प्रॉपर्टी विवाद के बीच व्यवसायी के घर घुसने के आरोप में 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए। व्यवसायी ने सोना गायब होने और मारपीट के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में एक प्रॉपर्टी विवाद ने बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मामला खड़ा कर दिया है। एक व्यवसायी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद मध्य प्रदेश पुलिस के पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामला एक रिटायर्ड एसीपी से जुड़े कथित विवाद, घर में घुसने, उत्पीड़न और सोना गायब होने जैसे आरोपों से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद इंदौर के लसूडिया क्षेत्र से सामने आया है। व्यवसायी गौरव जैन ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने वारंट तामील करने के नाम पर उनके घर में अवैध तरीके से प्रवेश किया, सीसीटीवी कैमरे बंद किए और मास्टर चाबी से ताला खोलकर तलाशी ली।
व्यवसायी का कहना है कि इस दौरान उनके घर से लगभग 22 तोला सोना गायब हो गया।
1 अप्रैल की घटना: ‘चोरों की तरह घुसे
गौरव जैन के अनुसार, 1 अप्रैल को कुछ पुलिसकर्मी उनके घर के आसपास काफी देर तक गतिविधियां करते रहे। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर कैमरे बंद किए और ताला खोलकर घर में प्रवेश किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी “चोरों की तरह” घर में घुसे और बिना उचित प्रक्रिया अपनाए तलाशी ली। इसके बाद उन्हें अपने साथ ले जाया गया।
हिरासत और ग्वालियर ले जाने का आरोप
व्यवसायी ने बताया कि उन्हें 1 अप्रैल की रात से 2 अप्रैल तक लसूडिया थाने में रखा गया। इसके बाद उन्हें निजी कार से ग्वालियर ले जाया गया।
उनका आरोप है कि 3 अप्रैल को उन्हें किसी थाने में रखने के बजाय एक निजी गेस्ट हाउस में रखा गया, जहां रिटायर्ड एसीपी से जुड़े लोगों ने उनके साथ मारपीट की। बाद में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे इंदौर लौटे।
रिश्वत लेने का भी आरोप
गौरव जैन ने एक पुलिसकर्मी पर 27 हजार रुपए लेने का आरोप भी लगाया है। उनके मुताबिक:
- 10 हजार रुपए क्यूआर कोड के जरिए एक होटल में लिए गए
- 17 हजार रुपए एक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर करवाए गए
- इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
शिकायत के बाद कार्रवाई
व्यवसायी ने 16 अप्रैल को पुलिस आयुक्त संतोष सिंह और डीसीपी कुमार प्रतीक को शिकायत सौंपी, जिसमें ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी शामिल थे।
जांच के लिए मामला एसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपा गया। प्रारंभिक जांच में साक्ष्य मिलने के बाद पांच पुलिसकर्मियों—एसआई संजय विश्नोई सहित चार अन्य—को सस्पेंड कर दिया गया।
एफआईआर की मांग और आगे की चेतावनी
गौरव जैन का कहना है कि केवल सस्पेंशन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की है कि आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे मामले को उच्च स्तर तक ले जाएंगे और डीजीपी कार्यालय तथा राज्य सरकार से शिकायत करेंगे।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
व्यवसायी के अनुसार, यह विवाद 2020 में एक रिटायर्ड एसीपी से मुलाकात के बाद शुरू हुआ। 2023 में कथित तौर पर 20 लाख रुपए का लेनदेन हुआ, जिसे बाद में लौटा दिया गया।
इसके बाद अन्य व्यक्तियों के साथ करीब 65 लाख रुपए के लेनदेन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। आरोप है कि भुगतान से बचने के लिए चेक बाउंस कराए गए, जिसके चलते मामला कानूनी रूप ले बैठा।
कानूनी प्रक्रिया पर सवाल
इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, वारंट तामील करते समय पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।
कृष्ण कुमार कुन्हारे के मुताबिक, “पुलिस वारंट के आधार पर तलाशी ले सकती है, लेकिन परिवार के साथ अभद्रता या संपत्ति से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। हर कार्रवाई का रिकॉर्ड पंचनामा और रोजनामचे में दर्ज होना चाहिए।”










