India-China Trade: तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों ने की महर्षि व्यास की पूजा, दिखी सांस्कृतिक आस्था

India-China Trade के तहत तकलाकोट मंडी पहुंचे भारतीय व्यापारियों ने रक्षाबंधन पर महर्षि व्यास की पूजा की और निर्विघ्न व्यापार व सुख-समृद्धि की कामना की।

तिब्बत के तकलाकोट व्यापार मंडी में भारतीय व्यापारियों ने रक्षाबंधन के दिन महर्षि व्यास की पूजा की। पिथौरागढ़ के व्यापारियों ने निर्विघ्न कारोबार और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना की।

पिथौरागढ़: India-China Trade के तहत तिब्बत स्थित तकलाकोट व्यापार मंडी पहुंचे भारतीय व्यापारियों ने रक्षाबंधन के दिन महर्षि व्यास ऋषि की पूजा-अर्चना की। व्यास घाटी के रक्षक माने जाने वाले महर्षि व्यास के प्रति अपनी आस्था जताते हुए व्यापारियों ने मंडी के गेट पर पवित्र खादा बांधा। इस दौरान उन्होंने निर्विघ्न व्यापार और सुख-समृद्धि की कामना की।

तकलाकोट मंडी में भारतीय व्यापारियों ने की पूजा

भारत-चीन सीमा व्यापार के तहत तिब्बत के तकलाकोट व्यापार मंडी पहुंचे भारतीय व्यापारियों ने रक्षाबंधन के अवसर पर महर्षि व्यास ऋषि की विधिवत पूजा-अर्चना की। व्यापारियों ने मंडी परिसर में पारंपरिक तरीके से पूजा की और गेट पर पवित्र श्वेत वस्त्र यानी खादा बांधा।

इस दौरान व्यापारियों ने अपने कुलदेवता माने जाने वाले महर्षि व्यास के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और व्यापार के निर्विघ्न संचालन के साथ सुख-समृद्धि की कामना की।

सदियों पुरानी है व्यास ऋषि के प्रति आस्था

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला और उच्च हिमालयी क्षेत्रों के रं समाज के व्यापारी लंबे समय से लिपुलेख दर्रे के रास्ते तकलाकोट में व्यापार करते रहे हैं। इस व्यापारिक परंपरा के साथ उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं।

सीमांत क्षेत्रों के लोगों में महर्षि व्यास के प्रति गहरी आस्था है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, कठिन और दुर्गम हिमालयी रास्तों से व्यापार के लिए गुजरने वाले लोगों की व्यास ऋषि रक्षा करते हैं और उनके कारोबार में सुख-समृद्धि लाते हैं।

विदेशी धरती पर भी कायम रही परंपरा

रक्षाबंधन के दिन व्यापारियों ने पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी पहनकर पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की। विदेशी धरती पर हुई इस पूजा के जरिए उन्होंने अपनी धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को भी प्रदर्शित किया।

तकलाकोट में महर्षि व्यास की पूजा भारत-तिब्बत सीमा व्यापार से जुड़े व्यापारियों की आस्था और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा की झलक भी पेश करती है। उनके लिए व्यापार के साथ अपनी परंपराओं और मान्यताओं को आगे बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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