मध्यप्रदेश अग्निकांड में 8 लोगों की मौत के बाद पुलिस ने पुगलिया परिवार को जला हुआ मकान सौंप दिया। शुरुआती जांच में ई-कार चार्जिंग सॉकेट में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आई है। घर अब रहने लायक नहीं बचा।
इंदौर: मध्य प्रदेश के Indore के बंगाली चौराहा स्थित ब्रजेश्वरी एनेक्स में मार्च 2026 में हुए भीषण ईवी अग्निकांड के बाद पुलिस ने कारोबारी मनोज पुगलिया के परिवार को उनका जला हुआ मकान औपचारिक रूप से सौंप दिया है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह मकान अब रहने योग्य नहीं माना जा रहा। दीवारों में गहरी दरारें, पिलरों की कमजोर होती संरचना और छतों पर पड़े आग के निशान इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह हादसा केवल आगजनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भवन की बुनियाद को प्रभावित कर गया।
पुलिस की मौजूदगी में मकान का निरीक्षण कराने के बाद परिवार को संपत्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास, बीमा दावों, कानूनी प्रक्रिया और मानसिक आघात से उबरने की है। जिस घर में कभी परिवार की खुशियां बसी थीं, वही अब एक दर्दनाक हादसे की खामोश गवाही बन चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि कई घंटों तक पूरा इलाका दहशत में रहा। घटना के बाद आसपास के घरों में रहने वाले लोगों ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई। इस हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक सुविधाओं के साथ आने वाले जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
18 मार्च की रात: चार्जिंग के दौरान लगी आग ने ली 8 जानें
यह हादसा 18 मार्च 2026 की तड़के सुबह करीब 3:30 बजे हुआ। शुरुआती जांच के मुताबिक, घर में खड़ी इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। इसी दौरान चार्जिंग सॉकेट, वायरिंग या बैटरी सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण शॉर्ट-सर्किट हुआ और अचानक आग भड़क उठी।
आग सबसे पहले गैराज क्षेत्र में फैली, जहां कार खड़ी थी। इसके बाद लपटों ने आसपास रखे घरेलू सामान, फर्नीचर और बिजली फिटिंग को चपेट में ले लिया। आग के साथ उठे घने जहरीले धुएं ने पूरे घर को कुछ ही मिनटों में भर दिया।

घर में सो रहे परिवार के सदस्य हालात को समझ पाते, उससे पहले धुआं और आग तेजी से फैल चुकी थी। बंद घर में धुएं का दबाव बढ़ने से बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया। इस दर्दनाक हादसे में कारोबारी मनोज पुगलिया समेत परिवार के कुल 8 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई।
यह घटना पूरे इंदौर के लिए गहरा सदमा थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि देर रात अचानक धमाके जैसी आवाज आई, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दमकल और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं पारंपरिक वाहनों की तुलना में अलग प्रकृति की होती हैं। ईवी बैटरियों में थर्मल रनअवे की स्थिति बनने पर आग तेजी से फैल सकती है और उससे निकलने वाला धुआं अधिक जहरीला हो सकता है। यही वजह है कि ऐसे हादसों में बचाव का समय बेहद कम होता है।
जांच जारी, EV चार्जिंग सुरक्षा पर देशभर में बहस तेज
Kumar Prateek के अनुसार, अब तक की जांच में इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट-सर्किट को आग की सबसे संभावित वजह माना गया है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई थी। अब तक पुलिस 18 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। इनमें पड़ोसी, प्रत्यक्षदर्शी, बचाव अभियान में शामिल एनडीआरएफ कर्मी और स्थानीय तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं।
बिजली विभाग ने भी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी है। जली हुई कार के हिस्से, चार्जिंग यूनिट, वायरिंग सिस्टम और सॉकेट को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि घर में इस्तेमाल की जा रही चार्जिंग व्यवस्था मानक सुरक्षा नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
इस हादसे ने पूरे देश में घरेलू ईवी चार्जिंग सुरक्षा पर बहस तेज कर दी है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रिहायशी इलाकों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर अभी भी स्पष्ट जागरूकता और सख्त नियमों की कमी देखी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू ईवी चार्जिंग के लिए अलग लोड क्षमता वाला सर्किट, प्रमाणित चार्जर, अर्थिंग, फायर अलार्म, वेंटिलेशन और समय-समय पर वायरिंग जांच बेहद जरूरी है। कई लोग सुविधा के लिए सामान्य सॉकेट से वाहन चार्ज करते हैं, जो जोखिम को बढ़ा सकता है।
इंदौर का यह अग्निकांड आने वाले समय में शहरी बिल्डिंग नियमों, इलेक्ट्रिक सुरक्षा मानकों और ईवी चार्जिंग प्रोटोकॉल के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी बन सकता है। यह हादसा केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं, बल्कि तेजी से बदलती शहरी जीवनशैली के साथ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत की भी चेतावनी है। फिलहाल, पुगलिया परिवार न्याय, जवाब और इस दर्दनाक नुकसान से उबरने की कोशिश में है, जबकि पूरे देश की नजर FSL रिपोर्ट पर टिकी है।









