बॉलीवुड में कई कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही सुर्खियां बटोरीं, लेकिन लंबे समय तक स्टारडम बनाए रखना उनके लिए आसान नहीं रहा। ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं Lisa Ray, जिन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में अपनी खूबसूरती और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का ध्यान खींचा, लेकिन बाद में वह इंडस्ट्री की मुख्यधारा से दूर हो गईं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: 90s और 2000s के दौर में सिनेमा जगत में कई ऐसे कलाकार सामने आए, जिन्हें अपनी पहली या दूसरी ही फिल्म से जबरदस्त पहचान और स्टारडम मिल गया। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में जितना मुश्किल पहचान बनाना होता है, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण उस स्टारडम को लंबे समय तक बनाए रखना होता है। कई कलाकार शुरुआती सफलता के बाद धीरे-धीरे लाइमलाइट से दूर हो जाते हैं।
इसी तरह एक ऐसी एक्ट्रेस की कहानी भी चर्चा में रहती है, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक फ्लॉप फिल्म से की थी, लेकिन उनकी फिल्म के गाने इतने ज्यादा लोकप्रिय हुए कि लोगों ने उन्हें तुरंत नोटिस करना शुरू कर दिया। म्यूजिक की सफलता के चलते उन्हें कुछ समय के लिए काफी पहचान भी मिली, लेकिन बाद में उनका करियर उतनी ऊंचाई तक नहीं पहुंच सका।
‘कसूर’ से मिला पहचान का पहला बड़ा मौका
लीजा रे ने बॉलीवुड में अपनी पहचान साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म कसूर से बनाई। इस फिल्म में उनके साथ Aftab Shivdasani नजर आए थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन इसके गाने सुपरहिट साबित हुए और आज भी याद किए जाते हैं। “कितनी बेचैन होके”, “दिल मेरा तोड़ दिया” और “जिंदगी बन गए हो तुम” जैसे गानों ने फिल्म को लंबे समय तक चर्चा में बनाए रखा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म कसूर का भारत में नेट कलेक्शन लगभग 5.31 करोड़ रुपये और वर्ल्डवाइड कलेक्शन 8.47 करोड़ रुपये रहा था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन कर पाई, लेकिन संगीत ने इसे कल्ट पहचान दिला दी। फिल्म का म्यूजिक मशहूर संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने तैयार किया था, जिसने उस दौर में कई यादगार एल्बम दिए।

लीजा रे की आवाज और डबिंग का दिलचस्प पहलू
फिल्म कसूर से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह है कि इसमें लीजा रे की असली आवाज इस्तेमाल नहीं की गई थी। उनकी डायलॉग डबिंग की जिम्मेदारी अभिनेत्री Divya Dutta ने निभाई थी। हालांकि बाद में दिव्या दत्ता ने एक इंटरव्यू में इस अनुभव को लेकर खुलकर बात की और बताया कि उन्हें इस डबिंग को लेकर व्यक्तिगत रूप से कुछ पछतावा भी हुआ था।
लीजा रे ने अपने करियर की शुरुआत 1994 में फिल्म हंसते खेलते से की थी। इसके बाद उन्होंने कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में काम किया। उन्हें 2005 में ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म Water में भी सराहा गया। हालांकि, कसूर के बाद वह बॉलीवुड की मुख्यधारा से धीरे-धीरे दूर होती चली गईं। उन्होंने खुद एक बार सोशल मीडिया पर बताया था कि उन्हें इंडस्ट्री में सिर्फ एक “ग्लैमरस फेस” के तौर पर देखा जा रहा था, जबकि वह खुद को एक गंभीर कलाकार के रूप में स्थापित करना चाहती थीं।
कैंसर से जंग और दूसरी जिंदगी की शुरुआत
साल 2009 में लीजा रे को मल्टीपल मायलोमा नामक गंभीर ब्लड कैंसर का पता चला। इसके बाद उन्होंने लंबा इलाज कराया और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरिए इस बीमारी को मात दी। उनकी यह जंग उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ साबित हुई, जिसके बाद उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया।









