और रूस की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को लेकर असहमति के चलते समिति पिछले वर्षों में सर्वसम्मति वाले बयान जारी करने में कठिनाइयों का सामना करती रही है।

बैंकॉक में इस सप्ताह आयोजित IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में भी यही विभाजन देखने को मिला। अमेरिका और यूक्रेन के बीच बढ़ते मतभेदों ने स्थिति को और जटिल बनाया है। ऐसे माहौल में रूसी वित्त मंत्री के संबोधन के दौरान प्रतिनिधियों का बाहर जाना महज औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि रूस के साथ संबंध सामान्य करने के प्रयासों पर यूरोपीय असहमति का संकेत माना जा रहा है।

यूरोपीय राजनयिक ने कहा- रूस से संबंध सामान्य नहीं कर सकते

बैठक में मौजूद एक यूरोपीय राजनयिक ने रूस के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध यूरोप के लिए अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है और ऐसे हालात में रूस के साथ संबंधों को सामान्य मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

यूरोपीय देशों की चिंता केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। उनके लिए यह संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय संप्रभुता और यूरोपीय व्यवस्था की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। इसी कारण रूस की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मौजूदगी और उसके साथ उच्चस्तरीय संवाद को लेकर यूरोप के भीतर लगातार बहस होती रही है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में किसी देश की मौजूदगी और उसके साथ राजनीतिक संबंध सामान्य करने के बीच अंतर है। कुछ देशों का मानना है कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत के रास्ते खुले रखना जरूरी है, जबकि दूसरे देश रूस की भागीदारी को लेकर अधिक सख्त रुख अपनाने के पक्ष में हैं।

G20 बैठक में रूसी वित्त मंत्री की मौजूदगी पर भी विवाद

IMF की बैठक से पहले रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव की G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों की बैठक में मौजूदगी को लेकर भी यूरोप में नाराजगी सामने आई थी। जर्मनी ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस की वापसी के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी थी।

सिलुआनोव की G20 बैठक में भागीदारी इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि इससे कुछ सप्ताह पहले अमेरिका ने उत्तरी कैरोलिना के एशविले में आयोजित बैठक में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति का समर्थन किया था। यह यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका में उनकी पहली व्यक्तिगत G20 भागीदारी बताई गई।

जर्मनी की आपत्ति से पता चलता है कि यूरोपीय देशों के कुछ हिस्सों में रूस को वैश्विक कूटनीतिक मंचों पर दोबारा सामान्य भूमिका देने को लेकर चिंता बनी हुई है। यूरोप के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि रूस के साथ आर्थिक और राजनीतिक संवाद किस सीमा तक किया जाना चाहिए, खासकर तब जब यूक्रेन में युद्ध जारी है।

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अमेरिका ने बातचीत जारी रखने का किया समर्थन

अमेरिकी प्रशासन का रुख यूरोप के कुछ देशों से अलग दिखाई दिया। अमेरिकी ट्रेजरी की अवर सचिव एरिन ब्राउन ने गुरुवार को कहा कि वॉशिंगटन G20 में रूस की मौजूदगी का समर्थन करता है। उनके अनुसार, किसी संकट को हल करने के लिए खुले संवाद और बातचीत की जरूरत होती है।

ब्राउन ने तर्क दिया कि यदि पक्ष एक-दूसरे से बात ही नहीं करेंगे, तो संघर्ष का समाधान निकालना मुश्किल होगा। अमेरिका के इस दृष्टिकोण का आधार यह है कि अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान संवाद के माध्यम खुले रहने चाहिए, भले ही संबंधित देशों के बीच गंभीर मतभेद क्यों न हों।

हालांकि, बातचीत के समर्थन का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका और रूस के बीच सभी मुद्दों पर सहमति है। यह रुख मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाता है। दूसरी ओर, यूरोपीय देशों की चिंता है कि रूस की भागीदारी को सामान्य रूप से स्वीकार करने से यूक्रेन युद्ध के प्रति अंतरराष्ट्रीय विरोध कमजोर पड़ सकता है।

यूक्रेन ने भी अमेरिकी रुख पर जताई नाराजगी

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ के एक शिखर सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस के साथ डीजल संबंधी व्यवस्था की आलोचना की। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों की ओर से शांति वार्ता में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की संभावना का स्वागत किया।

जेलेंस्की की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई दे रहा है। यूरोपीय नेता यूक्रेन की सुरक्षा और रूस के खिलाफ दबाव बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने रूस के साथ संवाद जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

इसी दौरान ट्रंप ने रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की आलोचना करते हुए उन्हें शर्मनाक बताया। उनकी टिप्पणी के बाद यूरोपीय नेताओं ने जेलेंस्की के प्रति समर्थन दोहराया। इससे यूक्रेन युद्ध के संबंध में पश्चिमी देशों के बीच रणनीतिक मतभेदों की चर्चा और तेज हो गई।

यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर यूरोप की चिंता

यूक्रेन के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ी हुई है। कीव को अमेरिकी खुफिया जानकारी और हथियारों की आपूर्ति में संभावित कमी की आशंका भी यूक्रेन की सुरक्षा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

यूरोपीय संघ के लिए ऐसे हालात में यूक्रेन का समर्थन बनाए रखना और रूस के साथ संबंधों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाना बड़ी चुनौती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सामने वैश्विक आर्थिक सहयोग को बनाए रखने का सवाल भी है।

बैंकॉक की बैठक में हुआ वॉकआउट इसी व्यापक टकराव की एक झलक है। एक ओर कुछ देश रूस के साथ संवाद को आवश्यक मानते हैं, तो दूसरी ओर यूरोपीय प्रतिनिधियों का एक वर्ग यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को के साथ सामान्य व्यवहार करने का विरोध कर रहा है।

फिलहाल, इस घटनाक्रम से रूस और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद कम होने के संकेत नहीं मिलते। IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थानों में वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर सहयोग बनाए रखना और साथ ही यूक्रेन युद्ध पर अलग-अलग राष्ट्रीय रुखों का सामना करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती बना हुआ है।

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