केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर SIR को लेकर लगाए गए आरोपों के जवाब में निशाना साधा। उन्होंने 13.39 करोड़ नामों के वर्गीकरण का हवाला देते हुए कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाए। खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया और विरोध के अधिकार पर चिंता जताई।
नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों पर पलटवार करते हुए उनसे कहा कि वे झूठ बोलना बंद करें। नड्डा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर मतदाता सूची में चिह्नित नामों के वर्गीकरण का विवरण दिया और कांग्रेस पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, खड़गे ने SIR को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय नागरिकों को घुसपैठिया बताने से उनकी पहचान और सम्मान पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। दोनों नेताओं के बयानों से मतदाता सूची के पुनरीक्षण और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
जेपी नड्डा ने SIR के आंकड़ों पर क्या कहा?
जेपी नड्डा ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने कभी 13.39 करोड़ भारतीयों को घुसपैठिया नहीं कहा। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाए गए नाम नहीं हैं, बल्कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणियों में चिह्नित किए गए हैं।
नड्डा ने इन श्रेणियों का विवरण देते हुए बताया कि 2.80 करोड़ नाम मृत व्यक्तियों के, 6.30 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों के, 3.01 करोड़ अनुपस्थित मतदाताओं के और 1.02 करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियों के रूप में चिह्नित हैं।
उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इन आंकड़ों को घुसपैठियों की संख्या बताना सही नहीं है। नड्डा का तर्क था कि ड्राफ्ट सूची में किसी नाम का चिह्नित होना और किसी व्यक्ति को विदेशी नागरिक या घुसपैठिया घोषित करना अलग-अलग बातें हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों की व्याख्या करते समय ड्राफ्ट सूची और अंतिम मतदाता सूची के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी नाम को किसी श्रेणी में चिह्नित किए जाने का अर्थ अपने आप में यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम निर्णय हो गया है।
नड्डा ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर उठाए सवाल
BJP नेता ने SIR को लेकर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP की लोकप्रियता को चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर खारिज करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा बताया।
नड्डा ने अपने बयान में गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में कांग्रेस पिछले 31 वर्षों से कोई चुनाव नहीं जीत पाई है, त्रिपुरा में 33 वर्षों से कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं बना और पश्चिम बंगाल में 54 वर्षों से पार्टी को जीत नहीं मिली।
इन दावों के जरिए नड्डा ने यह तर्क देने की कोशिश की कि कांग्रेस की चुनावी चुनौतियों को केवल SIR से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, पार्टी को अपने राजनीतिक प्रदर्शन और जनता के बीच समर्थन पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि, अलग-अलग राज्यों में चुनावी इतिहास, चुनाव के प्रकार और संबंधित अवधि को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। नड्डा के बयान में दिए गए आंकड़े उनके राजनीतिक तर्क का हिस्सा हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने चाहिए।
‘भ्रामक प्रचार से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता’
जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रामक प्रचार से जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों का जिक्र किया और दावा किया कि मतदाताओं ने कांग्रेस को चुनावों में नकारा है।
नड्डा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से अपील की कि वे SIR के बहाने भ्रम फैलाने के बजाय जनता का भरोसा जीतने का प्रयास करें। उन्होंने BJP और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रति जनता के समर्थन का दावा भी किया।
अपने बयान में नड्डा ने भविष्य के चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि NDA वर्ष 2029 में फिर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगा। उन्होंने कांग्रेस की संभावित चुनावी हार को लेकर भी टिप्पणी की।
ये टिप्पणियां BJP की राजनीतिक स्थिति और आगामी चुनावों को लेकर पार्टी के विश्वास को दर्शाती हैं। हालांकि, 2029 के आम चुनाव के परिणाम अभी भविष्य का विषय हैं और किसी भी दल की जीत या हार को पहले से निश्चित नहीं माना जा सकता।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या आरोप लगाए थे?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री के बयान में 13.3 करोड़ भारतीयों को घुसपैठिया बताए जाने से भारतीय नागरिकों का अपमान हुआ है।
खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विरोध प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में इस्तेमाल करने से जुड़े प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई ने लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चिंताएं पैदा की हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से सवाल पूछने वालों को हिरासत, पुलिस कार्रवाई और अन्य दबावों का सामना करना पड़ रहा है।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों की आवाज उठाने के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा। उनके बयान का मुख्य जोर चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता पर था।
इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और संस्थानों का पक्ष तथा उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है। राजनीतिक नेताओं के आरोप अपने आप में किसी कथित अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं होते।
SIR क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों, दोहराव तथा अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।
इस प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को चिह्नित किया जा सकता है। हालांकि, किसी नाम को चिह्नित करने और उसे अंतिम सूची से हटाने के बीच प्रक्रियागत अंतर होता है। संबंधित मतदाताओं को लागू नियमों के अनुसार अपनी जानकारी की पुष्टि या सुधार का अवसर मिल सकता है।
विवाद का प्रमुख बिंदु यह है कि मतदाता सूची की सफाई और चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया किस तरह लागू की जा रही है। जहां BJP इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने की कवायद बताती है, वहीं कांग्रेस ने इसके क्रियान्वयन और राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं।
इस मुद्दे पर निष्पक्ष आकलन के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों, पुनरीक्षण संबंधी नियमों और संबंधित राज्यों की अंतिम मतदाता सूचियों को देखना महत्वपूर्ण है।
आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव
SIR को लेकर जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बयानबाजी ने BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेदों को फिर सामने ला दिया है। BJP ने कांग्रेस के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है, जबकि कांग्रेस ने मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए हैं।
आने वाले समय में इस विवाद का केंद्र चुनाव आयोग की प्रक्रिया, मतदाता सूची के आंकड़ों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर रह सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी, निष्पक्ष और स्पष्ट है। राजनीतिक आरोपों से अलग, आधिकारिक आंकड़ों और लागू नियमों के आधार पर ही विवाद के विभिन्न पहलुओं का सही आकलन किया जा सकता है।








