उत्तर प्रदेश के कानपुर में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के कई हिस्सों में जलभराव इतना गंभीर हो गया है कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल है। मकड़ीखेड़ा, अग्निहोत्रीनगर, सुख्खूपुरवा, ख्योरा, धुन्नूपुरवा, पहलवान पुरवा समेत करीब 25 बस्तियों की लगभग 50 हजार आबादी पिछले कई दिनों से जलभराव की समस्या से जूझ रही है। कई जगह पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है और लोगों का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
जलभराव के कारण इन इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है। गलियों और रास्तों पर पानी भरा होने के कारण लोगों का आवागमन प्रभावित है। कई परिवार घरों में ही फंसे हुए हैं, जबकि जिन घरों में पानी ज्यादा बढ़ गया है, वहां लोग जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं। लगातार पानी भरे रहने से घरों में रखा सामान, कपड़े, अनाज और दूसरी घरेलू चीजें खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।
कानपुर में स्थिति बिगड़ने के पीछे लगातार बारिश के साथ पांडु नदी का बढ़ता जलस्तर भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। पांडु नदी के आसपास बसे निचले इलाकों में पानी फैलने से कई बस्तियों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गोपालपुरम और जरौली फेज-2 के निचले हिस्सों में पानी भरने के बाद करीब 25 परिवारों के फंसे होने की सूचना पर एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। टीम ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
पांडु नदी का पानी बढ़ने से भौती-पनका संपर्क मार्ग पर बने पुल के ऊपर भी पानी बहने लगा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस रास्ते पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। पुलिस को भी मौके पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पानी के तेज बहाव के बीच कोई हादसा न हो। प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों का जायजा ले रही हैं और हालात के अनुसार राहत एवं बचाव की व्यवस्था की जा रही है।
मकड़ीखेड़ा और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 2,500 मकान पानी से घिर गए हैं। कई परिवारों के सामने घर से बाहर निकलने तक का रास्ता नहीं बचा है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है और जलभराव के कारण स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। कुछ इलाकों में पानी की वजह से सामान्य आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
लोगों की सबसे बड़ी चिंता गंदे और दूषित पानी को लेकर है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। जलभराव वाले क्षेत्रों में नालियों और बारिश के पानी के साथ गंदा पानी भी कई जगह जमा है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य और रोजी-रोटी दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
कई परिवारों के कामकाज पर भी बाढ़ और जलभराव का सीधा असर पड़ा है। जिन लोगों का रोजगार रोजाना बाहर निकलकर काम करने पर निर्भर है, उनके लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है। दुकानें और छोटे कारोबार भी प्रभावित हैं। मजदूरी करने वाले परिवारों को काम नहीं मिल पा रहा है और कई लोगों के सामने खाने-पीने तथा दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है।
बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ा है। जिन इलाकों में रास्ते पानी में डूब गए हैं, वहां अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने का जोखिम नहीं उठा रहे। कुछ स्थानों पर स्कूलों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पहले से ही लंबे समय से जलभराव झेल रहे परिवारों का कहना है कि यदि बारिश और नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कानपुर के प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज किया है। नगर आयुक्त ने मकड़ीखेड़ा, ख्योरा और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर जलनिकासी की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने पंपों की स्थिति देखी और पानी निकालने के लिए उन्हें लगातार चलाने के निर्देश दिए। मकड़ीखेड़ा नाला करीब 3.5 किलोमीटर लंबा बताया गया है, लेकिन कई स्थानों पर इसके क्षतिग्रस्त और जाम होने से पानी की निकासी प्रभावित होने की शिकायत सामने आई है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने की भी व्यवस्था की जा रही है। कुछ इलाकों में राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है। पांडु नदी के किनारे के प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों ने लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और बदलते हालात के अनुसार राहत व्यवस्था करने की बात कही है। एक राहत शिविर में सामुदायिक रसोई भी संचालित की गई, जहां प्रतिदिन करीब 400 लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।
इससे पहले पांडु नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। अगस्त के अंत में करीब 150 परिवारों के पलायन की रिपोर्ट सामने आई थी। कई परिवारों ने रिश्तेदारों के घरों में शरण ली, जबकि कुछ लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में घर से बाहर निकल गए। गंगा का जलस्तर भी चेतावनी बिंदु पार करने की स्थिति में पहुंचा था, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई थी।
अब सितंबर की शुरुआत में लगातार बारिश और पांडु नदी के बढ़ते पानी ने फिर से कई इलाकों में संकट पैदा कर दिया है। बर्रा-8 स्थित वरुण विहार की कच्ची बस्ती में भी पांडु नदी का पानी करीब 300 घरों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। पानी बढ़ता देखकर लोगों ने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी की।
प्रभावित लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जलभराव केवल कुछ घंटों या एक दिन की समस्या नहीं रह गया है। करीब एक सप्ताह से कई बस्तियों में पानी जमा रहने की रिपोर्ट है। ऐसे में लोगों के घरों में रहना, बच्चों को स्कूल भेजना, काम पर जाना और जरूरी सामान खरीदना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि नालों की सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था पहले से बेहतर होती तो बारिश के बाद हालात इतने खराब नहीं होते।
कानपुर में बाढ़ और जलभराव की स्थिति के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकालना है। पंपिंग के साथ-साथ नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिन इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को निकालने में जुटी हैं।
फिलहाल 25 बस्तियों की करीब 50 हजार आबादी के लिए हालात सामान्य नहीं हुए हैं। घरों में पानी, रास्तों पर जलभराव, स्कूल और कामकाज प्रभावित होने के साथ ही पलायन का दबाव लगातार बना हुआ है। प्रशासन की ओर से पानी निकालने और राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावित लोगों को राहत तभी मिलेगी जब जलस्तर नीचे आने के साथ जलनिकासी पूरी तरह बहाल होगी। लगातार बारिश की संभावना के बीच स्थानीय लोगों की निगाह अब नदी के जलस्तर और प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी हुई है।










