कर्नाटक बीजेपी सोमवार को बेंगलुरु में विधानसभा का घेराव करेगी। नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने बताया कि प्रदर्शन फ्रीडम पार्क से शुरू होगा। पार्टी कथित वाल्मीकि निगम फंड घोटाले को लेकर बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में कथित जनजातीय कल्याण निगम घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने रविवार को कहा कि बीजेपी सोमवार को बेंगलुरु में विधानसभा का घेराव करेगी और पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग उठाएगी। पार्टी का आरोप है कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े धन के कथित दुरुपयोग की गंभीर जांच होनी चाहिए।
फ्रीडम पार्क से शुरू होगा बीजेपी का प्रदर्शन
बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर. अशोक ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे पार्टी का विरोध प्रदर्शन बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क से शुरू होगा। इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ता और नेता विधानसभा परिसर यानी विधान सौधा की ओर मार्च करेंगे और वहां घेराव करने की कोशिश करेंगे।
प्रदर्शन में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। पार्टी ने इस आंदोलन को कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ अपने अभियान का अगला चरण बताया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जब तक बी. नागेंद्र इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
नागेंद्र के इस्तीफे पर अड़ी बीजेपी
आर. अशोक ने कहा कि बीजेपी का मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है। उनके मुताबिक, पार्टी राज्य के अलग-अलग जिलों और तालुका मुख्यालयों में पहले ही विरोध प्रदर्शन कर चुकी है। कई जगहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिन-रात धरना देकर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग उठाई है।
अशोक ने दावा किया कि कथित घोटाले को लेकर बीजेपी लगातार सरकार से जवाब मांग रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाबदेही चाहती है।
हालांकि, बीजेपी द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कथित धन के दुरुपयोग और उसके इस्तेमाल को लेकर अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
187 करोड़ रुपये के कथित गबन का आरोप
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि वाल्मीकि निगम से जुड़े करीब 187 करोड़ रुपये का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह राशि आंध्र प्रदेश और नागेंद्र के गृह जिले बल्लारी की ओर भेजी गई तथा चुनाव के दौरान इसका इस्तेमाल किया गया।
बीजेपी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने कथित धन हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज सरकार के सामने रखे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मामले से ध्यान हटाने के लिए जवाबी प्रदर्शन कर रही है।
इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और जांच एजेंसियों के अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। किसी भी वित्तीय अनियमितता के मामले में आरोप, जांच और अदालत या सक्षम प्राधिकरण के निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
दलित और आदिवासी फंड के इस्तेमाल पर सवाल
बीजेपी ने इस पूरे मामले को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े कल्याणकारी फंड के इस्तेमाल से जोड़ते हुए सरकार पर राजनीतिक और नैतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। आर. अशोक ने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों, संवैधानिक मूल्यों तथा सार्वजनिक धन के उचित इस्तेमाल के पक्ष में हैं या नागेंद्र का समर्थन करते हैं।
बीजेपी का कहना है कि जिन फंड का इस्तेमाल वंचित और आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए, उनके कथित दुरुपयोग की स्थिति में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
राज्यभर में प्रदर्शन कर चुकी है बीजेपी
आर. अशोक के मुताबिक, विधानसभा घेराव से पहले बीजेपी ने कर्नाटक के जिला और तालुका स्तर पर कई विरोध कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कथित घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की।

बीजेपी का दावा है कि इस मुद्दे को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों के बीच भी नाराजगी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।
सोमवार के विधानसभा घेराव को इसी आंदोलन का बड़ा चरण माना जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के बेंगलुरु पहुंचने की संभावना है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के लिए यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौती हो सकता है।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित वित्तीय विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। बीजेपी जहां इस मुद्दे को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है, वहीं सरकार के रुख और जांच की प्रक्रिया पर भी राजनीतिक बहस जारी है।
विपक्ष का आंदोलन विधानसभा के आगामी राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है। बीजेपी की रणनीति सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए आरोपों का जवाब देना और मामले में पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
कुमारस्वामी के समर्थन का भी दावा
आर. अशोक ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं से आंदोलन जारी रखने और पार्टी के प्रयासों में सहयोग करने को कहा है। इससे संकेत मिलता है कि यह मुद्दा राज्य की राजनीति में व्यापक विपक्षी अभियान का हिस्सा बन सकता है।
बीजेपी नेता ने दोहराया कि पार्टी केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन को अलग-अलग स्तरों पर जारी रखा जाएगा।
सोमवार के प्रदर्शन पर नजर
बेंगलुरु में सोमवार सुबह फ्रीडम पार्क से शुरू होने वाला प्रदर्शन अब राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और विधानसभा की ओर मार्च के कारण प्रशासन की नजर पूरे कार्यक्रम पर रहेगी।
कर्नाटक बीजेपी का कहना है कि उसका आंदोलन कथित वाल्मीकि निगम फंड घोटाले में जवाबदेही तय कराने के लिए है। वहीं, आरोपों की वास्तविकता और धन के कथित हस्तांतरण से जुड़े तथ्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
फिलहाल बीजेपी ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना रुख सख्त कर लिया है। सोमवार का विधानसभा घेराव इस राजनीतिक विवाद को और तेज कर सकता है। प्रदर्शन के दौरान बीजेपी सरकार पर कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाएगी।









