भारतीय रिसर्चर्स ने खोजा नया सेमीकंडक्टर, गर्मी से 1000 गुना ज्यादा वोल्टेज पैदा करने का दावा

भारतीय रिसर्चर्स ने स्कैंडियम नाइट्राइड और मैग्नीशियम से नया सेमीकंडक्टर बनाया। 200 नैनोमीटर परत ने कमरे के तापमान में ज्यादा वोल्टेज पैदा किया।

भारतीय रिसर्चर्स ने स्कैंडियम नाइट्राइड और मैग्नीशियम से तैयार एक पतली सेमीकंडक्टर परत विकसित की है। करीब 200 नैनोमीटर की इस परत ने कमरे के तापमान पर अपेक्षा से कई गुना अधिक वोल्टेज पैदा किया।

Tech: भारतीय रिसर्चर्स ने गर्मी से बिजली पैदा करने की दिशा में एक नई तकनीक विकसित की है। सेमीकंडक्टर तकनीक में स्कैंडियम नाइट्राइड की बेहद पतली परत में मैग्नीशियम मिलाकर ऐसा मटीरियल तैयार किया गया, जिसने कमरे के तापमान पर सैकड़ों गुना अधिक वोल्टेज पैदा की। रिसर्चर्स के मुताबिक, इसका इस्तेमाल भविष्य में लाइट सेंसर, हीट डिटेक्टर और क्वांटम डिवाइसेज में किया जा सकता है।

भारतीय रिसर्चर्स की नई तकनीक से गर्मी को बिजली में बदलने की दिशा में बड़ी कामयाबी

भारतीय रिसर्चर्स ने खोजा नया सेमीकंडक्टर, गर्मी से 1000 गुना ज्यादा वोल्टेज पैदा करने का दावा

भारतीय रिसर्चर्स ने गर्मी को बिजली में बदलने वाली तकनीक में एक अहम प्रगति की है। टीम ने स्कैंडियम नाइट्राइड की बेहद पतली परतों में मैग्नीशियम मिलाकर नया मटीरियल तैयार किया। इसका परीक्षण करीब 200 नैनोमीटर मोटी परत पर किया गया, जिसमें कमरे के तापमान पर उम्मीद से सैकड़ों गुना अधिक वोल्टेज देखने को मिली।

सीबेक इफेक्ट पर आधारित है तकनीक

इस तकनीक का आधार सीबेक इफेक्ट है। इसमें किसी धातु या सेमीकंडक्टर के एक हिस्से को गर्म और दूसरे हिस्से को ठंडा करने पर दोनों के बीच विद्युत वोल्टेज पैदा होता है।

अब तक ठोस मटीरियल में इस प्रभाव से सीमित मात्रा में बिजली पैदा होने की बात मानी जाती रही है। ज्यादा आउटपुट के लिए लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट्स या जेल जैसे मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता था। नई रिसर्च में ठोस क्रिस्टल से भी मजबूत विद्युत प्रतिक्रिया हासिल होने की बात सामने आई है।

पतली परत से बढ़ी बिजली पैदा करने की क्षमता

रिसर्चर्स ने स्कैंडियम नाइट्राइड की परत में बेहद नियंत्रित तरीके से मैग्नीशियम मिलाया। इससे मटीरियल की आंतरिक संरचना में पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज के वितरण में बदलाव आया।

टेस्टिंग के दौरान यह भी सामने आया कि परत की मोटाई कम करने पर बिजली पैदा करने की क्षमता बढ़ती गई। करीब 200 नैनोमीटर की परत में कमरे के तापमान पर अपेक्षा से कई गुना अधिक वोल्टेज दर्ज की गई।

सेंसर और क्वांटम डिवाइसेज में हो सकता है इस्तेमाल

रिसर्च टीम ने इस तकनीक के आधार पर एक शुरुआती लाइट सेंसर भी तैयार किया है। इस सेंसर पर लेजर लाइट पड़ने पर तेज वोल्टेज प्रतिक्रिया देखने को मिली।

भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर और हीट डिटेक्टर के अलावा क्वांटम डिवाइसेज में किया जा सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने अपनी इस खोज के लिए पेटेंट भी फाइल किया है।

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