कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने SRCC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को राजनीतिक बताया। उन्होंने 'दिमागी नक्सल' और 'नाराज फूफा' जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अपना रिपोर्ट कार्ड दिखा रहे हैं, जबकि युवा भी रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है।
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली स्थित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में छात्रों के साथ संवाद को लेकर उन पर निशाना साधा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े सवालों पर चर्चा का अवसर राजनीतिक भाषण में बदल गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना रिपोर्ट कार्ड पेश किया है, लेकिन देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है। खड़गे ने शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी के SRCC दौरे को लेकर सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का छात्रों के साथ संवाद युवाओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर हो सकता था, लेकिन उनके मुताबिक यह कार्यक्रम राजनीतिक प्रचार में बदल गया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए 'नाराज फूफा' और 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय ऐसे जुमलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
खड़गे बोले- युवाओं के सवालों का सामना करना चाहिए था
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि SRCC में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर बातचीत के लिए महत्वपूर्ण अवसर था। उनके मुताबिक, छात्रों के साथ सीधे संवाद में देश के युवाओं की चिंताओं और उनके सवालों पर चर्चा होनी चाहिए थी।
खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इस अवसर को राजनीतिक भाषण में बदल दिया। उन्होंने कहा कि शब्द और जुमले बदल सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों में बदलाव नहीं आया है।
कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने SRCC के 100वें स्थापना दिवस समारोह में छात्रों और युवाओं को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ विपक्ष पर भी राजनीतिक टिप्पणियां की थीं।
'प्रधानमंत्री आउट ऑफ रीच हो गए हैं'
खड़गे ने प्रधानमंत्री के आउटरीच कार्यक्रमों को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि आउटरीच की जरूरत तभी पड़ती है, जब कोई व्यक्ति 'आउट ऑफ रीच' हो जाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाया है और अब देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है।
इस टिप्पणी के जरिए खड़गे ने सरकार के दावों और युवाओं के अनुभवों के बीच अंतर होने का आरोप लगाया। हालांकि, यह कांग्रेस अध्यक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
5 सितंबर को SRCC पहुंचे थे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 सितंबर को दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 100वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने जेन-जी छात्रों के बीच करीब 48 मिनट तक संबोधन दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कॉलेज के पूर्व छात्रों, देश के विकास और सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने विपक्ष और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों पर भी कटाक्ष किया।
इसी भाषण के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने प्रधानमंत्री के संबोधन को राजनीतिक भाषण बताते हुए प्रतिक्रिया दी।
पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का किया इस्तेमाल
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में लाल किले से दिए गए 15 अगस्त के भाषण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस भाषण में 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल करने के बाद उनके विरोधी बौखला गए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक और वैचारिक विरोध के संदर्भ में किया। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।
खड़गे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 'दिमागी नक्सल' और 'नाराज फूफा' जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दे इससे नहीं बदलते।
'नाराज फूफा' पर भी पीएम मोदी का तंज
SRCC में प्रधानमंत्री मोदी ने उन लोगों पर भी कटाक्ष किया, जो विकास से जुड़ी नई परियोजनाओं पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए 'नाराज फूफा' शब्द का इस्तेमाल किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर बात पर 'इसकी क्या जरूरत है' पूछने वाले लोगों की सोच एक जैसी होती है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोगों ने बुलेट ट्रेन, यूपीआई और नई संसद जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी सवाल उठाए थे।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, विकास की नई पहलों को लेकर शुरुआत में संदेह या आलोचना करने वाले लोग बाद में उनके फायदे को स्वीकार करते हैं।
कांग्रेस ने हालांकि प्रधानमंत्री की इस शैली को राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देखा है। खड़गे ने इसी आधार पर प्रधानमंत्री के SRCC संबोधन की आलोचना की।
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पीएम मोदी ने 2013 के हालात का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 2013 के भारत की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश आज उस दौर की तुलना में काफी आगे आ चुका है।
उन्होंने विशेष रूप से बैंकिंग व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि 2013 में बैंकिंग सिस्टम खराब स्थिति में था।
उन्होंने 2008 के मुंबई आतंकी हमले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सरकार ने इसके बाद कोई कदम नहीं उठाया।
प्रधानमंत्री के इन दावों का मकसद वर्तमान सरकार की उपलब्धियों की तुलना पिछली सरकारों के कार्यकाल से करना था। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की प्रतिक्रिया इसी राजनीतिक बहस की अगली कड़ी है।
शिक्षा और रोजगार को लेकर राजनीतिक बहस
खड़गे ने अपने बयान में युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय वास्तविक संवाद होना चाहिए।
भारत में युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक अवसर लगातार राजनीतिक बहस के महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दल अक्सर इन मुद्दों को लेकर एक-दूसरे की नीतियों और प्रदर्शन पर सवाल उठाते रहे हैं।
SRCC जैसे प्रमुख संस्थान में प्रधानमंत्री का छात्रों के साथ संवाद भी इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश की आर्थिक और विकास यात्रा पर जोर दिया, जबकि खड़गे ने सरकार की नीतियों और युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज
प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब भाजपा और कांग्रेस के बीच सरकार की उपलब्धियों और नीतियों को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है।
प्रधानमंत्री ने SRCC के कार्यक्रम में विकास परियोजनाओं और देश की बदलती स्थिति का उल्लेख करते हुए पिछली सरकारों पर निशाना साधा। दूसरी ओर, खड़गे ने प्रधानमंत्री के संबोधन को राजनीतिक प्रचार बताते हुए युवाओं के सवालों और सरकार के प्रदर्शन को लेकर जवाब मांगा।
दोनों नेताओं की टिप्पणियां भारतीय राजनीति में सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष की आलोचनाओं के बीच चल रही व्यापक बहस को दर्शाती हैं।
'रिपोर्ट कार्ड' पर आमने-सामने सत्तापक्ष और विपक्ष
खड़गे का 'रिपोर्ट कार्ड' वाला बयान राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाया है, लेकिन युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है।
इस टिप्पणी के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष ने युवाओं की अपेक्षाओं और सरकार के प्रदर्शन के बीच तुलना की मांग की। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सरकार की नीतियों और पिछले वर्षों में हुए बदलावों को उपलब्धियों के तौर पर पेश किया गया।
इस तरह SRCC में प्रधानमंत्री के छात्रों के साथ संवाद के बाद शिक्षा, युवा और विकास के मुद्दों पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। जहां भाजपा सरकार की उपलब्धियों पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस इन दावों के बीच युवाओं के सामने मौजूद सवालों को प्रमुखता से उठा रही है।









