करवा चौथ का त्योहार नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है। सुहागिन महिलाएं व्रत की तैयारियों में जुटी हैं और खरीदारी के लिए बाजारों का रुख कर रही हैं। इस त्योहार में सरगी का विशेष महत्व होता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाकर निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं। पहले सरगी की थाली में मिठाइयां, मठरी, फेनियां और अन्य पारंपरिक पकवान प्रमुख रूप से शामिल किए जाते थे, लेकिन अब खानपान की पसंद में बदलाव देखने को मिल रहा है। अलीगढ़ के बाजारों में ड्राई फ्रूट्स, ताजे फल, मखाना और कम चीनी वाली मिठाइयों की मांग बढ़ने की चर्चा है। महिलाएं परंपरा निभाने के साथ अपनी सेहत और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी खाने-पीने की चीजों का चयन कर रही हैं।
करवा चौथ पर सरगी केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सास की ओर से बहू को दिए जाने वाले आशीर्वाद और परिवार की परंपरा से भी जोड़कर देखा जाता है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी की थाली या टोकरी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे, नारियल और अन्य खाद्य सामग्री रखी जाती है। इसके साथ कपड़े, श्रृंगार का सामान और सुहाग से जुड़ी वस्तुएं भी दी जाती हैं। सुबह व्रत शुरू होने से पहले महिलाएं सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद पूरे दिन व्रत रखती हैं। यही वजह है कि त्योहार से पहले सरगी की खरीदारी को लेकर बाजारों में विशेष उत्साह दिखाई देता है।
इस बार सरगी की थाली में पौष्टिक चीजों को शामिल करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट और अन्य ड्राई फ्रूट्स के साथ मखाना खरीदने में लोग दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सूखे मेवों में ऊर्जा और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं, मखाना हल्का नाश्ता होने के कारण भी कई लोगों की पसंद बन रहा है। कुछ परिवार सरगी की टोकरी को आकर्षक बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार के ड्राई फ्रूट्स को सजावटी पैकिंग में रखवा रहे हैं। इससे बाजार में पारंपरिक सरगी के साथ आधुनिक पैकिंग वाले गिफ्ट पैक की मांग भी देखने को मिल रही है।
ताजे फलों को भी सरगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। सेब, केला, अनार, संतरा और मौसमी फल खरीदने के लिए लोग दुकानों पर पहुंच रहे हैं। फल शरीर को पानी, विटामिन, खनिज और फाइबर उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहने से पहले संतुलित आहार लेना उपयोगी हो सकता है। इसलिए महिलाएं सरगी में केवल मिठाइयां रखने के बजाय फल, सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक विकल्पों को शामिल करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की सेहत और खानपान की जरूरत अलग होती है, इसलिए सरगी की मात्रा और सामग्री का चयन अपनी जरूरत के अनुसार करना चाहिए।
मिठाइयों की खरीदारी में भी पसंद का बदलाव दिखाई दे रहा है। पारंपरिक मिठाइयों के साथ कुछ लोग कम चीनी वाली मिठाइयां और हल्के विकल्प तलाश रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिठाई की दुकानों पर अलग-अलग किस्मों की मिठाइयां उपलब्ध रहती हैं, लेकिन अब कई ग्राहक सामग्री और मिठास के स्तर के बारे में पूछताछ करते हैं। इसी तरह, सरगी की टोकरी तैयार कराने वाले दुकानदारों से भी लोग अपनी पसंद के अनुसार फल, ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयां शामिल करने को कह रहे हैं। इससे सरगी के पारंपरिक स्वरूप में आधुनिक खानपान की पसंद का मेल देखने को मिल रहा है।
अलीगढ़ के बाजारों में करवा चौथ को लेकर खरीदारी का असर केवल खाद्य सामग्री तक सीमित नहीं रहता। चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, साड़ियां, सूट और अन्य श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर भी त्योहार के समय ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है। महिलाएं व्रत और पूजा की तैयारियों के साथ अपने पहनावे और सजने-संवरने के सामान की खरीदारी भी करती हैं। वहीं, परिवार के सदस्य सरगी के लिए उपयुक्त सामग्री जुटाने में लगे रहते हैं। बाजारों में इस तरह की खरीदारी से त्योहार से जुड़ी परंपराओं और स्थानीय कारोबार दोनों को बढ़ावा मिलता है।
करवा चौथ के व्रत में दिनभर भोजन और पानी से दूर रहने की परंपरा है, इसलिए व्रत से पहले संतुलित भोजन करना महत्वपूर्ण है। सरगी में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं जो पेट भरने के साथ शरीर को ऊर्जा भी दें। साबुत अनाज, फल, दूध या दही और थोड़ी मात्रा में सूखे मेवे उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। केवल अधिक मिठाई या बहुत नमकीन भोजन लेने से प्यास बढ़ सकती है। गर्मी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या दवाओं के कारण व्रत रखना किसी के लिए कठिन हो सकता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
अलीगढ़ में करवा चौथ की तैयारियों के बीच सरगी की थाली में परंपरा और सेहत का यह मेल त्योहार के बदलते तौर-तरीकों को दर्शाता है। महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों को बनाए रखते हुए अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार सरगी तैयार कर रही हैं। ड्राई फ्रूट्स, मखाना, ताजे फल और कम चीनी वाले विकल्पों को जगह देने की प्रवृत्ति से सरगी की थाली पहले से अधिक विविध हो रही है। त्योहार के करीब आने के साथ बाजारों में खरीदारी का माहौल और तेज होने की उम्मीद है।








