कंगना रनौत ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी वर्षों तक राम मंदिर के निर्माण का विरोध करती रही और अब मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
शिमला: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हमेशा धार्मिक आस्था और भारत की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान किया है तथा कभी भी आस्था को वोट बैंक की राजनीति का माध्यम नहीं बनाया।
मुख्यमंत्री सुक्खू के बयान के बाद तेज हुई सियासत
कंगना रनौत का यह बयान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की हालिया टिप्पणी के बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि राम मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताएं केवल आर्थिक गड़बड़ी का मामला नहीं हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से भी जुड़ा विषय हैं। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
कंगना रनौत ने कहा कि कांग्रेस वर्षों तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध करती रही और अब उसी मंदिर से जुड़े विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाकर लाभ लेने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं तथा मंदिर का निर्माण लंबे कानूनी और सामाजिक संघर्ष के बाद संभव हुआ।
बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया दोहरे रवैये का आरोप
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बीजेपी सांसद ने कहा कि देश और हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये से परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखती है, जबकि बीजेपी का रुख हमेशा आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का रहा है। कंगना रनौत ने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी भी धार्मिक भावनाओं का उपयोग चुनावी लाभ के लिए नहीं किया, बल्कि भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
हिमाचल सरकार पर भी साधा निशाना
अपने बयान में कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने मंदिरों और धार्मिक संस्थानों की निधियों को सरकारी योजनाओं के लिए उपयोग करने का प्रयास किया तथा धार्मिक संस्थानों के संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की।हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस समय-समय पर अपना पक्ष रखती रही है और सरकार का कहना रहा है कि उसके सभी निर्णय कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए हैं।
इस विवाद के बीच हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी बीजेपी की आलोचना की। उनका कहना था कि यदि इसी प्रकार का मामला किसी कांग्रेस शासित राज्य में सामने आता, तो बीजेपी इसे राष्ट्रीय स्तर का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना देती। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।










