Jharkhand SIR में विशेष जाति-निवास प्रमाणपत्र पर रोक, साहिबगंज में 2000 से ज्यादा दस्तावेज जारी

Jharkhand SIR के लिए साहिबगंज में 2000 से ज्यादा विशेष जाति-निवास प्रमाणपत्र जारी हुए। सीईओ की आपत्ति के बाद रोक लगी, दस्तावेजों का सत्यापन बाकी है।

झारखंड में SIR के लिए अलग से जाति और निवास प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी गई है। साहिबगंज में 2000 से अधिक प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, जिनका सत्यापन अब जिला निर्वाचन अधिकारी स्तर पर होना बाकी है।

साहिबगंज: मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी SIR के लिए अलग से बनाए जा रहे जाति और निवास प्रमाणपत्रों पर रोक लगा दी गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की आपत्ति के बाद साहिबगंज में यह प्रक्रिया बंद कर दी गई। जिले में अब तक 2000 से अधिक ऐसे प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं, जबकि सैकड़ों लोग SIR की सुनवाई में इनका इस्तेमाल भी कर चुके हैं।

Jharkhand SIR के लिए विशेष प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक

Jharkhand SIR में विशेष जाति-निवास प्रमाणपत्र पर रोक, साहिबगंज में 2000 से ज्यादा दस्तावेज जारी

झारखंड में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए विशेष तौर पर जाति और निवास प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की नाराजगी के बाद साहिबगंज जिले में इस तरह के प्रमाणपत्र बनाना बंद कर दिया गया है। जिले के अलग-अलग प्रखंडों में अब तक 2000 से ज्यादा ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।

सैकड़ों लोग SIR सुनवाई में कर चुके इस्तेमाल

इनमें से सैकड़ों प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल SIR की सुनवाई के दौरान किया जा चुका है। हालांकि, इन दस्तावेजों का जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त के स्तर से सत्यापन अभी बाकी है। अगर जांच में किसी प्रमाणपत्र को अमान्य पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति से दूसरा वैध प्रमाणपत्र मांगा जा सकता है।

बरहड़वा में जांच के दौरान खुला मामला

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार शनिवार को फर्जी दस्तावेज के आधार पर मतदाता बनने की कोशिश से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए साहिबगंज पहुंचे थे। जांच के दौरान उन्होंने चार मतदाताओं और दस्तावेज तैयार करने वाले कॉमन सर्विस सेंटर संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया।

इसी दौरान अधिकारियों के सामने यह बात आई कि बरहड़वा प्रखंड में केवल SIR के लिए जाति और निवास प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं। इस पर सीईओ ने अंचलाधिकारी को फटकार लगाई और सिर्फ SIR के उद्देश्य से इस तरह के प्रमाणपत्र जारी करने को गलत बताया। उन्होंने सीओ के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही।

जांच के बाद यह जानकारी भी सामने आई कि साहिबगंज के कई अन्य प्रखंडों में ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। बरहड़वा अंचल में जारी प्रमाणपत्रों पर SIR का उल्लेख नहीं है, लेकिन अंचल निरीक्षक की रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। वहीं राजमहल, उधवा समेत कुछ अन्य प्रखंडों में प्रमाणपत्र पर ही SIR लिखा गया है। बताया गया है कि इन दस्तावेजों की वैधता तीन महीने निर्धारित की गई थी और इनका इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए नहीं किया जा सकता।

ऑफलाइन प्रमाणपत्र के आदेश से बढ़ी प्रक्रिया

राज्य में SIR और राशन कार्ड से जुड़े कामों के चलते जाति और निवास प्रमाणपत्र के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी होने में लग रहे समय को देखते हुए राज्य सरकार ने पिछले दिनों ऑफलाइन प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था।

जिलों को भेजे गए आदेश के साथ प्रमाणपत्र का कोई निर्धारित फॉर्मेट नहीं था। इसके बाद अंचलाधिकारियों ने अपने स्तर पर प्रारूप तैयार किए और उसी आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए जाने लगे। यह प्रक्रिया केवल साहिबगंज तक सीमित नहीं थी, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी अपनाई जा रही थी।

सीईओ की आपत्ति के बाद अब इस प्रक्रिया और पहले जारी किए गए प्रमाणपत्रों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। साहिबगंज जिले में जाति प्रमाणपत्र के 86,942 और निवास प्रमाणपत्र के 80,417 ऑनलाइन आवेदन अभी लंबित हैं। इसके अलावा हजारों ऑफलाइन आवेदन भी प्राप्त हुए हैं। समय पर प्रमाणपत्र जारी नहीं होने की स्थिति में SIR प्रक्रिया के दौरान संबंधित आवेदकों के सामने मतदाता सूची में नाम को लेकर परेशानी बढ़ सकती है।

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