केरल राजनीति: UDF की बढ़ी उम्मीदें, क्या राहुल गांधी खत्म कर पाएंगे कांग्रेस की गुटबाजी?

केरल की राजनीति में UDF की उम्मीदें बढ़ती नजर आ रही हैं। सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी खत्म कर पाएंगे। जानें केरल चुनाव से

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की स्थानीय निकाय चुनावों में जीत ने पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाया है, लेकिन अंदरूनी गुटबाजी का खतरा अभी भी बना हुआ है।

नई दिल्ली: केरल की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। हाल ही में स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस नेतृत्व वाले United Democratic Front (UDF) के अच्छे प्रदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ाया है, लेकिन आंतरिक गुटबाजी अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर संगठन के भीतर मतभेद खत्म नहीं हुए, तो चुनाव में इसका सीधा असर पड़ सकता है।

इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi की केरल में बढ़ती सक्रियता को संगठन को एकजुट करने और चुनावी रणनीति मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।

राहुल गांधी की सक्रियता को माना जा रहा डैमेज कंट्रोल

राहुल गांधी का केरल दौरा सिर्फ चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठनात्मक नियंत्रण और असंतोष को संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए थे, जिसके बाद देर रात तक बैठकों का दौर चला। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने “वन मैन, वन पोस्ट” की नीति पर जोर देते हुए कुछ सांसदों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले को पार्टी में अनुशासन लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि टिकट वितरण में महिलाओं को कम प्रतिनिधित्व मिलने को लेकर भी सवाल उठे हैं। पार्टी के भीतर कुछ नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर महिला भागीदारी की बात करने वाली कांग्रेस को इस मुद्दे पर अधिक संवेदनशील होना चाहिए था।

निकाय चुनावों में जीत से बढ़ा उत्साह

हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में UDF के अच्छे प्रदर्शन ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। लेकिन केरल की राजनीति का इतिहास बताता है कि स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों के नतीजे अक्सर अलग होते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को जीत की उम्मीद थी, लेकिन वामपंथी गठबंधन Left Democratic Front (LDF) ने 99 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी। इसलिए राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि निकाय चुनावों की सफलता को विधानसभा जीत का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

केरल में मुकाबला परंपरागत रूप से UDF और LDF के बीच ही होता रहा है। LDF में मुख्य रूप से सीपीएम, सीपीआई और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जिससे उनका संगठनात्मक आधार मजबूत बना हुआ है।विश्लेषकों का कहना है कि UDF को चुनाव जीतने के लिए सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत संगठन और स्पष्ट नेतृत्व दिखाना होगा।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या – गुटबाजी

कांग्रेस के भीतर गुटबाजी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। टिकट बंटवारे के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी सामने आई थी, जिसे फिलहाल शांत कर दिया गया है, लेकिन चुनाव के दौरान यह असंतोष फिर उभर सकता है। ऐसे में राहुल गांधी की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। अगर वह नेताओं को एक मंच पर लाने में सफल रहते हैं, तो UDF की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

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