चंडीगढ़ के CA रचित गोयल और उनके 20 साथी कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल में आई बाढ़ के संकट से सुरक्षित बच गए। एक साथी की तबीयत खराब होने से दल ने चढ़ाई एक दिन टाल दी थी।
चंडीगढ: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए सेक्टर-19 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट रचित गोयल और उनके 20 साथी नेपाल में आई बाढ़ के दौरान सुरक्षित रहे। यात्रा के दौरान एक सदस्य को ऊंचाई पर सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके चलते दल ने कैलाश पर्वत की चढ़ाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी। बाद में उन्हें पता चला कि जिस दिन वे रुके थे, उसी दौरान बड़ा हादसा हुआ था।
कैलाश यात्रा के दौरान टल गई चढ़ाई
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले चंडीगढ़ के सेक्टर-19 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट रचित गोयल और उनके 20 दोस्तों के लिए यह यात्रा जीवन का ऐसा अनुभव बन गई, जिसे वे लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। नेपाल में बाढ़ के कारण पैदा हुए संकट के बीच उनका दल सुरक्षित रहा।
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यात्रा के दौरान दल के एक सदस्य की अचानक तबीयत खराब हो गई। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत ऐसी थी कि वह आगे चलने की स्थिति में नहीं था। साथी की तबीयत को देखते हुए दल ने कैलाश पर्वत की ओर अपनी चढ़ाई को एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया।
उस समय यह फैसला केवल साथी की सेहत को देखते हुए लिया गया था। हालांकि, बाद में सामने आई घटनाओं ने इस एक दिन की देरी को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया।
जिस दिन रुके, उसी दौरान हुआ बड़ा हादसा
रचित गोयल के मुताबिक, बाद में उन्हें जानकारी मिली कि जिस दिन उनके दल ने चढ़ाई स्थगित की थी, उसी दौरान नेपाल में बड़ा हादसा हुआ। उनके दल के 12 सदस्य कैलाश पर्वत की ओर बढ़ रहे थे, जबकि रचित और कुछ अन्य साथी बीमार सदस्य के साथ पीछे रुक गए थे।
अगर तबीयत खराब होने के कारण चढ़ाई स्थगित नहीं होती, तो उनका दल भी उसी समय उस इलाके में मौजूद होता। रचित का कहना है कि उस स्थिति में उनके सामने गंभीर मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं।
घटना के दौरान नेपाल में बाढ़ के कारण हालात काफी चुनौतीपूर्ण बताए गए। ऐसे में यात्रा कार्यक्रम में आया महज एक दिन का बदलाव उनके लिए सुरक्षा के लिहाज से अहम साबित हुआ।
रचित बताते हैं कि उस समय उनके साथी की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। ऊंचाई पर सांस लेने में परेशानी को देखते हुए आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता था। इसलिए दल ने उसकी स्थिति को प्राथमिकता दी और यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया।
रचित ने बताया, शिव की कृपा मानते हैं
इस पूरे घटनाक्रम को रचित गोयल महज एक सामान्य संयोग नहीं मानते। उनका कहना है कि जिस समय उनके साथी की तबीयत बिगड़ी, उसी वजह से उन्हें एक दिन रुकना पड़ा और यही देरी उन्हें संभावित खतरे से दूर ले गई।
रचित के लिए यह घटना धार्मिक आस्था से भी जुड़ गई है। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा से ही उनके साथी की तबीयत उस समय खराब हुई और दल को अपनी यात्रा एक दिन के लिए रोकनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि आज भी जब वह कैलाश मानसरोवर की उस यात्रा को याद करते हैं तो उनके मन में वही घटना सबसे पहले आती है। उनके अनुसार, अगर तय कार्यक्रम के मुताबिक वे आगे बढ़ गए होते तो परिस्थितियां काफी अलग हो सकती थीं।
नेपाल में बाढ़ के बीच सुरक्षित रहा चंडीगढ़ का दल
नेपाल में आई बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की खबरों के बीच चंडीगढ़ के रचित गोयल और उनके 20 साथियों के सुरक्षित रहने की जानकारी राहत देने वाली रही। यात्रा के दौरान सामने आए हालात ने उनके अनुभव को और भी यादगार बना दिया।
इस घटना में स्वास्थ्य संबंधी एक छोटी-सी समस्या ने पूरे यात्रा कार्यक्रम को बदल दिया। जिस फैसले का तत्काल कारण केवल एक साथी की तबीयत थी, बाद में वही फैसला दल की सुरक्षा के लिए अहम साबित हुआ।
रचित गोयल और उनके साथी अब सुरक्षित हैं। उनके लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक अनुभव के साथ-साथ ऐसी घटना की याद भी बन गई है, जिसमें एक दिन की देरी ने उन्हें संभावित खतरे से दूर रखा।










