गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की तैयारी का दावा, अमेरिकी मंजूरी का इंतजार: इजरायली रक्षा मंत्री

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना तैयार की गई है। इसे लागू करने के लिए अमेरिका की मंजूरी जरूरी होगी।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने दावा किया कि गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर ले जाने की योजना तैयार है और अमेरिका की मंजूरी का इंतजार है। उन्होंने कहा कि योजना रद्द नहीं हुई है, जबकि जबरन विस्थापन पर अंतरराष्ट्रीय कानून गंभीर प्रतिबंध लगाता है।

तेल अवीव: इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को बाहर ले जाने की योजना तैयार है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अमेरिका की मंजूरी और विस्थापित लोगों को स्वीकार करने वाले देशों की जरूरत होगी। काट्ज ने दावा किया कि गाजा संकट का कोई स्थायी समाधान फिलिस्तीनियों के पलायन के बिना संभव नहीं है।

काट्ज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गाजा में युद्धविराम और उसके बाद क्षेत्र के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। फिलिस्तीनियों को गाजा से हटाने की किसी भी योजना का मुद्दा बेहद संवेदनशील है, क्योंकि जबरन विस्थापन को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है।

समुद्र और हवाई मार्ग से लोगों को बाहर ले जाने की बात

इजरायली रक्षा मंत्री ने बुधवार को Ynet और Yedioth Ahronoth द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि उनकी सरकार कथित रूप से लोगों को गाजा से बाहर ले जाने के लिए तैयार है। उन्होंने समुद्र, हवाई मार्ग और अन्य संभावित रास्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि योजना के क्रियान्वयन के लिए अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

काट्ज ने यह भी कहा कि गाजा से फिलिस्तीनियों के स्थानांतरण से जुड़ी योजना खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, अमेरिका इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर फिलिस्तीनियों को गाजा से बाहर निकाला जाता है तो उन्हें किन देशों में बसाया जा सकता है।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई स्पष्ट समर्थन सामने नहीं आया। अमेरिकी दूतावास ने टिप्पणी के अनुरोध को विदेश विभाग की ओर भेज दिया।

ट्रंप की पुरानी योजना फिर चर्चा में

फिलिस्तीनियों के गाजा से बाहर जाने की बहस की पृष्ठभूमि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव से जुड़ी है, जिसने 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी। अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ने गाजा के लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों को क्षेत्र से बाहर ले जाने और गाजा के पुनर्विकास की बात कही थी।

ट्रंप ने गाजा को युद्ध के बाद एक बड़े विकास क्षेत्र और भूमध्यसागरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का विचार सामने रखा था। प्रस्ताव को कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की आलोचना का सामना करना पड़ा। मिस्र सहित क्षेत्र के कई देशों ने फिलिस्तीनियों को उनकी भूमि से स्थायी रूप से हटाने के विचार का विरोध किया।

फिलिस्तीनी पक्ष ने भी इस तरह की किसी योजना को अस्वीकार्य बताया है। उनके लिए बड़े पैमाने पर विस्थापन की आशंका 1948 की नकबा की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ी है, जब इजरायल की स्थापना के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी अपने घरों से विस्थापित हुए थे।

युद्धविराम में जबरन विस्थापन का प्रावधान नहीं

गाजा में घोषित युद्धविराम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्षेत्र के भविष्य के लिए 20 बिंदुओं वाली योजना का उल्लेख किया था। इस रूपरेखा में लोगों के जबरन विस्थापन को शामिल नहीं किया गया था।

इसके बावजूद काट्ज का कहना है कि गाजा से लोगों के बाहर जाने का विचार समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने इसे फिलहाल रुकी हुई योजना बताते हुए कहा कि इस पर चर्चा जारी है।

काट्ज ने दावा किया कि योजना को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका की सहमति जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हमास युद्धविराम के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करता है, तो परिस्थितियां बदल सकती हैं और योजना को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

इन दावों के अलावा काट्ज ने यह भी कहा कि गाजा की लगभग 80 प्रतिशत आबादी बाहर जाना चाहती है और हमास कथित रूप से उन्हें रोक रहा है। उन्होंने इस आंकड़े के समर्थन में कोई सार्वजनिक स्रोत या सर्वेक्षण प्रस्तुत नहीं किया।

जबरन विस्थापन पर अंतरराष्ट्रीय कानून की स्थिति

गाजा से फिलिस्तीनियों को जबरन हटाने का सवाल अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से बेहद गंभीर है। कब्जे वाले क्षेत्र से नागरिकों का जबरन स्थानांतरण अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत प्रतिबंधित है और परिस्थितियों के आधार पर इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है।

गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की तैयारी का दावा, अमेरिकी मंजूरी का इंतजार: इजरायली रक्षा मंत्री

इसी कारण किसी भी ऐसी योजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कानूनी और मानवीय चिंताएं उठती रही हैं। यदि किसी आबादी को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी क्षेत्र से बाहर किया जाता है, तो उसके अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य के पुनर्वास को लेकर गंभीर सवाल पैदा होते हैं।

इजरायल और अमेरिका दोनों ने अपने खिलाफ लगाए गए युद्ध अपराध संबंधी आरोपों को खारिज किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाजा युद्ध से जुड़े मामलों की जांच और कानूनी कार्यवाही पहले से चल रही है।

नेतन्याहू और गैलेंट के खिलाफ ICC वारंट

गाजा संघर्ष के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। यह कार्रवाई कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े आरोपों के संदर्भ में हुई थी।

इजरायल ने ICC के अधिकार क्षेत्र और उसके आरोपों को चुनौती दी है, जबकि अमेरिका ने भी संबंधित कार्रवाई का विरोध किया है। इस पूरे मामले ने इजरायल और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों के बीच विवाद को और गहरा किया है।

काट्ज के ताजा बयान ऐसे समय में आए हैं जब गाजा के भविष्य, युद्धविराम की स्थिरता और क्षेत्र के पुनर्निर्माण को लेकर कई सवाल अनसुलझे हैं।

गाजा में बड़े पैमाने पर विस्थापन

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध में गाजा की बड़ी आबादी को कई बार अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा है। इजरायली सैन्य अभियान के दौरान भारी संख्या में लोगों ने सुरक्षित स्थानों की तलाश में क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में शरण ली।

इजरायली आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर के हमले में 1,221 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी मारे गए।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद इजरायली हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय हमास द्वारा संचालित प्रशासन के अधीन काम करता है, इसलिए उसके आंकड़ों को संबंधित स्रोत के रूप में देखा जाता है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक युद्धविराम लागू होने के बाद भी 1,330 से अधिक लोगों की मौत हुई है।

विस्थापन की योजना पर बढ़ सकती है अंतरराष्ट्रीय चिंता

काट्ज के बयान से गाजा के भविष्य को लेकर पहले से मौजूद राजनीतिक और मानवीय बहस एक बार फिर तेज हो सकती है। यदि फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से गाजा से बाहर ले जाने की योजना वास्तव में आगे बढ़ती है, तो इसके लिए अमेरिका, अरब देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि किसी भी प्रस्ताव में फिलिस्तीनियों की इच्छा, सुरक्षा, नागरिक अधिकार और उनके भविष्य की स्थिति को किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि विस्थापित लोगों को कौन से देश स्वीकार करेंगे और क्या उन्हें वापस लौटने का अधिकार मिलेगा।

फिलहाल काट्ज के बयान से यह स्पष्ट है कि इजरायली सरकार के भीतर गाजा से आबादी के स्थानांतरण का विचार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दूसरी ओर, इस प्रस्ताव पर अमेरिका की वास्तविक स्थिति और संभावित मेजबान देशों की सहमति स्पष्ट नहीं है।

इसलिए गाजा से फिलिस्तीनियों के संभावित विस्थापन का मुद्दा आने वाले समय में इजरायल-अमेरिका संबंधों, मध्य पूर्व की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून की बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है। किसी भी योजना का वास्तविक स्वरूप और उसका भविष्य आगे होने वाली कूटनीतिक बातचीत तथा युद्धविराम की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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