जसपाल राणा की सबसे बड़ी पहचान बनी पौंधा शूटिंग रेंज, जहां तैयार हुए कई चैंपियन

देहरादून की पौंधा शूटिंग रेंज जसपाल राणा की अमिट विरासत है। यहां से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज तैयार हुए और देश का नाम रोशन किया।

भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा के निधन के बाद उनकी पौंधा स्थित शूटिंग रेंज एक बार फिर चर्चा में है। इस रेंज ने देश के कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाजों को प्रशिक्षण देकर खेल जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

Dehradun: भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज Jaspal Rana के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। उनके योगदान की चर्चा के बीच देहरादून के पौंधा क्षेत्र में स्थित शूटिंग रेंज को उनकी सबसे बड़ी विरासत माना जा रहा है। यह वही केंद्र है जहां उन्होंने युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देने का सपना साकार किया था।

पौंधा की शूटिंग रेंज बनी जसपाल राणा की अमिट विरासत

भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले जसपाल राणा का नाम देश के महान खिलाड़ियों में लिया जाता है। उनके निधन के बाद खेल जगत उनके योगदान को याद कर रहा है। हालांकि उनकी सबसे बड़ी विरासत केवल उनके पदक और उपलब्धियां नहीं, बल्कि देहरादून के पौंधा-मझौन क्षेत्र में स्थापित वह शूटिंग रेंज है, जिसने देश के सैकड़ों युवा निशानेबाजों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। यह रेंज आज भी उनके विजन, समर्पण और खेल के प्रति जुनून की गवाही देती है।

युवा खिलाड़ियों के लिए बनाया था आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र

जसपाल राणा ने वर्ष 2002 के आसपास राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य था कि उत्तराखंड और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने ऐसी सुविधा विकसित की, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण, अभ्यास और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके। उस समय उत्तराखंड में इस स्तर की खेल सुविधा बहुत कम थी, इसलिए यह रेंज युवा खिलाड़ियों के लिए उम्मीद का बड़ा केंद्र बनकर उभरी।

कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज हुए तैयार

पौंधा की इस शूटिंग रेंज में वर्षों से अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने अभ्यास किया। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश का नाम रोशन किया। जसपाल राणा स्वयं समय निकालकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते थे और अपने अनुभव साझा करते थे। उनकी कोचिंग शैली तकनीकी ज्ञान के साथ मानसिक मजबूती पर भी आधारित थी, जिससे खिलाड़ियों को प्रतियोगी दबाव का सामना करने में मदद मिलती थी।

प्रतिभा को पहचानने में रखते थे विश्वास

जसपाल राणा का मानना था कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। वे अक्सर कहते थे कि गांवों और छोटे कस्बों में भी असाधारण क्षमता वाले खिलाड़ी मौजूद हैं, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की होती है। इसी सोच के कारण उन्होंने अपनी शूटिंग रेंज को केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि प्रतिभा निखारने के मंच के रूप में विकसित किया। उनके इस प्रयास का लाभ उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों को मिला।

मनु भाकर समेत कई खिलाड़ियों को मिला मार्गदर्शन

जसपाल राणा ने अपने करियर में अनेक युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षित किया। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। ओलंपिक और विश्व स्तर पर प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ियों को भी उन्होंने तकनीकी सलाह और प्रशिक्षण प्रदान किया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी कोचिंग और अनुभव ने भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी रेंज

देहरादून की यह शूटिंग रेंज आज केवल एक खेल परिसर नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है। जसपाल राणा के निधन के बाद यहां से जुड़ी यादें और उनके सपने लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी यह रेंज नई प्रतिभाओं को तैयार करती रहेगी और हर सफल निशानेबाज में जसपाल राणा की सोच और मेहनत की झलक दिखाई देगी। उनकी यह विरासत भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।

Leave a comment