झारखंड में लगातार बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। खरकई, सुवर्णरेखा और सोन नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट है। कई घरों में पानी घुसा, खेतों को नुकसान हुआ और पुलों पर पानी बह रहा है।
रांची: झारखंड में लगातार हो रही बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। राजधानी रांची समेत 15 से अधिक जिलों में पिछले करीब 30 घंटे से रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। कई स्थानों पर तेज बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गई हैं, निचले इलाकों में पानी भर गया है और कुछ जगहों पर पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बह रहा है। कोल्हान प्रमंडल में स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील बनी हुई है। जमशेदपुर, चाईबासा और चक्रधरपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खरकई और सुवर्णरेखा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
दूसरी ओर पलामू जिले में सोन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया है। कई गांवों में माइकिंग के जरिए लोगों को नदी से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
खरकई और सुवर्णरेखा का जलस्तर बढ़ा
सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के जिला नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार खरकई और सुवर्णरेखा नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर पर बना रह सकता है। लगातार बारिश और विभिन्न जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण नदियों में पानी का दबाव बढ़ा है।
खरकई नदी पर बने गाजिया बैराज के सभी 14 फाटक खोले गए हैं। प्रत्येक फाटक को करीब 15 मीटर तक खोला गया है और यहां से लगभग 2,266 क्यूमेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा मयूरभंज के ब्यांगविल डैम से दो फाटकों के जरिए करीब 70 क्यूमेक तथा खरकई डैम से एक फाटक के जरिए करीब 20 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।
सुवर्णरेखा नदी पर बने चांडिल डैम के भी 18 गेट खोले गए हैं। यहां से करीब 737.72 क्यूमेक पानी नीचे की ओर छोड़ा जा रहा है। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सोन नदी में उफान, तटीय गांवों में अलर्ट
पलामू जिले में लगातार बारिश के साथ ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सोन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हुसैनाबाद अनुमंडल के मोहम्मदगंज से दंगवार तक नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है।
लोगों को नदी में जाने से रोक दिया गया है। ग्रामीणों को अपने परिवार के सदस्यों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी जा रही है। संवेदनशील गांवों में माइकिंग कर लोगों को संभावित बाढ़ और कटाव के खतरे के बारे में जानकारी दी जा रही है।
प्रशासन ने अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। नाविकों को भी सावधानी बरतने और नदी में अनावश्यक गतिविधियों से बचने को कहा गया है।
इंद्रपुरी और बाणसागर से छोड़ा गया पानी
जल संसाधन विभाग के अनुसार इंद्रपुरी बराज से सोमवार शाम करीब 1.60 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके अलावा बाणसागर जलाशय से रविवार रात करीब 1.57 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
इसका असर सोन नदी के जलस्तर पर पड़ रहा है। भजनीयां, कोल्हुआ, बिहरा, पंसा, बरडीहा, अधौरा, रानीदेवा, परता, सजवन, सनपुरवा, देवरी, बुधुआ और दंगवार समेत कई गांवों में लोगों के बीच चिंता बनी हुई है।
नदी के किनारे कटाव बढ़ने से घरों और कृषि भूमि को नुकसान का खतरा है। प्रशासन ने सोन डीला और नदी के बीच स्थित टापुओं को खाली कराने का निर्देश दिया है, ताकि जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
गिरिडीह में घरों तक पहुंचा नाली का पानी
लगातार बारिश का असर गिरिडीह में भी दिखाई दे रहा है। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 11 स्थित सिहोडीह पटेल नगर में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण नाली का गंदा पानी सड़क पर जमा हो गया है।
कई घरों में पानी घुसने की स्थिति बन गई है। इससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण बगोदर क्षेत्र की कई नदियां भी उफान पर हैं और तालाबों का जलस्तर काफी बढ़ गया है।
बेको बोन बांध तालाब का पैन टूटने के बाद पानी आसपास के खेतों में पहुंच गया। इससे एक किसान के छह खेतों में लगी धान की फसल पानी में बह गई। अन्य स्थानों पर भी जलाशयों की मेढ़ टूटने से खेतों में पानी भरने और फसलों को नुकसान की सूचना है।
बगोदर में घरों और बाजारों में घुसा पानी
बगोदर बाजार और नीचे बाजार के कई हिस्सों में बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया। नीचे बाजार निवासी सुखदेव यादव के घर में पानी घुसने से खाद्य सामग्री और अन्य घरेलू सामान खराब होने की जानकारी सामने आई है।
लोग पानी निकालने के लिए मोटर पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं। लगातार बारिश के कारण स्थानीय प्रशासन के सामने जल निकासी की चुनौती बनी हुई है।
डुमरी प्रखंड के आईबीपी घुजाडीह क्षेत्र में नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा है। इससे पुल से गुजरने वाले लोगों को परेशानी हो रही है और आवागमन प्रभावित हुआ है।
कोडरमा में पुल के ऊपर बह रहा नदी का पानी
कोडरमा जिले में भी पिछले दो दिनों से बारिश का दौर जारी है। इसके कारण नदियों, तालाबों और डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
चंदवारा प्रखंड में गौरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पानी पुल के ऊपर से बहने लगा। ऐसे स्थानों पर प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवागमन बनाए रखना है।
पानी का बहाव तेज होने की स्थिति में छोटे पुलों और निचले मार्गों पर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों से ऐसे रास्तों पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की जा रही है।
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से सक्रिय हुआ मानसून
मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में बारिश बढ़ने के पीछे बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र की भूमिका है।
इसके अलावा सक्रिय मानसूनी गर्त और चक्रवाती परिसंचरण के कारण राज्य में नमी का प्रवाह बढ़ा है। बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण वातावरण में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है।
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मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। सिस्टम के प्रभाव से अलग-अलग जिलों में बारिश की तीव्रता में बदलाव हो सकता है।
रांची में भी दिनभर होती रही बारिश
राजधानी रांची में सोमवार को दिनभर रुक-रुककर बारिश हुई। शहर में करीब 13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार 2 सितंबर को सिस्टम का असर मुख्य रूप से राज्य के पश्चिमी जिलों में रहने की संभावना है।
2 सितंबर को गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
3 सितंबर को राज्य के कुछ हिस्सों में मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
4 से 6 सितंबर तक भी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार 4 सितंबर को राज्य में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और रांची समेत कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
5 और 6 सितंबर को भी आसमान में आंशिक बादल छाए रहने तथा कुछ इलाकों में गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद धीरे-धीरे मौसम सामान्य होने का अनुमान है।
गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग और प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
महुआडांड़ में 171 मिमी बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान झारखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 171 मिलीमीटर बारिश लातेहार जिले के महुआडांड़ में रिकॉर्ड की गई।
पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया में 112.2 मिलीमीटर, मझगांव में 95.4 मिलीमीटर, चाकुलिया में 92.4 मिलीमीटर और मुसाबनी में 80.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
सोमवार को बोकारो में 40 मिलीमीटर, लोहरदगा में 41 मिलीमीटर, जमशेदपुर में 39 मिलीमीटर और चाईबासा में 29.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
कुछ जिलों में बारिश की कमी भी
भारी बारिश के बावजूद झारखंड के सभी जिलों में मानसूनी स्थिति एक जैसी नहीं है। रांची, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
इसके विपरीत बोकारो में सामान्य से 52 प्रतिशत, देवघर और कोडरमा में 41 प्रतिशत, गढ़वा में 39 प्रतिशत, चतरा में 37 प्रतिशत और गिरिडीह में 35 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
इस तरह राज्य के कुछ हिस्सों में जहां अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बना हुआ है, वहीं कुछ जिलों में अब भी मानसूनी बारिश सामान्य से कम है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता नदी तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से नदी, नाले और तेज बहाव वाले जलस्रोतों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की जा रही है।








