केरल में शिगेला संक्रमण का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। 7 वर्षीय बच्चे समेत दो और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 5 हो गई है। इस वर्ष अब तक 147 मामले सामने आए हैं, जिनमें 71 जून में दर्ज हुए।
तिरवंतपुरम: दक्षिण भारतीय राज्य केरल में शिगेला संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में इस बैक्टीरियल संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। हाल ही में दो और मौतों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कई जिलों में निगरानी और नियंत्रण उपायों को और सख्त कर दिया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अब तक राज्य में शिगेला संक्रमण के 147 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग आधे मामले केवल जून महीने में सामने आए हैं, जो संक्रमण के तेजी से फैलने की ओर संकेत करते हैं। बढ़ते मामलों के बीच सरकार लोगों से सावधानी बरतने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील कर रही है।
7 वर्षीय बच्चे की मौत ने बढ़ाई चिंता
ताजा मामलों में मलप्पुरम जिले के पूक्कोट्टूर क्षेत्र के रहने वाले सात वर्षीय अर्जव की मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। बच्चे को तेज बुखार और दस्त की शिकायत के बाद 12 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इलाज के दौरान जांच में शिगेला संक्रमण की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में यह संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
दो नई मौतों से मृतकों की संख्या पहुंची पांच
स्वास्थ्य विभाग ने एक अन्य मामले में त्रिशूर जिले के कोडकारा क्षेत्र के 43 वर्षीय व्यक्ति की मौत को भी शिगेला संक्रमण से जुड़ा बताया है। उनकी मृत्यु कुछ दिन पहले हुई थी, लेकिन जांच के बाद संक्रमण की पुष्टि की गई।
इन दोनों मामलों के जुड़ने के बाद राज्य में इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या पांच हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के अस्पतालों को सतर्क रहने और संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मरीज समय पर इलाज मिलने पर ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती कर गहन चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है।
जून में तेजी से बढ़े संक्रमण के मामले
केरल के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में अब तक 71 नए मामले सामने आ चुके हैं। सोमवार को भी राज्य के विभिन्न जिलों से आठ नए संक्रमण की पुष्टि हुई।
तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कन्नूर और कोझिकोड जैसे जिलों में नए मरीजों के मिलने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के मौसम में दूषित पानी और खाद्य पदार्थों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से स्थानीय प्रशासन ने जल स्रोतों की निगरानी और खाद्य सुरक्षा जांच को तेज कर दिया है।
क्या है शिगेला संक्रमण?
शिगेला एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो शिगेलोसिस नामक आंतों के संक्रमण का कारण बनता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से पाचन तंत्र को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में बार-बार दस्त आना, तेज बुखार, पेट में दर्द, ऐंठन, उल्टी और कमजोरी शामिल हैं। कुछ गंभीर मामलों में मरीज के मल में खून भी आ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण होने के बाद लक्षण आमतौर पर एक से तीन दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई मामलों में बीमारी हल्की होती है, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह गंभीर खतरा बन सकती है।
संक्रमण कैसे फैलता है?
शिगेला संक्रमण मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। यदि भोजन तैयार करने या खाने से पहले हाथों की सफाई नहीं की जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी बैक्टीरिया फैल सकता है। सामुदायिक स्थानों, स्कूलों, डे-केयर केंद्रों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इसका प्रसार अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता संबंधी छोटी-छोटी सावधानियां संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अस्पतालों में विशेष निगरानी
बढ़ते मामलों को देखते हुए केरल सरकार ने अस्पतालों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। जिन मरीजों में दस्त, बुखार या पेट संबंधी गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनकी जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है।
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डॉक्टरों की विशेष टीमें मरीजों की निगरानी कर रही हैं और गंभीर मामलों को तुरंत भर्ती किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की कोई कमी न हो।
अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में संक्रमण के मामले अधिक मिले हैं, वहां स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
सरकार ने बढ़ाई निगरानी
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने मलप्पुरम सहित कई जिलों में निगरानी अभियान तेज कर दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों की टीमें प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।
जल स्रोतों की जांच, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी और संभावित संक्रमित क्षेत्रों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन ने स्थानीय निकायों को साफ-सफाई की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं।
सरकार का लक्ष्य संक्रमण के प्रसार को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना है ताकि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संकट की स्थिति न बने।
लोगों के लिए जारी की गई स्वास्थ्य सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से कई महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की अपील की है। लोगों को केवल स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा भोजन बनाने और खाने से पहले साबुन से हाथ धोने, खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचने और बच्चों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार दस्त, तेज बुखार, उल्टी या मल में खून जैसी समस्या दिखाई देती है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि शिगेला संक्रमण आमतौर पर नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए समय पर पहचान और उपचार आवश्यक है। केरल में बढ़ते मामलों ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में स्वच्छता और जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पांच लोगों की मौत और 147 मामलों की पुष्टि ने स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट कर दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की रणनीति और लोगों की सतर्कता ही यह तय करेगी कि संक्रमण को कितनी जल्दी नियंत्रित किया जा सकता है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और नागरिकों से सहयोग की अपील कर रहा है ताकि इस संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके और अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।








