कोई भी प्रिंट या डिजिटल कॉपी उपलब्ध नहीं, पेंगुइन पब्लिकेशन ने नरवणे किताब पर दी सफाई

पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अभी प्रकाशित नहीं हुई। पब्लिशर ने किसी भी अनधिकृत वितरण को कॉपीराइट उल्लंघन बताया।

पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर संसद और मीडिया में विवाद छिड़ गया। पब्लिशर ने साफ किया कि कोई भी अनधिकृत वितरण कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा।

New Delhi: पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर हाल में संसद और मीडिया में बवाल मचा है। यह विवाद तब बढ़ा जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस किताब का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए।

हालांकि इस विवाद के बीच किताब के पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने साफ किया कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और उनके पास इसके एक्सक्लूसिव पब्लिशिंग राइट्स हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की कॉपी या डिजिटल फॉर्मेट में इस किताब का वितरण कॉपीराइट उल्लंघन माना जाएगा।

पब्लिशर का बयान

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को बयान जारी करते हुए कहा कि नरवणे की किताब की कोई भी कॉपी, चाहे प्रिंट हो या डिजिटल, जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उनके पास इस किताब के पब्लिशिंग राइट्स हैं।

बयान में कहा गया, 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया यह साफ करना चाहता है कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के पब्लिशिंग राइट्स केवल हमारे पास हैं। इस किताब की कोई भी कॉपी पब्लिश, डिस्ट्रीब्यूट या बेची नहीं गई है।'

किताब की कथित गैरकानूनी सर्कुलेशन

कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि किताब की डिजिटल या प्रिंटेड कॉपी किसी तरह से सर्कुलेट हो रही है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और स्पेशल सेल में केस दर्ज किया गया।

पब्लिशर ने चेतावनी दी कि किताब का कोई भी वर्जन, चाहे पूरा हो या कुछ हिस्सा, किसी भी फॉर्मेट में सर्कुलेट किया गया तो इसे कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई भी संस्करण पब्लिक के लिए उपलब्ध नहीं है।

संसद में राहुल गांधी की भूमिका

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में किताब का हवाला देते हुए किताब के कथित अंश पढ़ने का प्रयास किया। यह घटना 2 फरवरी को हुई। लेकिन लोकसभा में अधिकारियों ने उन्हें रोका क्योंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई थी।

इस घटना ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया। राहुल गांधी के हवाले ने किताब को लेकर चर्चा का नया मोड़ दिया और मीडिया में इसे लेकर बहस शुरू हो गई।

पब्लिशिंग हाउस की सख्ती

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया कि किताब का किसी भी प्रकार का वितरण, चाहे प्रिंटेड कॉपी हो, PDF हो या ऑनलाइन फॉर्मेट, बिना अनुमति अवैध और गैरकानूनी माना जाएगा।

पब्लिशर ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किताब के हिस्से का उपयोग या सार्वजनिक रूप से साझा करना कॉपीराइट नियमों के तहत अपराध माना जाएगा। उन्होंने चेताया कि किसी भी उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस में दर्ज मामला

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस मामले में स्पेशल सेल में FIR दर्ज की गई है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस ने किसी पर आरोप लगाने से पहले सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने कहा कि किताब के डिजिटल और अन्य फॉर्मेट में कथित सर्कुलेशन की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किसी ने पब्लिशर की अनुमति के बिना इसे साझा किया है या नहीं।

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