जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का आईपीओ 21 अक्टूबर से खुलने जा रहा है। पब्लिक इश्यू खुलने से पहले ही इसकी एंकर बुक को संस्थागत निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, 8,110 करोड़ रुपये की एंकर बुक को अपने निर्धारित आकार से 30 गुना से अधिक की बोलियां प्राप्त हुई हैं।
Jio Platforms IPO 2026: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर संस्थागत निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। 21 अक्टूबर 2026 से खुलने वाले इस आईपीओ से पहले एंकर बुक को उसके निर्धारित आकार से 30 गुना से अधिक बोलियां मिलने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 8,110 करोड़ रुपये के एंकर बुक के मुकाबले संस्थागत निवेशकों की कुल मांग लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस पेशकश में अंतरराष्ट्रीय एसेट मैनेजमेंट कंपनियों, सॉवरेन वेल्थ फंड, भारतीय म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है।
जियो आईपीओ से पहले संस्थागत निवेशकों का बड़ा दांव
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को भारतीय शेयर बाजार की बड़ी पेशकशों में से एक माना जा रहा है। एंकर बुक में मिली मजबूत मांग से संकेत मिलता है कि बड़े संस्थागत निवेशक कंपनी के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, एंकर बुक में मांग और आम निवेशकों के लिए खुलने वाले आईपीओ का सब्सक्रिप्शन अलग-अलग चरण हैं। इसलिए एंकर बुक की बोलियों को पूरे आईपीओ का अंतिम सब्सक्रिप्शन नहीं माना जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8,100 करोड़ रुपये से अधिक के एंकर बुक के लिए 30 गुना से ज्यादा मांग दर्ज की गई। यदि लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की संस्थागत मांग का आंकड़ा सही है, तो यह जियो प्लेटफॉर्म्स के इश्यू के प्रति निवेशकों की असाधारण दिलचस्पी को दर्शाता है। हालांकि, ये आंकड़े रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और अंतिम आवंटन तथा आधिकारिक विवरण से इनकी पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
BlackRock, Fidelity और दूसरे वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी
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जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में दुनिया की कई प्रमुख निवेश प्रबंधन कंपनियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें BlackRock, Capital Group, Fidelity Investments, T. Rowe Price, Schroders, JPMorgan Asset Management, Franklin Templeton, Invesco और Janus Henderson जैसे नाम शामिल हैं।
इन वैश्विक संस्थानों की भागीदारी से इस पेशकश को अंतरराष्ट्रीय निवेश समुदाय का ध्यान मिलने का संकेत मिलता है। बड़े एसेट मैनेजर आमतौर पर कंपनियों की कारोबारी स्थिति, बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा, वित्तीय संभावनाओं और मूल्यांकन जैसे पहलुओं पर विचार करते हैं। हालांकि, किसी संस्थागत निवेशक की बोली को कंपनी के शेयरों में भविष्य में निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता।
GIC, Norges Bank और ADIA जैसे फंड भी चर्चा में
रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंड और सरकारी निवेश संस्थानों ने भी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में रुचि दिखाई है। इनमें सिंगापुर का GIC, नॉर्वे का Norges Bank Investment Management, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) शामिल हैं। सॉवरेन वेल्थ फंड आम तौर पर लंबी अवधि के निवेश के लिए जाने जाते हैं और विभिन्न देशों तथा क्षेत्रों में निवेश के अवसर तलाशते हैं।
ऐसे निवेशकों की दिलचस्पी किसी बड़े आईपीओ की संस्थागत मांग को मजबूत बना सकती है। फिर भी, अंतिम निवेश और आवंटन से संबंधित जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
भारतीय म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की भी भागीदारी
घरेलू संस्थागत निवेशकों की ओर से भी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में मजबूत रुचि की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में SBI Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, HDFC Mutual Fund, Aditya Birla Sun Life Mutual Fund, Nippon India Mutual Fund और Kotak Mahindra Mutual Fund जैसे प्रमुख फंड हाउसों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा, भारतीय बीमा और पेंशन क्षेत्र से जुड़े संस्थानों की भागीदारी की भी जानकारी दी गई है। इनमें Life Insurance Corporation of India (LIC), HDFC Life, SBI Life, SBI Pension, HDFC Pension और ICICI Prudential जैसे नाम शामिल हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता भारतीय बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को दर्शा सकती है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि संस्थागत मांग और शेयर के भविष्य के प्रदर्शन के बीच सीधा या निश्चित संबंध नहीं होता।










