कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम का शेड ढहने से 5 लोगों की मौत हो गई। 50 से अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। सेना, पुलिस और दमकल विभाग संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बुधवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब दक्षिण कोलकाता के तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के निकट एक निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक ढह गया। इस दुर्घटना में अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि हादसे के समय बड़ी संख्या में मजदूर और कर्मचारी निर्माण स्थल पर मौजूद थे, जिसके कारण 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की संभावना जताई जा रही है।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल, दमकल विभाग और सेना की टीमों को मौके पर तैनात किया गया है।
निर्माण कार्य के दौरान हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय गोदाम परिसर में कंक्रीट ढलाई का कार्य चल रहा था। मजदूर निर्माण प्रक्रिया में व्यस्त थे, तभी अचानक संरचना का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। भारी लोहे की संरचनाएं और कंक्रीट का मलबा नीचे काम कर रहे श्रमिकों पर गिर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई मजदूर सीधे मलबे के नीचे दब गए, जबकि कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
अब तक 13 लोगों का रेस्क्यू, कई अस्पताल में भर्ती
राहत दलों ने अब तक मलबे में दबे 13 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इनमें से कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल भेजा गया।
घायलों को कोलकाता के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कराया गया है, जिनमें एसएसकेएम अस्पताल का ट्रॉमा केयर सेंटर भी शामिल है। डॉक्टरों की टीम घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
सेना, दमकल और आपदा प्रबंधन विभाग जुटे
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए बचाव अभियान को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। कोलकाता पुलिस, राज्य आपदा प्रबंधन समूह, सिविल डिफेंस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज तथा सेना के जवान संयुक्त रूप से राहत कार्य में लगे हुए हैं।
मलबे को हटाने के लिए भारी क्रेन और विशेष मशीनों की मदद ली जा रही है। वहीं, लोहे की मजबूत संरचनाओं और रॉड को काटने के लिए गैस कटर का उपयोग किया जा रहा है ताकि अंदर फंसे लोगों तक जल्द पहुंचा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि बचाव दलों को मलबे के भीतर से लोगों की आवाजें और मदद की पुकार सुनाई दे रही हैं, जिससे उम्मीद बनी हुई है कि और लोगों को जीवित बाहर निकाला जा सकता है।
राहत कार्य में समय के खिलाफ दौड़
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भवन या संरचना के ढहने के बाद शुरुआती 24 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कारण राहत टीमें लगातार काम कर रही हैं और समय बर्बाद किए बिना हर संभावित स्थान की जांच कर रही हैं।
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बचाव अभियान में तकनीकी उपकरणों और खोजी उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि मलबे के नीचे फंसे लोगों की सही स्थिति का पता लगाया जा सके।
सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
हादसे के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों और आम नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों के माध्यम से लोग अपने परिजनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं या आपातकालीन सहायता मांग सकते हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें।घटनास्थल पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और राज्य सरकार के प्रतिनिधि लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
निर्माण स्थल की वैधता और सुरक्षा मानकों की होगी जांच
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जिस भूमि पर यह गोदाम बनाया जा रहा था वह एक निजी कारोबारी के स्वामित्व में थी और इसे एक निजी कंपनी को लीज पर दिया गया था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि निर्माण कार्य सभी आवश्यक स्वीकृतियों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दुर्घटनाओं के पीछे अक्सर निर्माण गुणवत्ता में कमी, संरचनात्मक खामियां, सुरक्षा नियमों की अनदेखी या तकनीकी त्रुटियां जिम्मेदार होती हैं। इसलिए हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी।
भारत में बढ़ती निर्माण दुर्घटनाएं चिंता का विषय
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में निर्माणाधीन इमारतों, पुलों और औद्योगिक संरचनाओं के गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों ने निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से शहरीकरण और बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों के बीच सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक है। यदि निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी निरीक्षण को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तो ऐसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
कोलकाता पहले भी देख चुका है बड़े निर्माण हादसे
कोलकाता का यह हादसा शहर के उन कई बड़े निर्माण हादसों की याद दिलाता है जिन्होंने अतीत में भी भारी जनहानि पहुंचाई थी। वर्ष 2024 में गार्डन रीच क्षेत्र में एक निर्माणाधीन इमारत के गिरने से कई लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले विवेकानंद फ्लाईओवर दुर्घटना ने भी पूरे देश को झकझोर दिया था।
इन घटनाओं के बाद सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और निर्माण गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने की मांग उठी थी, लेकिन ताजा हादसा दर्शाता है कि अभी भी इस दिशा में काफी काम किए जाने की आवश्यकता है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल बचाव अभियान प्राथमिकता बना हुआ है और प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने पर केंद्रित है। इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों की टीम दुर्घटना के कारणों का विश्लेषण करेगी।
जांच से यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी विफलता का परिणाम था या निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी। इसके आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।








