केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष और कुछ संगठनों पर भारत में हिंसा भड़काने की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया। उनका बयान दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है।
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष और कुछ कथित भारत-विरोधी समूहों पर देश में अशांति फैलाने की योजना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को उकसाकर हिंसा, आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाएं कराने का प्रयास किया गया। रिजिजू ने भारत की राजनीतिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन का रास्ता निष्पक्ष चुनाव है। विपक्ष की ओर से इन प्रदर्शनों को लोकतंत्र बचाने की मुहिम बताया गया है।
रिजिजू ने विपक्ष पर लगाए हिंसा भड़काने के आरोप
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए विपक्ष और कुछ समूहों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि देश में बांग्लादेश और फ्रांस जैसी हिंसा और अशांति पैदा करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक नेताओं और अन्य तत्वों ने युवाओं को उकसाकर सड़कों पर हिंसा, आगजनी और लूटपाट कराने का प्रयास किया।
रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में सरकार बदलने का फैसला निष्पक्ष चुनावों के जरिए होता है। हालांकि, हिंसा भड़काने की कथित साजिश को लेकर उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि खबर में उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान के साथ एक वीडियो भी साझा किया। इसमें AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयान दिखाए जाने का दावा किया गया है।
चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक विवाद
रिजिजू का यह बयान दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। इन प्रदर्शनों में विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों ने चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दे उठाए। प्रदर्शन के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई।
रिजिजू ने प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन से संबंधित बयानों को कथित साजिश के संदर्भ में पेश किया। वहीं, विपक्ष और प्रदर्शन से जुड़े लोगों की ओर से इस आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी व्यवस्था की रक्षा से जोड़कर देखा गया है। ऐसे में विवाद का केंद्र विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य और सत्ता परिवर्तन संबंधी बयानों का अर्थ बन गया है।
प्रशांत भूषण ने लोकतांत्रिक अधिकारों का दिया हवाला
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सरकार के उस दावे को खारिज किया कि आंदोलन विपक्ष की ओर से सत्ता परिवर्तन कराने की कोशिश है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन का उद्देश्य देश में चुनावी लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाना है।
भूषण ने कहा कि सरकार के खिलाफ असंतोष जाहिर करना अपराध नहीं है और सत्ता परिवर्तन की मांग करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सत्ता परिवर्तन की मांग और तेज हो सकती है।
इस घटनाक्रम ने सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और बढ़ा दिया है। एक ओर रिजिजू ने हिंसा भड़काने की कथित योजना का आरोप लगाया, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने अपनी मांगों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर पेश किया।










