किट्टू बिल्ली और भौंकने का राज़

किट्टू बिल्ली और भौंकने का राज़

'शांति नगर' के जानवरों में 'किट्टू' नाम की एक बिल्ली बहुत मशहूर थी। दिखने में वह एक साधारण, सफेद और भूरे रंग की बिल्ली थी, लेकिन उसके पास एक ऐसी अनोखी प्रतिभा थी जिसने पूरे मोहल्ले को हैरान कर रखा था। किट्टू 'म्याऊँ' नहीं करती थी। जब भी उसे कुछ कहना होता, वह कुत्तों की तरह 'भौंकती' थी!

कहानी

किट्टू जब छोटी थी, तो उसे एक धोबी के परिवार ने पाला था। उस घर में 'शेरू' नाम का एक बड़ा और प्यारा कुत्ता भी रहता था। किट्टू की माँ नहीं थी, इसलिए शेरू ने ही उसे पाल-पोस कर बड़ा किया। किट्टू दिन-रात शेरू के साथ खेलती, उसके साथ सोती और उसी की तरह हरकतें करती।

धीरे-धीरे, किट्टू ने शेरू की भाषा भी सीख ली। जब वह पहली बार 'म्याऊँ' की जगह 'भौ-भौ' बोली, तो शेरू भी हैरान रह गया था।

शांति नगर में एक बड़ी समस्या थी। वहाँ 'कालू' नाम का एक चोर अक्सर रात को आता था और लोगों के जूते-चप्पल, सूखते कपड़े और कभी-कभी कीमती सामान चुरा ले जाता था। मोहल्ले के कुत्ते उसे पकड़ने की कोशिश करते, लेकिन कालू बहुत चालाक था।

एक रात, किट्टू छत पर बैठी चाँद देख रही थी। तभी उसे नीचे किसी के दबे पाँव चलने की आहट सुनाई दी। उसने झाँक कर देखा। कालू चोर शर्मा जी के आँगन में घुस रहा था। वहाँ शर्मा जी का पालतू कुत्ता 'टॉमी' गहरी नींद में सो रहा था।

किट्टू समझ गई कि अगर उसने 'म्याऊँ' किया, तो शायद कोई न जागे और टॉमी भी उसे एक साधारण बिल्ली समझकर इग्नोर कर दे। उसे कुछ बड़ा करना था।

किट्टू ने एक गहरी साँस ली और अपनी पूरी ताकत लगाकर कुत्तों की भाषा में चिल्लाई, 'भौ! भौ! भौ! चोर! चोर! जागो सब लोग! भौ-भौ!'

किट्टू की आवाज़ बिल्कुल एक बड़े, ख़तरनाक कुत्ते जैसी थी।

अचानक छत से कुत्ते की इतनी तेज़ आवाज़ सुनकर कालू चोर बुरी तरह डर गया। उसे लगा कि कोई बड़ा कुत्ता ऊपर से उस पर कूदने वाला है। वह हड़बड़ाया और एक गमले से टकरा गया। 'धड़ाम!'

आवाज़ सुनकर टॉमी कुत्ता भी जाग गया। उसने देखा कि कोई अनजान आदमी घर में है, तो वह भी ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा।

किट्टू छत से लगातार 'भौ-भौ' किए जा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे शर्मा जी के घर में एक नहीं, बल्कि दो-दो खूंखार कुत्ते हैं।

शोर सुनकर शर्मा जी और पड़ोस के लोग लाठियां लेकर बाहर आ गए। कालू चोर घबराकर भागने लगा, लेकिन टॉमी ने उसका पैजामा पकड़ लिया। लोगों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

अगले दिन, हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि रात को छत पर कौन सा नया कुत्ता आया था। जब लोगों को पता चला कि वह कोई कुत्ता नहीं, बल्कि उनकी प्यारी किट्टू बिल्ली थी, तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ।

शर्मा जी ने किट्टू को गोद में उठाया और उसे एक बड़ी कटोरी दूध पिलाया। मोहल्ले के सभी कुत्तों ने किट्टू को अपना हीरो मान लिया। टॉमी ने उसे अपनी 'मानद बहन' बना लिया।

उस दिन के बाद से, किट्टू शांति नगर की सबसे खास सदस्य बन गई। वह अभी भी कभी-कभी मज़ाक में 'म्याऊँ' कर देती थी, लेकिन जब भी कोई खतरा होता, उसकी 'कुत्ते वाली बोली' ही सबका सहारा बनती थी।

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'हमारी पहचान हमारी बोली या रूप-रंग से नहीं, बल्कि हमारे काम से होती है। किट्टू एक बिल्ली थी, लेकिन उसने कुत्तों की भाषा सीखकर सबका भला किया। हमें दूसरों से अलग होने पर शर्म नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी अनोखी प्रतिभा का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करना चाहिए।'

Leave a comment