जस्टिस बीवी नागरत्ना का बार काउंसिल को संदेश, कहा- 'वकील देश के लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व'

Justice BV Nagarathna ने बार काउंसिल को संबोधित करते हुए वकीलों को लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’ बताया। उन्होंने कानूनी पेशे की भूमिका और संवैधानिक मूल्यों की

सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बार काउंसिल की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर आत्ममंथन की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय और राज्य स्तर की बार काउंसिल को पेशेवर नैतिकता, मर्यादा और दक्षता बनाए रखने में अपनी भूमिका पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बार काउंसिल की भूमिका, पेशेवर जिम्मेदारियों और वकीलों के सम्मान को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि देश की बार काउंसिलों को अपने कामकाज और जिम्मेदारियों पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर बार काउंसिल को अपने ही सदस्यों का सम्मान और भरोसा हासिल नहीं है, तो यह पूरे कानूनी पेशे के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

जस्टिस नागरत्ना ने यह बात शनिवार को दिल्ली स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 13वें दीक्षांत समारोह में कही। अपने संबोधन में उन्होंने संवैधानिक लोकतंत्र में स्वतंत्र बार की अहमियत पर जोर दिया और वकीलों से लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संविधान के मूल्यों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

बार काउंसिल को अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि बार काउंसिलों को यह समझने की जरूरत है कि कानूनी व्यवस्था में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र और राज्यों की बार काउंसिलों से पेशेवर नैतिकता, दक्षता और जवाबदेही के मानकों को बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, बार केवल अदालतों में मुकदमे लड़ने तक सीमित संस्था नहीं है। यह आम लोगों को न्याय दिलाने, कानून के शासन को मजबूत करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए बार काउंसिलों को अपने निर्णयों और कार्यप्रणाली का समय-समय पर मूल्यांकन करना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वकीलों और बार संस्थाओं के बीच विश्वास मजबूत होना जरूरी है। यदि किसी संस्था को उसके अपने सदस्यों का सम्मान नहीं मिलता, तो इससे कानूनी पेशे की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

वकीलों को बताया संविधान के मूल्यों का मशाल वाहक

जस्टिस बीवी नागरत्ना का बार काउंसिल को संदेश, कहा- 'वकील देश के लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व'

जस्टिस नागरत्ना ने अपने संबोधन में वकीलों की जिम्मेदारी को व्यापक संवैधानिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि देश के वकील संविधान के मूल्यों के मशाल वाहक हैं। उन्होंने उन्हें लोकतंत्र का 'सेफ्टी वॉल्व' बताते हुए भरोसा कायम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि बार की कमियां या पेशेवर स्तर पर होने वाली गंभीर गलतियां केवल कानूनी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहतीं। 

इनका असर देश के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में वकीलों और बार संस्थाओं से उच्च स्तर की पेशेवर जिम्मेदारी और नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है।

NALSAR विवाद के बीच आई टिप्पणी

जस्टिस नागरत्ना की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़ा एक विवाद चर्चा में रहा है। मामला 2026 के दीक्षांत समारोह से जुड़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था। इसके बाद 13 अगस्त को बीसीआई ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि 2026 में स्नातक होने वाले छात्रों का वकील के रूप में पंजीकरण न किया जाए।

हालांकि, बीसीआई ने बाद में अपना निर्देश वापस ले लिया। परिषद के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने भी छात्रों से माफी मांगी। इसके बाद इस मामले ने बार काउंसिल की भूमिका और विश्वविद्यालय के छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर बहस को जन्म दिया।

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