कोलकाता फ्लाईओवर पर ‘रेनबो पेंट’ बना आफत, बारिश में फिसलीं बाइकें; वायरल वीडियो के बाद सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

कोलकाता के चिंगरीघाटा फ्लाईओवर पर बारिश के बाद कई बाइक फिसलने का वीडियो वायरल हुआ। रंगीन पेंट की पकड़ और सड़क सुरक्षा की जांच के आदेश दिए गए हैं।
कोलकाता फ्लाईओवर पर ‘रेनबो पेंट’ बना आफत, बारिश में फिसलीं बाइकें; वायरल वीडियो के बाद सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले फ्लाईओवरों को रंगीन बनाने की मुहिम अब सड़क सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर के चिंगरीघाटा फ्लाईओवर पर हल्की बारिश के बाद कई मोटरसाइकिलों के फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में बाइक सवार गीली, रंगीन सड़क पर संतुलन खोते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि सड़कों और फ्लाईओवरों को आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए पेंट से कहीं वाहनों की पकड़ तो कमजोर नहीं हो रही। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।

वायरल वीडियो में चिंगरीघाटा फ्लाईओवर पर कई बाइकें गुजरती दिखाई देती हैं। इसी दौरान सड़क पर फिसलन के कारण बाइक सवारों का संतुलन बिगड़ जाता है और वे सड़क पर गिर जाते हैं। पीछे चल रही कार के डैशकैम में यह घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ, जिसके बाद वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर साझा किया जाने लगा। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के समय हल्की बारिश हो रही थी और फ्लाईओवर की सतह हाल ही में रंगों से सजाई गई थी। हालांकि, हादसे की परिस्थितियों और फिसलने की सटीक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। दुर्गा पूजा से पहले कोलकाता के कई प्रमुख सार्वजनिक स्थानों को रंगीन रूप दिया गया है। शहर के चिंगरीघाटा और गरियाहाट फ्लाईओवर सहित कुछ अन्य स्थानों पर भी रंगों और पारंपरिक अल्पना शैली की सजावट की गई। इस पहल का मकसद त्योहार से पहले शहर को आकर्षक बनाना था। रंगीन फ्लाईओवरों की तस्वीरें और वीडियो पहले लोगों का ध्यान खींच रहे थे, लेकिन बाइक फिसलने की घटना सामने आने के बाद इसी सजावट को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

 

सड़क सुरक्षा से जुड़े सवालों के बीच सबसे अहम मुद्दा पेंट की गुणवत्ता और उसकी सतह पर टायरों की पकड़ का है। सामान्य सड़क पर वाहन के टायर और डामर के बीच पर्याप्त घर्षण होना जरूरी है, ताकि बाइक मोड़ते समय, ब्रेक लगाते समय या गीली सड़क पर चलते समय संतुलन बना रहे। यदि सड़क पर इस्तेमाल की गई कोटिंग गीली होने पर बहुत चिकनी हो जाती है, तो टायर की पकड़ कम हो सकती है और फिसलने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर दोपहिया वाहनों के लिए ऐसी स्थिति जोखिम भरी हो सकती है। हालांकि, चिंगरीघाटा फ्लाईओवर पर हुई घटनाओं में पेंट की वास्तविक भूमिका तकनीकी जांच से ही तय होगी।

इस मामले में पश्चिम बंगाल की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जांच कराए जाने की बात कही है। उनके मुताबिक, संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम को मौके पर जाकर स्थिति का आकलन करने के लिए कहा गया है। कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KMDA), पुलिस और लोक निर्माण विभाग से जुड़े अधिकारियों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाइकें किन परिस्थितियों में फिसलीं। मंत्री ने कहा कि यदि जांच में पेंट को दुर्घटनाओं का कारण पाया जाता है, तो उसे हटाने सहित जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि सड़क और फ्लाईओवरों पर पेंटिंग का काम दुर्गा पूजा से पहले शहर के सौंदर्यीकरण के लिए कराया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस पहल में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर के तहत कंपनियों का सहयोग लिया गया था। लेकिन किसी भी सार्वजनिक सड़क पर सजावट करते समय वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है। ऐसे में जांच में पेंट के प्रकार, उसकी मोटाई, सतह की बनावट और बारिश के दौरान उसकी पकड़ जैसे पहलुओं को देखना जरूरी होगा।

इस घटना को लेकर सड़क सुरक्षा से जुड़े लोगों ने भी चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि सड़क पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री सामान्य सजावटी पेंट से अलग होनी चाहिए और उसे यातायात के दबाव तथा मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर चुना जाना चाहिए। सड़क पर निशान लगाने या रंगीन सतह तैयार करने के लिए ऐसी सामग्री की जरूरत होती है, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और गीली होने पर भी पर्याप्त घर्षण बनाए रख सके। केवल रंगों की सुंदरता के आधार पर किसी सामग्री को सड़क पर इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जा सकता।

वहीं, वायरल वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर भी जांच की बात सामने आई है। मंत्री ने कहा कि वीडियो पुलिस को सौंपा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसमें दिखाई गई घटना वास्तविक है या नहीं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि बाइक सवार किस कारण फिसले और क्या सड़क की रंगीन सतह ने दुर्घटना में कोई भूमिका निभाई। जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक केवल वीडियो के आधार पर पेंट को हादसों की एकमात्र वजह मानना जल्दबाजी होग

चिंगरीघाटा फ्लाईओवर कोलकाता के व्यस्त मार्गों में शामिल है और यह ईएम बाइपास के जरिए शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ता है। यहां बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, इसलिए सड़क की सतह में किसी भी बदलाव का असर यातायात सुरक्षा पर पड़ सकता है। यदि जांच में सतह के कारण फिसलन की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसियों को जल्द सुधार करना होगा, ताकि आगे किसी वाहन चालक को खतरे का सामना न करना पड़े। साथ ही अन्य रंगीन फ्लाईओवरों की सतह की भी जांच करना उपयोगी हो सकता है।

इस पूरे मामले ने शहरों में सौंदर्यीकरण और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को सामने ला दिया है। त्योहारों के दौरान सड़कों, पुलों और सार्वजनिक स्थानों को सजाना लोगों को आकर्षित कर सकता है, लेकिन ऐसी सजावट से यातायात की सुरक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले सामग्री की तकनीकी उपयुक्तता, मौसम के असर और सड़क पर चलने वाले वाहनों की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

फिलहाल कोलकाता के चिंगरीघाटा फ्लाईओवर पर बाइक फिसलने के वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अब अधिकारियों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना का कारण सड़क की सतह थी, बारिश की वजह से बनी परिस्थितियां थीं या कोई अन्य वजह जिम्मेदार थी। यदि पेंट में खामी सामने आती है, तो उसे हटाने या सतह को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। जांच पूरी होने तक इस घटना को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

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