पैरा एशियन गेम्स में भारत को 15वां गोल्ड, सुवर्णा राज ने डिस्कस थ्रो में जीता स्वर्ण

एशियन पैरा गेम्स 2026 में सुवर्णा राज ने डिस्कस थ्रो में गोल्ड और स्वाति चौधरी ने W1 तीरंदाजी में सिल्वर जीता। जानें भारत के पदकों और फाइनल के नतीजे।

जापान के आइची-नागोया में एशियन पैरा गेम्स 2026 के चौथे दिन भारत की सुवर्णा राज ने महिला F54 डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। स्वाति चौधरी ने W1 तीरंदाजी में रजत पदक हासिल किया।

नागोया: एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के चौथे दिन भारतीय एथलीट सुवर्णा राज ने महिला F54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश को बड़ी सफलता दिलाई। वहीं, तीरंदाज स्वाति चौधरी ने महिला W1 व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। सुवर्णा ने 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जबकि स्वाति को फाइनल में चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा।

22 अक्टूबर को मिली इन उपलब्धियों से भारत की पदक तालिका में स्थिति मजबूत हुई। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, भारत के कुल पदकों की संख्या 64 हो गई, जिसमें 15 स्वर्ण, 22 रजत और 27 कांस्य पदक शामिल थे। हालांकि, अलग-अलग समय पर जारी पदक तालिकाओं में भारत की रैंकिंग में अंतर दिखा है। 

सुवर्णा राज ने 15.66 मीटर के थ्रो से जीता गोल्ड

महिला डिस्कस थ्रो की F54 श्रेणी में सुवर्णा राज ने शुरुआत से ही अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने छह प्रयासों में चार बार डिस्कस को 15 मीटर से अधिक दूरी तक फेंका। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 15.66 मीटर का रहा, जिसने उन्हें शीर्ष स्थान दिलाया।

ईरान की शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन 14.65 मीटर की दूरी तय करके कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहीं।

तीनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला कड़ा रहा। सुवर्णा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के दम पर ईरानी एथलीट पर 21 सेंटीमीटर की बढ़त बनाई। इस प्रदर्शन ने भारतीय पैरा एथलेटिक्स में उनकी उपलब्धि को खास बना दिया।

डिस्कस थ्रो में खिलाड़ी एक निर्धारित क्षेत्र से डिस्कस फेंकते हैं और सबसे अधिक दूरी हासिल करने वाला एथलीट विजेता बनता है। पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की शारीरिक कार्यक्षमता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की जाती हैं, ताकि प्रतियोगिता अधिक निष्पक्ष हो सके।

F54 कैटेगरी क्या है?

F54 पैरा एथलेटिक्स की फील्ड स्पर्धाओं की एक वर्गीकरण श्रेणी है। इसमें ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनकी शारीरिक कार्यक्षमता, विशेष रूप से धड़ और निचले अंगों की गतिविधि, प्रभावित होती है। इस श्रेणी के एथलीट आमतौर पर बैठकर थ्रोइंग चेयर की सहायता से मुकाबला करते हैं।

थ्रोइंग चेयर खिलाड़ी को स्थिरता देती है, जबकि वह अपने कंधों, बाजुओं और ऊपरी शरीर की उपलब्ध ताकत का इस्तेमाल करके डिस्कस को अधिकतम दूरी तक फेंकने की कोशिश करता है। शरीर के संतुलन और धड़ पर नियंत्रण की क्षमता भी प्रदर्शन को प्रभावित करती है।

पैरा स्पोर्ट्स में वर्गीकरण का उद्देश्य समान स्तर की कार्यात्मक क्षमता वाले खिलाड़ियों को एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देना है। इससे अलग-अलग प्रकार की शारीरिक अक्षमताओं वाले एथलीटों के प्रदर्शन का अधिक उचित आकलन किया जा सकता है।

स्वाति चौधरी ने W1 तीरंदाजी में जीता रजत पदक

भारत की स्वाति चौधरी ने महिला W1 व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में रजत पदक जीतकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। फाइनल में उनका मुकाबला चीन की सेन मेंगकान से हुआ। रोमांचक मुकाबले में स्वाति को 4-6 से हार मिली और उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

स्वाति ने फाइनल की शुरुआत प्रभावशाली अंदाज में की। उन्होंने पहला सेट 25-17 से जीतकर 2-0 की बढ़त बनाई। दूसरे सेट में चीन की तीरंदाज ने 22-21 से जीत हासिल की और मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। तीसरे सेट में स्वाति ने फिर वापसी की और 22-21 से जीतकर 4-2 की बढ़त बना ली। इस समय भारतीय खिलाड़ी स्वर्ण पदक जीतने की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही थीं।

हालांकि, चौथे सेट में सेन मेंगकान ने शानदार निशानेबाजी करते हुए 30 अंक हासिल किए, जबकि स्वाति 20 अंक ही बना सकीं। इससे स्कोर 4-4 हो गया। निर्णायक सेट में भी चीनी तीरंदाज ने अपना संयम बनाए रखा और 28-21 से जीत दर्ज की। इस तरह सेन मेंगकान ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि स्वाति को रजत पदक मिला।

स्वाति का रजत पदक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एशियन पैरा गेम्स की W1 तीरंदाजी श्रेणी में भारत का पहला पदक बताया गया है। इस श्रेणी में ऐसे खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनके हाथ-पैर की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है और जिन्हें तीरंदाजी के लिए विशेष अनुकूलन की जरूरत हो सकती है।

मेरठ की रहने वाली स्वाति चौधरी गुरुकुल आर्चरी एकेडमी में प्रशिक्षण लेती हैं। उन्हें पूर्व ओलंपियन सत्यदेव प्रसाद का मार्गदर्शन मिलता है। उनकी इस उपलब्धि से भारतीय पैरा तीरंदाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

स्वाति ने फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। निर्णायक मुकाबले में शुरुआती बढ़त हासिल करने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक प्रतियोगिता में उनके निरंतर प्रदर्शन का प्रमाण है। यह सफलता भारत में पैरा तीरंदाजी के विकास और खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के महत्व को भी सामने लाती है।

पदक तालिका में भारत की स्थिति

सुवर्णा राज के स्वर्ण और स्वाति चौधरी के रजत पदक के साथ भारत ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में अपनी पदक संख्या बढ़ाई। उपलब्ध रिपोर्टों में एक समय भारत के खाते में 15 स्वर्ण, 22 रजत और 27 कांस्य सहित कुल 64 पदक दर्ज किए गए।

हालांकि, प्रतियोगिता के दौरान अन्य देशों के परिणाम आने से पदक तालिका में लगातार बदलाव हो रहा है। कुछ रिपोर्टों में भारत को पांचवें स्थान पर बताया गया, जबकि शुरुआती खबरों में चौथे स्थान का उल्लेख भी किया गया था। इसलिए किसी निश्चित समय की रैंकिंग प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक पदक तालिका की पुष्टि करना जरूरी है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत की चुनौती केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। भारतीय खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में बेहतर प्रदर्शन करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी दिखा रहे हैं।

भारतीय पैरा खिलाड़ियों से आगे भी पदकों की उम्मीद

सुवर्णा राज और स्वाति चौधरी की उपलब्धियां प्रतियोगिता में भारतीय दल के लिए उत्साह बढ़ाने वाली हैं। एक ओर डिस्कस थ्रो में सुवर्णा ने मजबूत प्रदर्शन के साथ स्वर्ण जीता, तो दूसरी ओर स्वाति ने कड़े फाइनल में रजत पदक हासिल किया।

इन परिणामों से यह भी स्पष्ट होता है कि पैरा खेलों में सफलता के लिए तकनीकी दक्षता, शारीरिक तैयारी, मानसिक मजबूती और निरंतर अभ्यास का महत्वपूर्ण योगदान है। स्वाति के फाइनल में वापसी के प्रयास और सुवर्णा की लगातार 15 मीटर से अधिक के थ्रो करने की क्षमता दोनों ही खिलाड़ियों की तैयारी को दर्शाते हैं।

जापान में जारी इस प्रतियोगिता में भारतीय दल की नजरें अब अन्य स्पर्धाओं में भी पदक जीतने पर होंगी। आने वाले मुकाबलों के परिणाम भारत की अंतिम पदक संख्या और समग्र रैंकिंग तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

सुवर्णा राज का स्वर्ण और स्वाति चौधरी का रजत भारतीय पैरा खेलों के लिए दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। इन सफलताओं ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है और देश के खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बढ़ती मौजूदगी को रेखांकित किया है।

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