इंडोनेशिया के पूर्वी जावा स्थित सेमेरू नेशनल पार्क में जंगल की आग बुझाने के दौरान चार लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से झुलस गए। एल नीनो के प्रभाव से बढ़ती आग ने वन्यजीवों और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता पर चिंता बढ़ा दी है।
जकार्ता: इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर जंगल में लगी आग ने जानलेवा रूप ले लिया है। पूर्वी जावा प्रांत के सेमेरू नेशनल पार्क में आग बुझाने के अभियान के दौरान चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। अधिकारियों के मुताबिक, बचाव और आग पर काबू पाने में जुटी टीम घने धुएं और तेजी से फैलती लपटों के बीच फंस गई थी। इस बीच, इंडोनेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों पर भी जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ रही हैं। आग से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचने के साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में वायु प्रदूषण और धुंध का खतरा बढ़ गया है।
सेमेरू नेशनल पार्क में आग बुझाने के दौरान हादसा
यह घटना पूर्वी जावा के प्रोबोलिंग्गो क्षेत्र में स्थित सेमेरू नेशनल पार्क में हुई। स्थानीय पुलिस के प्रवक्ता जूल्स अब्राहम अबास्ट के अनुसार, 12 सदस्यों वाली एक टीम गुरुवार को आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान टीम के सदस्य घने धुएं और तेजी से आगे बढ़ती आग के बीच फंस गए।
अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर लगभग 1:30 बजे टीम ने खतरे वाले क्षेत्र के बाहर मौजूद सहयोगियों को आपातकालीन संदेश भेजकर अपनी स्थिति की जानकारी दी। संदेश में बताया गया कि धुएं और लपटों के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
इसके बाद बचाव दल ने घटनास्थल पर पहुंचकर निकासी अभियान शुरू किया। अधिकारियों को एक निर्धारित निकासी स्थल पर तीन लोगों के शव मिले, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से झुलसे हुए थे। घायलों में से एक की उपचार के दौरान मौत हो गई। इस तरह हादसे में मरने वालों की संख्या चार हो गई।
दो स्वयंसेवकों की हालत गंभीर
गंभीर रूप से झुलसे दो लोगों को विशेष उपचार के लिए पूर्वी जावा के सुरबाया स्थित डॉ. सोएटोमो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों का उपचार जारी था। टीम के छह अन्य सदस्य सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।
प्रोबोलिंग्गो की पुलिस प्रमुख अस्मिदा रिज्की सिरेगर ने बताया कि आग प्रभावित क्षेत्र दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है। इस कारण बचाव अभियान चलाना और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण रहा।
अधिकारियों ने गुरुवार देर रात तक निकासी अभियान पूरा कर लिया था। साथ ही, हादसे में हुई मौतों की जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या घटना के पीछे किसी प्रकार की लापरवाही या आपराधिक चूक की भूमिका थी।
फिलहाल जांच पूरी होने से पहले हादसे के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
पहले भी पार्क में लगी थी भीषण आग
सेमेरू नेशनल पार्क में आग लगने की यह पहली बड़ी घटना नहीं है। अगस्त में भी यहां भीषण आग लगी थी, जिसने लगभग नौ वर्ग किलोमीटर घास के मैदान और वनस्पति को नुकसान पहुंचाया था। प्रभावित क्षेत्र में संरक्षित एडेलवाइस फूलों की मौजूदगी भी बताई गई थी।
राष्ट्रीय उद्यानों में आग लगने से केवल पेड़-पौधे ही नष्ट नहीं होते, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता, जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास पर भी असर पड़ता है। आग के कारण जानवरों को भोजन और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दूसरे क्षेत्रों की ओर जाना पड़ सकता है।
सेमेरू नेशनल पार्क जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण करना विशेष रूप से कठिन हो सकता है, क्योंकि पहाड़ी भूभाग, तेज हवाएं और घना धुआं बचावकर्मियों की आवाजाही में बाधा पैदा करते हैं।
ओरंगुटान के अस्तित्व पर बढ़ा खतरा
इंडोनेशिया के जंगलों में फैल रही आग का असर जावा द्वीप तक सीमित नहीं है। बोर्नियो और सुमात्रा के जंगलों में भी आग की घटनाएं वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। खास तौर पर संकटग्रस्त ओरंगुटान के प्राकृतिक आवास को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पश्चिम कालीमंतन प्रांत के केतापांग क्षेत्र में स्थित यायासन इनिसियासी आलम रिहैबिलिटासी इंडोनेशिया (YIARI) नामक संस्था का पुनर्वास केंद्र आग प्रभावित इलाकों से बचाए गए ओरंगुटान की देखभाल कर रहा है।
संस्था की सह-संस्थापक करमेले ल्यानो सांचेज के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियां 2015 में लगी भीषण आग जैसी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जंगलों में आग लंबे समय तक जारी रहती है, तो ओरंगुटान को भोजन, पर्याप्त जगह और प्राकृतिक आवास की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
संस्था के प्रवक्ता हेरिबर्टस सुचियादी के मुताबिक, केंद्र अगस्त से अब तक 49 ओरंगुटान को बचा चुका है और वहां कुल 90 ओरंगुटान की देखभाल की जा रही थी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र आम तौर पर हर साल तीन से पांच ओरंगुटान को बचाता था।
बचाव की संख्या में यह वृद्धि वन्यजीवों पर बढ़ते दबाव का संकेत देती है। हालांकि, सभी प्रभावित जानवरों की स्थिति और आग से उनके प्राकृतिक आवास को हुए कुल नुकसान का आकलन अलग से करना जरूरी है।
एल नीनो और लंबे शुष्क मौसम ने बढ़ाई मुश्किल
इंडोनेशिया में इस साल जंगलों और जमीन पर लगने वाली आग की घटनाओं के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें लंबे समय तक बारिश की कमी, सूखी वनस्पति और एल नीनो से जुड़ी मौसम संबंधी परिस्थितियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्नियो और सुमात्रा में आग की घटनाएं जुलाई से जारी थीं और नवंबर तक चलने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, आग की वास्तविक अवधि मौसम, वर्षा और नियंत्रण अभियानों की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।
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इसके अलावा, बोर्नियो के इंडोनेशियाई हिस्से और सुमात्रा के कुछ क्षेत्रों में जमीन साफ करने के लिए आग के इस्तेमाल को भी समस्या बढ़ाने वाला कारक बताया गया है। पानी की कमी ने अग्निशमन दलों के लिए आग बुझाने का काम और कठिन बना दिया है। इन प्रयासों में जापान से भी सहायता मिलने की जानकारी दी गई है।
इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार शाम तक देशभर में 799 हॉटस्पॉट दर्ज किए गए थे। एक दिन पहले इनकी संख्या 372 थी। इनमें से तीन-चौथाई से अधिक हॉटस्पॉट सुमात्रा और बोर्नियो के छह आग प्रभावित प्रांतों में केंद्रित थे।
यहां यह समझना जरूरी है कि हॉटस्पॉट की संख्या उपग्रह से दर्ज संभावित आग या असामान्य ताप वाले क्षेत्रों का संकेत देती है। यह सीधे तौर पर सक्रिय आग की घटनाओं या जले हुए कुल क्षेत्रफल के बराबर नहीं होती।
सिंगापुर, मलेशिया और अन्य देशों तक पहुंचा धुआं
इंडोनेशिया के जंगलों में आग से उठने वाला धुआं आसपास के देशों तक पहुंच रहा है। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में सीमा पार वायु प्रदूषण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर, मलेशिया और पूर्वी तिमोर तक धुंध का असर देखा गया, जबकि क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी खराब वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई।
मलेशिया ने खराब वायु गुणवत्ता के कारण शुक्रवार को कई राज्यों में सैकड़ों स्कूल बंद करने का आदेश दिया। इससे बच्चों और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य पर धुएं के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी।
मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हसन ने इंडोनेशिया से मुआवजा मांगने की अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि संकट का समाधान कूटनीतिक बातचीत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN) के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मलेशिया इंडोनेशिया को सहायता देने के लिए समन्वय कर रहा है और क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की दिशा में काम करेगा।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी कहा कि अधिकारी उन कंपनियों की जांच कर रहे हैं, जिनका संबंध इंडोनेशिया में जंगलों और पीटलैंड में लगी आग से होने का आरोप है। उन्होंने संकेत दिया कि जहां आवश्यक होगा, वहां कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जली हुई जमीन का दायरा बढ़ने से चिंता
इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय के अनुसार, जनवरी से जुलाई के बीच देश में 2,020 वर्ग किलोमीटर से अधिक जमीन जल चुकी थी। यह क्षेत्रफल सिंगापुर के आकार से भी बड़ा है।
वहीं, आग की निगरानी के लिए उपग्रह तस्वीरों का इस्तेमाल करने वाली स्वतंत्र परियोजना नुसंतारा एटलस ने अनुमान लगाया कि अगस्त के अंत तक इंडोनेशिया में लगभग 8,960 वर्ग किलोमीटर जमीन आग से प्रभावित हो चुकी थी। मंत्रालय और स्वतंत्र परियोजना के आंकड़ों के बीच अंतर को समझने के लिए उनके आकलन की अवधि, पद्धति और परिभाषाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
आग की घटनाओं का बढ़ता दायरा पर्यावरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और क्षेत्रीय सहयोग के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है। जंगलों के संरक्षण के साथ-साथ आग की रोकथाम, समय पर चेतावनी और प्रभावी बचाव व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
आगे क्या हैं चुनौतियां?
इंडोनेशिया में जंगलों की आग से निपटने के लिए तत्काल प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण, बचावकर्मियों की सुरक्षा और घायल लोगों का उपचार है। इसके साथ ही वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और धुएं से प्रभावित समुदायों की मदद करने की आवश्यकता है।
लंबी अवधि में आग के कारणों की जांच, जमीन साफ करने के लिए आग के इस्तेमाल पर नियंत्रण और मौसम संबंधी जोखिमों के अनुरूप तैयारी महत्वपूर्ण होगी। क्षेत्रीय स्तर पर इंडोनेशिया और उसके पड़ोसी देशों के बीच सहयोग भी जरूरी है, क्योंकि धुआं राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहता।
सेमेरू नेशनल पार्क में चार लोगों की मौत इस संकट के मानवीय पहलू को उजागर करती है। वहीं, ओरंगुटान के प्राकृतिक आवास और कई देशों में खराब वायु गुणवत्ता से स्पष्ट है कि जंगलों की आग केवल स्थानीय पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय चुनौती बन चुकी है।









