ED ने कोडीन आधारित कफ सिरप रैकेट पर देशभर में 25 जगह छापेमारी कर 1000 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई का खुलासा किया। फर्जी कंपनियों, नकली बिलिंग, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई और फरार मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल की भूमिका की जांच जारी है।
New Delhi: देशभर में कोडीन आधारित कफ सिरप के अवैध व्यापार पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह लगभग 7:30 बजे ED ने एक साथ 25 ठिकानों पर छापे शुरू किए, जिसमें कई राज्यों की टीमें शामिल रहीं। यह तलाशी अभियान उन मामलों से जुड़ा है, जिनमें कफ सिरप की अवैध स्टॉकिंग, ट्रांसपोर्टेशन और सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई की शिकायतें लगातार दर्ज की जा रही थीं।
जांच में सामने आया है कि इस रैकेट ने पिछले महीनों में अलग-अलग राज्यों में कई फर्जी फर्मों के नाम से कारोबार चलाया और करीब 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) अर्जित की। ED को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे रैकेट की व्यापक मौजूदगी और संगठित तरीके से चलाए जा रहे इस अवैध धंधे की गंभीरता साफ होती है।
कई राज्यों में एक साथ छापेमारी
तलाशी अभियान का दायरा देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था। ED ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, गाजियाबाद, सोनभद्र और सहारनपुर में छापे मारे। इसके साथ ही झारखंड की राजधानी रांची और गुजरात के अहमदाबाद में भी टीमें भेजी गईं।
इन ठिकानों से मिले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेज बताते हैं कि कई फर्जी कंपनियों के नाम पर कोडीन आधारित कफ सिरप का बड़े पैमाने पर लेन-देन किया जा रहा था। इन कंपनियों के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था और न ही ये मेडिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई से जुड़ी आधिकारिक गतिविधियां कर रही थीं। यह पूरा नेटवर्क सरकारी एजेंसियों की नजरों से बचते हुए लंबे समय से सक्रिय था।
मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अब भी फरार
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रैकेट का कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल अब भी फरार है। एजेंसियों को संदेह है कि वह दुबई में छिपा हो सकता है। उसके खिलाफ कई राज्यों में मामले दर्ज हैं और उसने फर्जी दस्तावेजों तथा बोगस फर्मों के सहारे इस अवैध सप्लाई चेन को खड़ा किया था।
![]()
इसी केस में उसका पिता भोला प्रसाद पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश पुलिस अब तक 32 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें ट्रांसपोर्टर, सप्लायर, फाइनेंस ऑपरेटर और कई गोदाम संचालक शामिल हैं। इन गिरफ्तारियों से मिले इनपुट ने ED की जांच को और मजबूत कर दिया है।
फर्जी कंपनियों और नकली बिलिंग का बड़ा नेटवर्क
छापेमारी के दौरान ऐसे कई पते मिले, जहां कोई वास्तविक गतिविधि नहीं हो रही थी। लेकिन दस्तावेजों में इन्हें बड़े कारोबारों के रूप में दिखाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट ने फर्जी GST रजिस्ट्रेशन, नकली बिलिंग और गलत स्टॉक रिकॉर्ड के सहारे अपने अवैध कारोबार को वैध रूप देने की कोशिश की।
कई स्थानों से ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन दिखाए गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर इनका कोई आधार नहीं है। इससे साफ है कि इस अवैध व्यापार का उद्देश्य सिर्फ कफ सिरप के माध्यम से गैरकानूनी कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) को अंजाम देना था।
CA विष्णु अग्रवाल सहित कई लोगों की भूमिका की जांच
ED ने इस कार्रवाई में कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और बिचौलियों की भूमिका भी खंगालनी शुरू की है। CA विष्णु अग्रवाल के ठिकानों पर की गई छापेमारी में कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं, जो इस नेटवर्क के फर्जी लेन-देन को बुक करने से जुड़े थे। अलोक सिंह, अमित सिंह सहित अन्य लोगों के घरों और ऑफिसों से भी रैकेट की गतिविधियों से जुड़े अहम रिकॉर्ड मिले हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, यह रैकेट केवल कफ सिरप की अवैध सप्लाई तक सीमित नहीं था, बल्कि बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करने की प्रक्रिया का भी हिस्सा था। पैसा कई फर्जी खातों और फर्मों के माध्यम से घुमाया जा रहा था।
कफ सिरप की सप्लाई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैली
ED की जांच में खुलासा हुआ है कि कफ सिरप की सप्लाई सिर्फ घरेलू बाजारों तक सीमित नहीं थी। इसे नेपाल, बांग्लादेश और अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी भेजा जा रहा था। यह नेटवर्क ट्रकों, छोटे वाहनों और निजी ट्रांसपोर्ट लाइनों के जरिए सप्लाई करता था, जिसमें कई स्थानीय एजेंट भी शामिल थे।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इससे भी ज्यादा बड़ी रकम और कई नए नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि अभी कई डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय डेटा की जांच बाकी है।
जांच आगे बढ़ी तो कई और खुलासे
अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क अभी जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं बड़ा हो सकता है। कई अन्य मेडिकल सप्लायर्स, व्यापारी और परिवहन एजेंट भी इस रैकेट से जुड़े हो सकते हैं। ED उन सभी व्यक्तियों और फर्मों की सूची तैयार कर रही है जिनका नाम संदिग्ध लेन-देन में सामने आया है।









