जमशेदपुर के सोनारी इलाके में बिंदल मॉल फायरिंग के बाद पुलिस मुठभेड़ में दो आरोपितों मोहन यादव और अजीत मंडल के घायल होने के साथ करीब एक दशक पुराना अमित राय हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस रिकॉर्ड और अदालत में चले पुराने मामले के अनुसार, दोनों के नाम अमित राय हत्याकांड से जुड़े थे। इस मामले में मोहन यादव को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अजीत मंडल को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया था। अब बिंदल मॉल गोलीकांड में दोनों के नाम सामने आने और उसके बाद पुलिस मुठभेड़ में घायल होने से जमशेदपुर के पुराने आपराधिक घटनाक्रम की कड़ियां फिर जांच के केंद्र में आ गई हैं।
अमित राय की हत्या 6 दिसंबर 2016 को सोनारी स्थित शिवगंगा अपार्टमेंट के पास दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी। यह वारदात उस समय जमशेदपुर के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हुई थी। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया था और जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपितों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। पुलिस की कार्रवाई के दौरान अजीत मंडल का नाम भी सामने आया था और उसके पास से पिस्तौल बरामद होने का दावा किया गया था। हालांकि बाद में अदालत में उसके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके और उसे बरी कर दिया गया।
अमित राय हत्याकांड की सुनवाई के बाद 30 जुलाई 2018 को अदालत ने मोहन यादव समेत चार आरोपितों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। अगले दिन अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस तरह मोहन यादव के खिलाफ अमित राय की हत्या का मामला अदालत में साबित हुआ और उसे उम्रकैद मिली। दूसरी तरफ अजीत मंडल को अभियोजन पक्ष के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाने के कारण राहत मिल गई। यही वजह है कि पुराने मामले में दोनों की कानूनी स्थिति अलग रही—एक को दोषी ठहराकर उम्रकैद हुई और दूसरा बरी हो गया।
अब 2026 में बिंदल मॉल फायरिंग की घटना ने इस पुराने मामले को फिर सामने ला दिया है। सोनारी के मरीन ड्राइव स्थित बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट में 24 सितंबर को गोलीबारी की घटना हुई थी। इस घटना में चार लोग घायल हुए थे। पुलिस जांच में मोहन यादव और अजीत मंडल के नाम प्रमुख आरोपितों के रूप में सामने आए। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की। बाद में दोनों को गिरफ्तार किया गया और हथियार बरामदगी के लिए पुलिस टीम उन्हें मरीन ड्राइव के जंगल क्षेत्र में लेकर गई।
पुलिस के अनुसार, हथियार बरामदगी के दौरान दोनों आरोपितों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया और फायरिंग की कोशिश की। इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैर में गोली लगी। दोनों को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटनास्थल से पुलिस ने दो पिस्टल बरामद किए जाने की जानकारी दी है। हालांकि मुठभेड़ के पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
बिंदल मॉल फायरिंग मामले की जांच अब केवल गोली चलाने वाले कथित शूटरों तक सीमित नहीं है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि वारदात के पीछे किसका हाथ था, हथियार कहां से आए और घटना को अंजाम देने के लिए आरोपितों को किस स्तर पर मदद मिली। सितंबर के अंत में पुलिस ने मोहन यादव समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि रौनक शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पुलिस की विशेष जांच टीम हथियार सप्लायरों और वारदात की साजिश से जुड़े संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।
बिंदल मॉल गोलीकांड की जांच में पुलिस पुराने आपराधिक मामलों को भी खंगाल रही है। इसी क्रम में अमित राय हत्याकांड का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो गया है। पुलिस के लिए यह जानना जरूरी है कि पुराने मामले में एक-दूसरे के साथ जुड़े रहे या नाम सामने आए लोगों के वर्तमान आपराधिक नेटवर्क में क्या संबंध हैं और क्या वर्षों बाद किसी पुरानी रंजिश या आपराधिक संपर्क का कोई प्रभाव मौजूदा घटना में दिखाई देता है। हालांकि किसी पुराने मामले में नाम आना अपने आप में मौजूदा वारदात में दोष साबित नहीं करता। मौजूदा मामले में आरोप और भूमिका जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही तय होगी।
बिंदल मॉल फायरिंग को लेकर पुलिस जमीन कारोबार, ठेकेदारी और आपराधिक वर्चस्व जैसे पहलुओं को भी जांच के दायरे में रख रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस पुराने गिरोहों के बदलते समीकरणों और अलग-अलग आपराधिक नेटवर्क के बीच बने रिश्तों की भी पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि बीते वर्षों में अपराध जगत से जुड़े लोगों के संबंध किस तरह बदले और किन विवादों के कारण अलग-अलग गुटों के बीच तनाव पैदा हुआ।
बिंदल मॉल मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि गोलीबारी किसी सुनसान स्थान पर नहीं बल्कि सोनारी के मरीन ड्राइव क्षेत्र में स्थित रेस्टोरेंट में हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, रेस्टोरेंट में 11 राउंड तक फायरिंग की बात सामने आई थी और चार लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने आरोपितों की तलाश तेज की तथा तीन प्रमुख शूटरों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। जांच का दायरा बढ़ते हुए हथियारों की बरामदगी और कथित साजिशकर्ताओं तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ा।
इसी मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ से कुछ आरोपितों को गिरफ्तार कर जमशेदपुर लाकर पूछताछ भी की। पुलिस की जांच में मनोज सरकार, टीटू शर्मा और अन्य पुराने आपराधिक नेटवर्क से जुड़े नाम सामने आए हैं। इन लोगों के पुराने मामलों और आपसी संपर्कों को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिंदल मॉल की घटना किसी व्यक्तिगत विवाद का परिणाम थी या इसके पीछे शहर में आपराधिक वर्चस्व, जमीन और ठेकेदारी से जुड़े व्यापक समीकरण काम कर रहे थे।
अमित राय हत्याकांड के पुराने रिकॉर्ड में भी कई आरोपितों के नाम सामने आए थे। 2018 में अदालत ने मोहन यादव, सुधीर दुबे, कन्हैया सिंह और संजीव गोराई को हत्या के मामले में दोषी माना था और सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अजीत मंडल के मामले में स्थिति अलग रही और साक्ष्य के अभाव में उसे बरी कर दिया गया। इस पुराने फैसले का उल्लेख अब इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि बिंदल मॉल फायरिंग के बाद पुलिस कार्रवाई में मोहन और अजीत दोनों एक साथ फिर सामने आए हैं।
पुराने और नए मामलों को जोड़कर देखने से जमशेदपुर के अपराध जगत में कई वर्षों के दौरान बदलते समीकरणों की तस्वीर सामने आती है। हालांकि जांच एजेंसियों के लिए यह भी जरूरी है कि अलग-अलग मामलों के तथ्यों को स्वतंत्र रूप से देखा जाए। अमित राय हत्याकांड का फैसला अदालत पहले ही कर चुकी है, जबकि बिंदल मॉल फायरिंग का मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौर में है। इसलिए दोनों मामलों के बीच किसी सीधी आपराधिक कड़ी को अंतिम रूप से तभी माना जा सकता है जब जांच में उसके ठोस साक्ष्य सामने आएं।
बिंदल मॉल फायरिंग के बाद पुलिस ने जिन आरोपितों को पकड़ा, उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की समीक्षा भी की जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि सिर्फ वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद करने तक जांच सीमित न रहे, बल्कि गोलीबारी की पूरी योजना और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आए। हथियार किसने उपलब्ध कराए, आरोपित घटना स्थल तक कैसे पहुंचे, गोलीबारी का वास्तविक निशाना कौन था और घटना के पीछे क्या मकसद था—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में अमित राय हत्याकांड का फिर चर्चा में आना इसलिए भी अहम है क्योंकि 2016 की हत्या और 2026 की बिंदल मॉल फायरिंग के बीच लगभग दस साल का अंतर है। इतने लंबे अंतराल के बाद पुराने मामले से जुड़े नामों का एक नई गंभीर आपराधिक घटना में सामने आना पुलिस के लिए भी महत्वपूर्ण जांच बिंदु है। हालांकि दोनों घटनाओं के बीच वास्तविक संबंध और किसी पुरानी रंजिश की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस मुठभेड़ के बाद मोहन यादव और अजीत मंडल का इलाज कराया गया है। दोनों के खिलाफ बिंदल मॉल फायरिंग मामले में दर्ज आरोपों और बरामद हथियारों को लेकर आगे कानूनी प्रक्रिया चलेगी। पुलिस की ओर से हथियारों की बरामदगी, फायरिंग और मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
जमशेदपुर पुलिस के लिए अब चुनौती इस मामले की पूरी कड़ी को सामने लाने की है। बिंदल मॉल गोलीकांड में घायल लोगों के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, हथियारों की जांच, आरोपितों से पूछताछ और उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को मिलाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही पुलिस यह भी देख रही है कि क्या इस घटना के पीछे किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क की भूमिका है।
अमित राय हत्याकांड की कहानी इसलिए फिर सामने आई है क्योंकि उस पुराने मामले में एक ही घटनाक्रम से जुड़े दो नाम अब एक नई बड़ी आपराधिक जांच में सामने आए हैं। 2016 की हत्या में मोहन यादव को अदालत से उम्रकैद की सजा मिली थी, जबकि अजीत मंडल साक्ष्य के अभाव में बरी हुआ था। 2026 में बिंदल मॉल फायरिंग के बाद दोनों के नाम फिर चर्चा में हैं और पुलिस मुठभेड़ में दोनों के घायल होने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब आने वाले दिनों में पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि बिंदल मॉल फायरिंग के पीछे वास्तविक साजिश क्या थी और इस मामले की कड़ियां शहर के पुराने आपराधिक नेटवर्क से किस हद तक जुड़ी हुई हैं।










