कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट केस: डॉक्टर और दलालों के 3 नए वीडियो से खुला काला कारोबार का सच

कानपुर मे किडनी ट्रांसप्लांट के काले धंधे का खुलासा। डॉ. अफजल 15 लाख रुपए नोटों की गड्डियों पर लेटा नजर आया। पुलिस ने अब तक 15 संदिग्धों की पहचान की है

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के काले धंधे का खुलासा लगातार नए वीडियो और सबूतों के साथ सामने आ रहा है। पुलिस को अब तक तीन अहम वीडियो मिले हैं, जो इस अवैध नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करते हैं। ये वीडियो मुख्य रूप से दलाल शिवम अग्रवाल के मोबाइल से प्राप्त हुए हैं।

नोटों पर लेटा डॉक्टर अफजल

पहले वीडियो में मेरठ के डॉ. अफजल दिखाई दे रहे हैं। वह काले चश्मे पहनकर बेड पर लेटा है, और उनके चारों ओर करीब 15 लाख रुपए नोटों की गड्डियों के रूप में बिछे हैं। यह वीडियो दिखाता है कि किस तरह अवैध धन के माध्यम से इस किडनी रैकेट को चलाया जा रहा था। वीडियो में परवेज़ शैफी भी नजर आता है, जो अस्पताल के डॉक्टरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करता था।

डॉ. अफजल मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल से जुड़े हैं और पुलिस की 10 टीमें उन्हें पकड़ने के लिए दिल्ली, नोएडा और मेरठ में छापेमारी कर रही हैं। उनके साथ डॉ. वैभव, डॉ. अमित और डॉ. रोहित भी फरार हैं।

दक्षिण अफ्रीका की मरीज अरेबिका

दूसरे वीडियो में अरेबिका नाम की दक्षिण अफ्रीका की मरीज दिखाई दे रही हैं। वह रोते हुए और परेशान नजर आ रही हैं। वीडियो में एंबुलेंस का ड्राइवर शिवम अग्रवाल उन्हें स्टेथोस्कोप लगाकर चेकअप करता है और कहता है कि उन्हें इंजेक्शन देना पड़ेगा। अरेबिका पहले आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट करा चुकी हैं।

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट केस: डॉक्टर और दलालों के 3 नए वीडियो से खुला काला कारोबार का सच

शिवम अग्रवाल, जो इस काले धंधे में दलाल की भूमिका निभा रहा था, ऑपरेशन थिएटर तक मरीजों की पहुंच सुनिश्चित करता था और उनसे जाँच करता था। अरेबिका का सौदा लगभग 2-2.5 करोड़ रुपए में किया गया था। इस वीडियो ने यह साबित कर दिया कि दलाल सिर्फ कागज़ी काम ही नहीं कर रहे थे, बल्कि ऑपरेशन तक सक्रिय रूप से शामिल थे।

पंजाब का मरीज और 43 लाख रुपए का खेल

अमृतसर (पंजाब) के रहने वाले मनजिंदर सिंह दिखाई देते हैं। वह बताते हैं कि उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आहूजा हॉस्पिटल से 43 लाख रुपए देने पड़े, लेकिन उन्हें सही इलाज नहीं मिला। मनजिंदर का कहना है कि अब उनके पास जीने का कोई मतलब नहीं बचा है। यह वीडियो इस अवैध रैकेट की हद तक पहुँचने और पीड़ितों के संघर्ष को सामने लाता है।

इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि किडनी रैकेट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल तक फैल चुका है। पुलिस ने नेपाल के दो युवकों से जुड़े वीडियो भी बरामद किए, जिनकी किडनी सिर्फ 9-10 लाख रुपए में खरीदी और बेची गई।

मेडिलाइफ हॉस्पिटल से जुड़े लोग और पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने अब तक इस किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़े 15 लोगों की पहचान की है। इनमें से 9 को जेल भेजा जा चुका है। वर्तमान में 6 और संदिग्धों की पूछताछ जारी है। ये सभी कल्याणपुर के मेडिलाइफ हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं।

कानपुर पुलिस के डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी की अगुवाई में 12 से अधिक पुलिस टीमें दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और नेपाल तक छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने अस्पताल आने-जाने वाले डॉक्टरों और दलालों की गतिविधियों को सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज से ट्रैक किया।

कानपुर रैकेट का खुलासा और डॉक्टरों की भूमिका

जांच में सामने आया है कि नोएडा के डॉ. रोहित उर्फ राहुल, मेरठ के डॉ. अफजल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ अमित इस रैकेट में सक्रिय रूप से शामिल थे। डॉ. दंपती प्रीति और सुरजीत आहूजा के नेतृत्व में चलने वाले हॉस्पिटल ने इस अवैध व्यापार को सुगम बनाया।

दलाल शिवम अग्रवाल का मोबाइल फुटेज इस बात का सबूत है कि ऑपरेशन थिएटर तक दलाल की पहुँच थी और वे मरीजों की जांच कर रहे थे। यह सिर्फ पैसा कमाने का मामला नहीं था, बल्कि मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाला गंभीर अपराध था।

पीड़ितों के अनुभव और मानसिक प्रभाव

किडनी रैकेट से जुड़े पीड़ितों ने गंभीर मानसिक और आर्थिक नुकसान झेला है। मनजिंदर सिंह ने अपनी कहानी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कुल 43 लाख रुपए अस्पताल और दलालों को दिए, लेकिन उन्हें सही इलाज नहीं मिला। अरेबिका की हालत भी दिखाती है कि मरीज शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से प्रभावित हैं।

नेपाल से जुड़े पीड़ित भी इस रैकेट का शिकार हुए हैं। पुलिस ने टेलीग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों से इस अवैध कारोबार की जानकारी जुटाई।

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