बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रयोग के जरिए साबित किया है कि क्वांटम माप 1 से अधिक हो सकता है। टीम ने 1.17 का माप दर्ज किया, जो सैद्धांतिक गणना 1.18 के करीब है।
Quantum Measure Theory: भारतीय वैज्ञानिकों ने क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) की टीम ने पहली बार प्रयोग के जरिए प्रदर्शित किया कि क्वांटम माप यानी क्वांटम मेजर 1 से अधिक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने प्रयोग में इसका मान 1.17 दर्ज किया, जबकि सैद्धांतिक गणना 1.18 थी। यह प्रयोग दिवंगत भौतिक विज्ञानी राफेल सोर्किन के क्वांटम मेजर थ्योरी संबंधी विचारों की पुष्टि करता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने क्वांटम माप को लेकर क्या साबित किया?
बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रयोग के माध्यम से यह दिखाया है कि क्वांटम दुनिया में किसी संभावित इतिहास या रास्ते से जुड़ा क्वांटम माप 1 से अधिक हो सकता है। यह उपलब्धि क्वांटम मेजर थ्योरी की एक पुरानी सैद्धांतिक अवधारणा का प्रायोगिक सत्यापन है।
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इस शोध में संस्थान की वैज्ञानिक उर्बसी सिन्हा के मार्गदर्शन में काम करने वाली संचारि चक्रवर्ती शामिल थीं, जो उस समय पीएचडी की छात्रा थीं। शोध प्रतिष्ठित जर्नल Quantum में प्रकाशित हुआ। इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने क्वांटम माप का मान 1.17 दर्ज किया, जबकि चुनी गई परिस्थितियों के लिए सैद्धांतिक गणना 1.18 थी। दोनों मानों के बीच यह नजदीकी प्रयोगात्मक परिणाम और सैद्धांतिक अनुमान के मेल को दर्शाती है।
आमतौर पर रोजमर्रा की दुनिया में किसी घटना की संभावना शून्य से एक के बीच होती है। उदाहरण के लिए, किसी घटना के होने की संभावना 100 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। लेकिन क्वांटम दुनिया में कणों के व्यवहार को समझने के लिए इस्तेमाल होने वाला क्वांटम माप सामान्य संभावना से अलग है। इसलिए इसका मान एक से अधिक होना संभव है।
Quantum Measure Theory क्या है और यह कैसे काम करती है?
क्वांटम मैकेनिक्स को आमतौर पर किसी सिस्टम की स्थिति और उसके मापन से मिलने वाले परिणामों के आधार पर समझाया जाता है। लेकिन इसे एक दूसरे नजरिए से भी देखा जा सकता है, जिसमें यह अध्ययन किया जाता है कि कोई क्वांटम कण अपनी शुरुआती स्थिति से डिटेक्टर तक पहुंचने के लिए किन-किन संभावित रास्तों से गुजर सकता है।
उदाहरण के तौर पर, प्रकाश के एक कण यानी फोटॉन के लेजर से डिटेक्टर तक पहुंचने के अलग-अलग संभावित रास्तों पर विचार किया जा सकता है। क्वांटम मेजर थ्योरी ऐसे संभावित रास्तों या इतिहासों के समूह को एक सामान्यीकृत माप देती है। इसमें अलग-अलग रास्तों के बीच होने वाले इंटरफेरेंस यानी तरंगों के एक-दूसरे पर प्रभाव को भी शामिल किया जाता है।
यही इंटरफेरेंस क्वांटम माप को सामान्य संभावना से अलग बनाता है। जब कई संभावित रास्तों का प्रभाव एक-दूसरे के साथ जुड़ता है, तो परिणाम ऐसा हो सकता है जिसमें क्वांटम माप एक से अधिक हो जाए। हालांकि, इस प्रभाव को प्रयोग में दर्ज करना आसान नहीं है, क्योंकि संभावित रास्ते हमेशा सामान्य मापन की एक सीधी श्रृंखला के रूप में नहीं देखे जा सकते।
राफेल सोर्किन की थ्योरी को मिला प्रायोगिक समर्थन
इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने एक विशेष व्यवस्था तैयार की, जिससे अलग-अलग संभावित क्वांटम इतिहासों के प्रभाव का अध्ययन किया जा सके। इसके जरिए पहली बार एक से अधिक क्वांटम माप दर्ज किया गया। यह परिणाम उस सिद्धांत के अनुरूप था, जिसे भौतिक विज्ञानी राफेल सोर्किन ने विकसित किया था।
सोर्किन ने क्वांटम मेजर थ्योरी पर काम करते हुए क्वांटम ग्रैविटी यानी क्वांटम गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को समझने की दिशा में योगदान दिया था। वह कनाडा के पेरिमीटर इंस्टीट्यूट ऑफ थियोरेटिकल फिजिक्स में दो दशक से अधिक समय तक शोध से जुड़े रहे। वह रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट में विशिष्ट विजिटिंग फैकल्टी सदस्य भी थे।
इस शोध को प्रकाशन के लिए स्वीकार किए जाने के कुछ समय बाद, 12 सितंबर को सोर्किन का निधन हो गया। वह इस शोधपत्र के सह-लेखक भी थे। रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की क्वांटम इन्फॉर्मेशन एंड कंप्यूटिंग प्रयोगशाला की प्रमुख उर्बसी सिन्हा ने कहा कि यह शोध उनके लिए व्यक्तिगत और वैज्ञानिक, दोनों ही स्तरों पर काफी मायने रखता है।
यह उपलब्धि क्वांटम भौतिकी में संभावित रास्तों और उनके बीच होने वाले इंटरफेरेंस को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह दिखाती है कि क्वांटम दुनिया को समझने के लिए सामान्य संभावना के नियमों से आगे बढ़कर दूसरे सैद्धांतिक तरीकों की भी जरूरत पड़ सकती है।








