जम्मू में हत्या की कोशिश के बाद फारूक अब्दुल्ला का पहला रिएक्शन: बोले- ‘अल्लाह ने मुझे बचा लिया’

जम्मू में हत्या की कोशिश के बाद फारूक अब्दुल्ला का पहला रिएक्शन: बोले- ‘अल्लाह ने मुझे बचा लिया’

Farooq Abdullah, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और National Conference के अध्यक्ष, पर बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला हुआ। हमलावर ने पीछे से गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष Farooq Abdullah पर बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में फारूक अब्दुल्ला बाल-बाल बचे। घटना के बाद उन्होंने पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अल्लाह ने मुझे बचा लिया। घटना शहर के बाहरी इलाके ग्रेटर कैलाश, जम्मू में हुई। 

शादी समारोह के समाप्त होने के बाद जब फारूक अब्दुल्ला कार्यक्रम स्थल से निकल रहे थे, तभी कमल सिंह जामवाल नामक एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उन पर गोली चलाने का प्रयास किया। हालांकि गोली नहीं लगी और पूर्व मुख्यमंत्री सुरक्षित रहे। हमलावर को तुरंत पकड़ लिया गया।

फारूक अब्दुल्ला का बयान

हमले के बाद फारूक अब्दुल्ला ने शांत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह ईश्वर की कृपा थी कि वे सुरक्षित बच गए। उन्होंने मीडिया से कहा कि वे सुरक्षित हैं और फिलहाल किसी विस्तृत जानकारी का खुलासा नहीं करेंगे। फारूक ने इस घटना को अपने जीवन की अनुभवशाली यात्रा में एक चुनौतीपूर्ण घटना के रूप में लिया।

घटना के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah अपने पिता फारूक अब्दुल्ला से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि पिता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत लागू किया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

फारूक अब्दुल्ला पर हुए इस हमले ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा की और हमलावर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि फारूक अब्दुल्ला सुरक्षित हैं, यह जानकर राहत मिली। उन्होंने पुलिस से पूरी जांच करने की अपील की।

कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने इसे एक गंभीर सुरक्षा चूक बताया और कहा कि इस मामले की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि अनुभवी नेताओं के खिलाफ हिंसा बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है और उनकी लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर ने भी घटना की निंदा की और कहा कि यह चिंता का विषय है कि कोई लोडेड हथियार लेकर इतने करीब आ सका।

इस हमले ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक सुरक्षा और सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमजोरी पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख नेताओं की सुरक्षा के लिए पहले से और सख्त सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।

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