भारत के 75 साल से अधिक लंबे न्यायिक इतिहास में अब तक कोई महिला सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश यानी CJI नहीं बनी है। हालांकि, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के CJI बनने के साथ यह इतिहास बदलने की प्रबल संभावना है।
Justice B.V. Nagarathna: भारत के न्यायिक इतिहास में 2027 एक ऐतिहासिक साल साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा वरिष्ठता व्यवस्था के अनुसार जस्टिस बी.वी. नागरत्ना भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश यानी Chief Justice of India (CJI) बन सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह देश की सर्वोच्च अदालत के 75 साल से अधिक पुराने इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का जन्म 30 अक्टूबर 1962 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जीसस एंड मैरी कॉलेज से इतिहास में बीए ऑनर्स किया और 1987 में कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने वकालत शुरू की। उनके कानूनी अनुभव में संवैधानिक, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और पारिवारिक कानून जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।
पिता भी रह चुके हैं भारत के CJI
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की न्यायिक विरासत भी बेहद खास है। उनके पिता जस्टिस ई.एस. वेंकटरमैया भी भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार जस्टिस वेंकटरमैया ने 19 जून 1989 को CJI का पद संभाला था और 17 दिसंबर 1989 को सेवानिवृत्त हुए। ऐसे में अगर जस्टिस नागरत्ना 2027 में CJI बनती हैं, तो यह भारतीय न्यायपालिका में एक असाधारण पारिवारिक विरासत का उदाहरण होगा—एक ही परिवार से पिता और बेटी दोनों का देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था का नेतृत्व करना।
2027 में क्यों बन सकती हैं पहली महिला CJI?
भारत में CJI की नियुक्ति के लिए परंपरागत रूप से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश को प्राथमिकता दी जाती है। मौजूदा आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे, जबकि जस्टिस विक्रम नाथ 23 सितंबर 2027 को पद छोड़ेंगे। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की सेवानिवृत्ति 29 अक्टूबर 2027 को निर्धारित है।
इसी वरिष्ठता क्रम के चलते जस्टिस नागरत्ना के सितंबर 2027 के आसपास CJI बनने की संभावना बनती है। हालांकि उनका कार्यकाल बहुत छोटा होगा और उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति तक लगभग एक महीने से कुछ अधिक समय ही बचेगा।
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नोटबंदी पर अलग राय से मिली खास पहचान
जस्टिस नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट में अपने कई महत्वपूर्ण और असहमतिपूर्ण फैसलों के लिए भी जानी जाती हैं। 2016 की नोटबंदी से जुड़े मामले में पांच जजों की संविधान पीठ ने 2023 में फैसला सुनाया था। बहुमत ने केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने अलग राय व्यक्त की थी। उनका मत था कि इतनी बड़ी मात्रा में मुद्रा को चलन से बाहर करने का निर्णय संसद के कानून के जरिए लिया जाना चाहिए था। उनकी यह असहमति भारतीय संवैधानिक कानून और संसद की भूमिका से जुड़े व्यापक सवालों के कारण काफी चर्चा में रही।
खनिज रॉयल्टी मामले में भी दी अलग राय
2024 में खनिज क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जस्टिस नागरत्ना ने नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के बहुमत से अलग फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने इस मामले में अलग यानी dissenting judgment सुनाया था। उनके कई फैसलों में संविधान, संघीय ढांचे, प्रशासनिक कानून और नागरिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर उनका स्वतंत्र कानूनी दृष्टिकोण देखने को मिलता है।
भ्रष्टाचार मामले में भी निभाई अहम भूमिका
Neeraj Dutta v. State (NCT of Delhi) मामले में जस्टिस नागरत्ना संविधान पीठ का हिस्सा थीं। इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों और रिश्वतखोरी से जुड़े कानूनी मानकों पर महत्वपूर्ण व्याख्या सामने आई। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में जस्टिस नागरत्ना द्वारा भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 7 के तहत अपराध के आवश्यक तत्वों को स्पष्ट किए जाने का उल्लेख है।
भारत के सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की मौजूदगी अब पहले की तुलना में बढ़ी है, लेकिन देश को अब तक कोई महिला CJI नहीं मिली है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का संभावित कार्यकाल इसलिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।









