इंडोनेशिया और अमेरिका ने 4,700 सैनिकों के साथ सुपर गरुड़ शील्ड सैन्य अभ्यास शुरू किया। ब्रिटेन, फ्रांस और जापान समेत कई देश इसमें शामिल हैं। अभ्यास में विशेष बलों की ट्रेनिंग और साइबर डिफेंस पर जोर दिया जाएगा।
वाशिगंटन: इंडोनेशिया और अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और संभावित आक्रामकता को रोकने के उद्देश्य से सोमवार को बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास शुरू किया। करीब दो दशक से आयोजित हो रहे सुपर गरुड़ शील्ड अभ्यास में इस बार लगभग 4,700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और जापान समेत अमेरिका के कई सहयोगी देशों की सेनाएं इंडोनेशिया के अलग-अलग हिस्सों में अभ्यास करेंगी।
यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय शुरू हुआ है जब इंडोनेशिया एक ओर अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत बनाए हुए है। इंडोनेशिया की विदेश नीति को आमतौर पर ‘स्वतंत्र और सक्रिय’ नीति के रूप में परिभाषित किया जाता है। जकार्ता अमेरिका और चीन दोनों के साथ रणनीतिक एवं आर्थिक संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है।
4,700 सैनिक होंगे अभ्यास में शामिल
इस साल सुपर गरुड़ शील्ड अभ्यास में लगभग 4,700 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास इंडोनेशिया के कई इलाकों में आयोजित किया जाएगा, जिनमें सुमात्रा और बोर्नियो द्वीप भी शामिल हैं। यह सैन्य गतिविधियां 11 सितंबर तक चलने की योजना है।
ब्रिटेन, फ्रांस और जापान के अलावा कई अन्य देशों की सेनाएं भी इस अभ्यास में शामिल हैं। ईस्ट तिमोर, इटली और थाईलैंड समेत कुछ देशों ने अभ्यास के लिए पर्यवेक्षक भेजे हैं। इससे यह अभ्यास केवल द्विपक्षीय सैन्य गतिविधि न रहकर व्यापक बहुराष्ट्रीय रक्षा सहयोग का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
सुपर गरुड़ शील्ड का आयोजन लगभग 20 वर्षों से किया जा रहा है। इसका मकसद भाग लेने वाले देशों की सेनाओं के बीच समन्वय, संचालन क्षमता और आपसी सहयोग को बेहतर बनाना है।
विशेष बलों की घुसपैठ और साइबर डिफेंस की ट्रेनिंग
इस वर्ष के अभ्यास में पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अधिकारियों के अनुसार इसमें विशेष बलों की घुसपैठ संबंधी ट्रेनिंग और साइबर डिफेंस अभ्यास शामिल होंगे।
विशेष बलों से जुड़ी ट्रेनिंग का उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल और अभियान क्षमता विकसित करना है। वहीं साइबर डिफेंस अभ्यास आधुनिक युद्ध के उस पहलू पर केंद्रित है, जिसमें डिजिटल नेटवर्क, सैन्य संचार और महत्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा अहम हो गई है।
इस तरह सुपर गरुड़ शील्ड केवल जमीन पर सैन्य क्षमता प्रदर्शित करने वाला अभ्यास नहीं है, बल्कि बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप सेनाओं की तैयारी को मजबूत करने का प्रयास भी है।
अमेरिकी कमांडर ने बताया महत्वपूर्ण अभ्यास
अमेरिकी फोर्थ इन्फैंट्री डिविजन के कमांडर पैट्रिक एलिस ने अभ्यास के उद्घाटन के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए इसकी अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था जटिल है और किसी संकट के शुरू होने के बाद अचानक सैन्य तैयारी नहीं की जा सकती।
उनके मुताबिक, शांति के समय सहयोगी देशों के बीच सैन्य संपर्क और आपसी समझ विकसित करना जरूरी है। संयुक्त अभ्यास के माध्यम से सैनिक एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझते हैं और संभावित संकट की स्थिति में बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
एलिस ने इंडोनेशिया को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण देश बताया। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में शामिल इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति भी उसे इंडो-पैसिफिक रणनीति में अहम बनाती है।
अमेरिका के साथ इंडोनेशिया का रक्षा सहयोग मजबूत
इंडोनेशिया और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में हाल के समय में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। अप्रैल में दोनों देशों ने अपने रक्षा सहयोग को प्रमुख रक्षा सहयोग साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था।
सुपर गरुड़ शील्ड इसी व्यापक रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। नियमित सैन्य अभ्यासों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच संपर्क और संचालन संबंधी तालमेल बढ़ता है।
अमेरिका के लिए इंडोनेशिया की रणनीतिक अहमियत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित है और हिंद महासागर तथा प्रशांत क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति रखता है। इंडोनेशिया के साथ रक्षा संबंध मजबूत करना अमेरिका की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
चीन के साथ भी बढ़ा इंडोनेशिया का सैन्य संपर्क
दिलचस्प बात यह है कि इंडोनेशिया अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास कर रहा है, जबकि इसी महीने उसने चीन के साथ भी संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया था। ताइवान ने उस अभ्यास को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया था।
इंडोनेशिया की नीति का महत्वपूर्ण पहलू यही संतुलन है। जकार्ता अमेरिका के साथ रक्षा और व्यापार संबंधों को बढ़ा रहा है, लेकिन चीन के साथ भी राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संपर्क बनाए हुए है।
इस महीने चीन के विदेश और रक्षा मंत्री इंडोनेशिया पहुंचे थे, जहां दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने राजनीतिक और सैन्य सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
चीन के साथ भी होगा संयुक्त सैन्य अभ्यास
इंडोनेशिया और चीन के बीच सैन्य सहयोग आने वाले समय में भी जारी रहने वाला है। इस वर्ष बाद में दोनों देश हेपिंग गरुड़ नाम से अपना संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करेंगे।
सुपर गरुड़ शील्ड के मुकाबले हेपिंग गरुड़ का फोकस अलग तरह की गतिविधियों पर रहेगा। इसमें मानवीय सहायता, आपदा राहत और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग जैसे विषय प्रमुख होंगे।
इससे स्पष्ट होता है कि इंडोनेशिया किसी एक शक्ति के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय विभिन्न देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग बनाए रखने की नीति अपना रहा है।
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BRICS का भी हिस्सा है इंडोनेशिया
इंडोनेशिया की बहुस्तरीय विदेश नीति का एक और उदाहरण उसका BRICS में शामिल होना है। इंडोनेशिया पिछले साल इस उभरते देशों के समूह में शामिल हुआ था। BRICS में चीन और रूस जैसे देश भी शामिल हैं।
इसके बावजूद इंडोनेशिया ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों में भी विस्तार किया है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापार समझौता किया है और ट्रंप की ओर से प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भी शामिल हुए हैं।
इससे इंडोनेशिया की विदेश नीति का संतुलित स्वरूप सामने आता है। जकार्ता पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करते हुए चीन तथा अन्य उभरती शक्तियों के साथ भी अपने संपर्क बनाए रखना चाहता है।
इंडो-पैसिफिक में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
सुपर गरुड़ शील्ड का आयोजन ऐसे दौर में हो रहा है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ सैन्य समन्वय मजबूत कर रहा है, जबकि चीन भी दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने राजनीतिक और रक्षा संबंधों को विस्तार दे रहा है।
इंडोनेशिया के लिए चुनौती यह है कि वह इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखे। जकार्ता लंबे समय से किसी एक शक्ति के साथ पूरी तरह गठबंधन करने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देता रहा है।
ऐसे में अमेरिका के साथ सुपर गरुड़ शील्ड और चीन के साथ हेपिंग गरुड़ जैसे अभ्यास एक-दूसरे के विरोधाभासी होने के बजाय इंडोनेशिया की व्यापक बहुपक्षीय कूटनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं।
सैन्य अभ्यास से क्या हासिल होगा?
सुपर गरुड़ शील्ड से भाग लेने वाले देशों की सेनाओं को संयुक्त अभियानों का अनुभव हासिल होगा। विशेष बलों की ट्रेनिंग, साइबर डिफेंस और अन्य सैन्य गतिविधियों के जरिए सैनिक अलग-अलग सुरक्षा परिस्थितियों में सहयोग करना सीखेंगे।
इसके अलावा, इतने बड़े बहुराष्ट्रीय अभ्यास से सैन्य संचार और आपसी विश्वास को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। किसी प्राकृतिक आपदा, मानवीय संकट या क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती के दौरान विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अभ्यास का एक बड़ा संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इंडो-पैसिफिक में अपनी सैन्य तैयारी और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। इंडोनेशिया की इसमें भागीदारी उसके बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाती है।
इंडोनेशिया की संतुलित विदेश नीति पर दुनिया की नजर
सुपर गरुड़ शील्ड के शुरू होने के साथ इंडोनेशिया एक बार फिर वैश्विक रणनीतिक ध्यान के केंद्र में है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों के साथ सैन्य अभ्यास करने के साथ ही वह चीन के साथ भी रक्षा सहयोग जारी रखे हुए है।
यह नीति बताती है कि इंडोनेशिया फिलहाल अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा में किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह खड़े होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर दोनों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है।
4,700 सैनिकों की भागीदारी वाला यह अभ्यास आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच रहेगा। विशेष बलों की ट्रेनिंग और साइबर डिफेंस जैसे विषय इस बात का संकेत हैं कि सैन्य तैयारी अब केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रह गई है।
सुपर गरुड़ शील्ड के जरिए इंडोनेशिया और अमेरिका अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सैन्य तालमेल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, जकार्ता का चीन के साथ समानांतर सहयोग यह स्पष्ट करता है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में कूटनीतिक और रणनीतिक समीकरण तेजी से बहुआयामी हो रहे हैं।










