नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान से जुड़े हैकर्स ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल्स का उपयोग साइबर हमलों, फर्जी प्रोफाइल बनाने और ऑनलाइन प्रचार अभियानों के लिए कर रहे हैं। अमेरिका और इजरायल कथित तौर पर प्रमुख निशाने पर हैं।
लंदन: ईरान की साइबर गतिविधियों को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश से जुड़े हैकिंग नेटवर्क विदेशी AI टूल्स का इस्तेमाल अपने ऑनलाइन अभियानों को मजबूत बनाने के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकों का उपयोग साइबर हमलों, फर्जी पहचान तैयार करने और डिजिटल प्रचार गतिविधियों में किया जा रहा है।
AI टूल्स की मदद से बढ़ रही साइबर गतिविधियां
रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के डिजिटल हमलों और ऑनलाइन अभियानों में कर रहे हैं। इन तकनीकों की मदद से कथित तौर पर मैलवेयर कोड तैयार किए जा रहे हैं और ऐसे संदेश लिखे जा रहे हैं जिनका उद्देश्य लोगों को धोखा देकर संवेदनशील जानकारी हासिल करना है।
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बताया गया है कि AI की सहायता से तैयार सामग्री अधिक स्वाभाविक और विश्वसनीय दिखाई देती है, जिससे साइबर अपराधियों के लिए लोगों का भरोसा जीतना आसान हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरेटिव AI ने साइबर हमलों की रणनीतियों को पहले की तुलना में अधिक उन्नत बना दिया है।
फर्जी प्रोफाइल और सोशल इंजीनियरिंग पर जोर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI की मदद से नकली ऑनलाइन पहचान और प्रोफाइल तैयार की जा रही हैं। इनमें प्रोफाइल फोटो, व्यक्तिगत जानकारी और सोशल मीडिया गतिविधियां इस तरह बनाई जाती हैं कि वे वास्तविक लगें।
ऐसी प्रोफाइल का इस्तेमाल लोगों से संपर्क स्थापित करने और धीरे-धीरे उनका विश्वास हासिल करने के लिए किया जाता है। इसके बाद कथित तौर पर संदिग्ध लिंक, फाइलें या अन्य अनुरोध भेजे जाते हैं, जिनके जरिए साइबर हमलों को अंजाम देने की कोशिश की जाती है।
इजरायल और अमेरिका कथित तौर पर प्रमुख निशाने पर
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल और अमेरिका से जुड़े व्यक्तियों तथा संस्थानों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। कुछ मामलों में कथित तौर पर ऐसे ईमेल और संदेश भेजे गए, जिनमें लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव और सहयोग के ऑफर दिए गए।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अभियानों में तकनीकी हमलों के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग रणनीतियों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य सीधे सिस्टम को हैक करने के बजाय लोगों को भ्रमित कर उनसे जानकारी हासिल करना होता है।
सैन्य और प्रचार अभियानों में भी AI की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, AI का उपयोग केवल साइबर हमलों तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल सैन्य निर्णय प्रक्रिया को तेज करने, ड्रोन संचालन को बेहतर बनाने और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्ध से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है।
इसके अलावा, AI आधारित कंटेंट के जरिए ऑनलाइन प्रचार अभियानों को भी बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं। दावा है कि सरकार समर्थक नेटवर्क AI से तैयार वीडियो, तस्वीरों और अन्य डिजिटल सामग्री का उपयोग कर अपने संदेशों को व्यापक स्तर पर प्रसारित कर रहे हैं।
हालांकि, इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच सरकारों, कंपनियों और आम इंटरनेट यूजर्स को डिजिटल सुरक्षा के प्रति पहले से अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।










