मुख्य सचिव के आदेश के बावजूद DRDA में जमे पुराने कर्मी, ट्रेजरी घोटाले के बाद भी नहीं हुआ तबादला

मुख्य सचिव के निर्देश के बावजूद झारखंड के कई DRDA में तीन साल से जमे कर्मियों का तबादला नहीं हुआ। ट्रेजरी घोटाले के बाद जारी आदेश पर अब भी कार्रवाई अधूरी है।

झारखंड में मुख्य सचिव के निर्देश के बावजूद कई जिलों के DRDA में तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कर्मियों का तबादला नहीं हुआ है। ट्रेजरी घोटाले के बाद जारी आदेश का कई स्थानों पर अब भी पालन नहीं किया गया है।

 रांची: झारखंड DRDA में मुख्य सचिव के तबादला संबंधी निर्देशों के बावजूद कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। ट्रेजरी घोटाले के बाद तीन वर्ष से अधिक समय से पदस्थ कर्मियों को हटाने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन कई जिलों में अब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

आदेश के बावजूद कई जिलों में नहीं बदले गए कर्मचारी

मुख्य सचिव के आदेश के बावजूद DRDA में जमे पुराने कर्मी, ट्रेजरी घोटाले के बाद भी नहीं हुआ तबादला

मुख्य सचिव के निर्देश के बावजूद झारखंड के विभिन्न जिलों में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) के कई कर्मचारी तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पद और स्थान पर कार्यरत हैं। ट्रेजरी घोटाले के बाद सरकार ने लंबे समय से जमे कर्मियों का तबादला कर उनकी जगह नए कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए थे, लेकिन कई जिलों में इस आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

ट्रेजरी घोटाले के बाद जारी हुए थे सख्त निर्देश

हाल में सामने आए ट्रेजरी और वेतन घोटाले के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ाई थी। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया था कि तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मियों का स्थानांतरण किया जाए, ताकि वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक जोखिम को कम किया जा सके।

कुछ विभागों ने इन निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों के तबादले किए, लेकिन ग्रामीण विकास विभाग के अधीन आने वाले कई DRDA कार्यालयों में अब भी बड़ी संख्या में पुराने कर्मचारी कार्यरत बताए जा रहे हैं।

ग्रामीण विकास विभाग में सबसे अधिक अनदेखी के आरोप

सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग के अधीन कई जिलों में ऐसे कर्मचारियों की संख्या अधिक है, जिनका लंबे समय से स्थानांतरण नहीं किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर माना जा रहा है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से सरकार ने समय-समय पर स्थानांतरण नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए थे।

अधिकारियों का कहना है कि जिन विभागों में आदेशों का पालन नहीं हुआ है, वहां समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

वेतन घोटाले की जांच जारी, 17 गिरफ्तारियां हो चुकीं

राज्य में सामने आए वेतन और ट्रेजरी घोटाले के मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। सीआईडी की जांच के आधार पर अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी पूरे राज्य में वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती बरतने के निर्देश दे चुके हैं।

सरकार का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाना और वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगाना है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिन विभागों में मुख्य सचिव के आदेश का पालन नहीं हुआ है, वहां प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।

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