जॉर्डन में ईरानी हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता; अमेरिका ने ईरान पर फिर की जवाबी कार्रवाई

जॉर्डन मे ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले मे दो अमेरिकी सैनिको की मौत और एक लापता। जवाब मे अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया।

जॉर्डन में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक अब भी लापता है। जवाब में अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए। इस घटना के बाद मध्य पूर्व में तनाव और गहरा गया है।

ईरान/अमेरिका वॉर: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है। जॉर्डन में शुक्रवार रात ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य सैनिक अब भी लापता बताया जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि हमले में कई सैनिक घायल भी हुए, जिनमें से चार को उपचार के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि मामूली रूप से घायल अन्य सैनिक फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

इस घटना के बाद अमेरिका ने शनिवार रात लगातार आठवीं बार ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का जवाब देना है।

अमेरिकी सेना ने नहीं बताई शहीद सैनिकों की पहचान

CENTCOM ने बताया कि मृत सैनिकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी। सैन्य परंपरा के अनुसार पहले उनके परिजनों को आधिकारिक सूचना दी जाएगी, उसके बाद ही नाम जारी किए जाएंगे। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि सैनिकों ने जॉर्डन में सहयोगी बलों के साथ मिलकर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना किया। इसी दौरान दो सैनिकों की जान चली गई और एक सैनिक लापता हो गया।

जवाबी कार्रवाई में ईरान पर लगातार आठवीं रात हवाई हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर शनिवार रात ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले किए गए। CENTCOM के अनुसार, यह अभियान लगातार आठवीं रात चलाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाना है, जिनका इस्तेमाल होरमुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों को खतरे में डालने के लिए किया जा रहा है। अमेरिका ने यह भी कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने वाले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

ईरान का पलटवार और कड़े बयान

ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी आलोचना की है। देश के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से जारी बयान में अमेरिका पर संघर्ष को और भड़काने का आरोप लगाया गया। बयान में कहा गया कि अमेरिका ने युद्धविराम की भावना का उल्लंघन किया है और उसके कदम क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसका जवाब भी दिया जाएगा।

जॉर्डन ने कई मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं

जॉर्डन की सेना ने जानकारी दी कि रात के दौरान उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली कम से कम 10 ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इन मिसाइलों से देश में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते हमले पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

जॉर्डन में ईरानी हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता; अमेरिका ने ईरान पर फिर की जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने सैनिकों को दी श्रद्धांजलि

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अपने सैनिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि IRGC ने जॉर्डन स्थित अल-अजराक एयर बेस पर दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया है। हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

दुनिया भर के अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी

बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनिया भर में रह रहे अमेरिकी नागरिकों, विशेष रूप से मध्य पूर्व में मौजूद लोगों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है। यात्रा परामर्श में नागरिकों से कहा गया है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, समाचारों पर नजर रखें और अनावश्यक यात्रा से बचें। विभाग ने चेतावनी दी कि क्षेत्र में हालात तेजी से बदल सकते हैं और अचानक सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।

युद्धविराम के बाद फिर बिगड़े हालात

अमेरिका और ईरान के बीच जून में एक प्रारंभिक युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध दोबारा लागू कर दिए, जबकि ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ा है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है।

नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों के आरोप

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान दोनों पर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं। अमेरिका ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने आरोप लगाया कि ईरान ने क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं पर हमले किए हैं। कुवैत ने दावा किया कि बिजली संयंत्र और जल शोधन संयंत्र प्रभावित हुए हैं। GCC ने ऐसे हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।

वैश्विक चिंता बढ़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक वार्ता के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की नजरें आने वाले दिनों में दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।

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