भारत के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले स्टार जैवलिन थ्रोअर Neeraj Chopra उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने जैवलिन कोच Naval Singh के खिलाफ Sports Authority of India (साई) में शिकायत दर्ज कराई है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत के दो प्रमुख एथलीट्स—ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा और पैरा एथलीट सुमित अंतिल—ने जैवलिन थ्रो कोच नवल सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। दोनों खिलाड़ियों ने कोच पर नशे की हालत में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और एथलीट्स के मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले ने भारतीय एथलेटिक्स जगत में हलचल मचा दी है और खेल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
SAI में दर्ज हुई आधिकारिक शिकायत
सूत्रों के अनुसार, यह शिकायत 10 अप्रैल को लिखित रूप में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा, इस मामले की जानकारी पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया को भी दी गई है। शिकायत में कहा गया है कि कोच नवल सिंह द्वारा न केवल एथलीट्स के साथ अनुचित व्यवहार किया गया, बल्कि उनके परिवारों को भी अपमानजनक संदेशों और टिप्पणियों के जरिए निशाना बनाया गया।
नीरज चोपड़ा का गंभीर बयान
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नीरज चोपड़ा ने अपने बयान में कहा कि उनके, उनके परिवार और साथी खिलाड़ियों के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जो खेल भावना और मानवीय गरिमा के खिलाफ है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि यह व्यवहार “बुनियादी शालीनता और प्रोफेशनलिज्म की सभी सीमाओं को पार कर चुका है”। उन्होंने इस मामले में तुरंत और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। नीरज, जो भारत के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं, ने इस घटना को बेहद निराशाजनक और हैरान करने वाला बताया।
सुमित अंतिल के आरोप
पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट सुमित अंतिल ने भी कोच नवल सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कोच शराब के नशे में एथलीट्स को अपमानजनक संदेश भेजते हैं और गाली-गलौज करते हैं। अंतिल ने कहा कि कोच न केवल उन्हें बल्कि अन्य खिलाड़ियों और उनके परिवारों को भी इस व्यवहार में शामिल करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रतियोगिताओं से पहले दबाव बनाने और मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश की जाती है।
समझौते की कोशिश पर भी उठे सवाल
सुमित अंतिल ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी SAI के अधिकारियों और TOPS (Target Olympic Podium Scheme) के अधिकारियों को दी थी। लेकिन शुरुआत में मामले को सुलझाने के लिए समझौते की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार वह चुप नहीं रहेंगे और मामले को आगे बढ़ाएंगे, क्योंकि ऐसे कई अन्य एथलीट्स भी हैं जो इसी तरह की परिस्थितियों से गुजर रहे हैं लेकिन सामने नहीं आ रहे हैं।
इस विवाद ने भारतीय खेल प्रशासन में कोचिंग सिस्टम और एथलीट सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या खिलाड़ियों को मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा मिल पा रही है या नहीं।










