कानपुर में एक साथ उठीं 4 अर्थियां: कंधा देने उमड़े लोग मची चीख-पुकार; मकान गिरने से पिता और 3 बेटियों की गई थी जान

कानपुर के हिरनी गांव में मकान गिरने से पिता और तीन बेटियों की मौत के बाद एक साथ चार अर्थियां उठीं। सैकड़ों ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
कानपुर में एक साथ उठीं 4 अर्थियां: कंधा देने उमड़े लोग मची चीख-पुकार; मकान गिरने से पिता और 3 बेटियों की गई थी जान
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कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के हिरनी गांव में सोमवार सुबह का माहौल बेहद गमगीन रहा। जिस आंगन में कुछ दिन पहले तक बेटियों की किलकारियां गूंजती थीं, उसी आंगन से एक साथ चार अर्थियां उठीं। रविवार को कच्चा मकान ढहने से जान गंवाने वाले पिता और उनकी तीन बेटियों को सोमवार को ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से पूरा गांव सदमे में है। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और पड़ोसी शामिल हुए। चारों शवों को अंतिम संस्कार के लिए यमुना नदी के किनारे स्थित मूसानगर घाट ले जाया गया।

हादसा रविवार सुबह साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में हुआ था। जानकारी के मुताबिक, मुकेश सिंह वैश्य करीब 45 वर्ष के थे और अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहते थे। बारिश के बीच अचानक उनका दो मंजिला कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। हादसे के वक्त मुकेश अपनी चार बेटियों के साथ घर में मौजूद थे। मकान गिरते ही पूरा परिवार मलबे में दब गया। आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी तो वे मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया।

ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। हादसे में मुकेश सिंह और उनकी बेटियों माया, नीतू तथा पल्लवी को मलबे से बाहर निकाला गया। उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। परिवार की बड़ी बेटी काजल उर्फ लक्ष्मी भी मलबे में दब गई थी। वह काफी गहराई में फंसी हुई थी और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला जा सका। गंभीर हालत को देखते हुए उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

रविवार देर रात पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद करीब दो बजे चारों के शव हिरनी गांव स्थित घर पहुंचे। चार शवों के एक साथ घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। रातभर परिजनों की चीख-पुकार सुनाई देती रही। ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मृतक परिवार के घर पहुंचते रहे। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक परिवार के लोगों की आवाजाही थी, वहां अब मातम पसरा था। घर के आंगन में रखे चार शवों को देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

सोमवार सुबह जब अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई तो एक बार फिर पूरा गांव मृतक परिवार के घर के आसपास जमा हो गया। प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार के लिए सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके बाद करीब 10:15 बजे एक ही घर से मुकेश सिंह और उनकी तीन बेटियों माया, नीतू व पल्लवी की चार अर्थियां निकलीं। एक साथ चार अर्थियां देखकर वहां मौजूद लोगों का कलेजा कांप उठा। परिजन दहाड़ मारकर रो रहे थे और ग्रामीण उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे।

चारों अर्थियों के पीछे सैकड़ों महिलाओं की भीड़ चल रही थी। गांव का शायद ही कोई ऐसा परिवार रहा होगा, जिसका कोई सदस्य इस अंतिम यात्रा में शामिल न हुआ हो। ग्रामीणों ने अर्थियों को कंधा दिया और अंतिम विदाई में परिवार के साथ खड़े रहे। गांव की गलियों से जब एक साथ चार अर्थियां गुजरीं तो वहां मौजूद लोगों के बीच सन्नाटा और चीख-पुकार का माहौल था। कई लोग इस दृश्य को देखकर अपने आंसू नहीं रोक सके।

प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहनों से चारों शवों को अंतिम संस्कार के लिए यमुना नदी के किनारे स्थित मूसानगर घाट ले जाया गया। पिता के साथ तीन बेटियों की एक साथ अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं थी, बल्कि पूरे गांव के लिए ऐसा हादसा था, जिसने हर किसी को भीतर तक हिला दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले कभी एक ही परिवार के इतने लोगों की अर्थियां एक साथ नहीं देखीं।

इस हादसे में परिवार की चौथी बेटी काजल उर्फ लक्ष्मी की जिंदगी अब भी अस्पताल में संघर्ष कर रही है। परिवार के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि एक तरफ पिता और तीन बहनों की मौत हो चुकी है, वहीं काजल गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। रिपोर्टों के अनुसार काजल की शादी दिसंबर में तय थी। परिवार में उसकी शादी को लेकर तैयारियां होनी थीं, लेकिन उससे पहले ही घर की खुशियां मातम में बदल गईं।

हादसे के बाद ग्रामीणों ने राहत-बचाव को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप था कि मकान गिरने की सूचना देने के बाद पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी हुई, जिसके कारण शुरुआती बचाव कार्य उन्हें खुद करना पड़ा। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मलबा हटाना शुरू किया और दबे हुए लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। हालांकि, घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत और जांच की कार्रवाई शुरू की।

परिजनों ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। घायल काजल को अस्पताल पहुंचाने के बाद तत्काल उपचार को लेकर सवाल उठाए गए। परिजनों का कहना था कि हादसे के बाद हर एक मिनट महत्वपूर्ण था। गंभीर रूप से घायल काजल को बाद में बेहतर उपचार के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल भेजा गया। अब परिवार और ग्रामीण उसकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से इलाके में लगातार बारिश हो रही थी। बारिश का असर कच्चे मकानों पर पड़ा और उनकी दीवारें व छत कमजोर हो गई थीं। इसी दौरान रविवार सुबह अचानक दो मंजिला कच्चा मकान भरभराकर गिर पड़ा। मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे, लेकिन तब तक परिवार के लोग मलबे में दब चुके थे। घटना ने गांव में कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

हिरनी गांव में सोमवार को अंतिम संस्कार के दौरान केवल परिवार के लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। महिलाओं का हुजूम चारों अर्थियों के पीछे चलता रहा। कई ग्रामीणों की आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे। लोगों के बीच हादसे की चर्चा थी और हर कोई यही कह रहा था कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। एक परिवार के चार सदस्यों को खोने के बाद अब पीछे सिर्फ घायल काजल बची है, जिसका इलाज चल रहा है।

घटना के बाद प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को राहत देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घायल काजल के लिए दैवीय आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता दिए जाने की बात कही गई है। परिवार की ओर से रोजगार और अन्य सहायता की मांग भी रखी गई है। प्रशासन ने अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक व्यवस्था में मदद की।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित आवास की जरूरत को सामने ला दिया है। बारिश के मौसम में कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को कमजोर मकानों की पहचान, जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और आपदा की स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। हिरनी गांव की घटना ने दिखाया है कि कुछ ही पलों में एक परिवार की पूरी दुनिया उजड़ सकती है।

मुकेश सिंह के परिवार में अब पहले जैसी रौनक कभी नहीं होगी। जिस आंगन से सोमवार को चार अर्थियां निकलीं, वहां अब सिर्फ यादें रह गई हैं। माया, नीतू और पल्लवी अपने पिता के साथ हमेशा के लिए दुनिया से चली गईं, जबकि काजल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। गांव के लोग अब उसके ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

रविवार को गिरे मकान के मलबे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और सोमवार को उसी घर से उठी चार अर्थियों ने पूरे हिरनी गांव को रुला दिया। सैकड़ों लोगों ने कंधा देकर पिता और तीन बेटियों को अंतिम विदाई दी। मूसानगर घाट की ओर जाती चार अर्थियों का दृश्य लंबे समय तक ग्रामीणों की आंखों के सामने रहेगा। हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि घायल काजल जल्द स्वस्थ होकर अपने परिवार और गांव के बीच लौट सके।

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